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थकान का निवारण

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    यदि आप ज़ोर से खाँसना चाहते हैं,
    तो खाँस सकते हैं।
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    किसी को आपके खाँसने से परेशानी
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    नहीं होगी। आप पैर हिला सकते हैं।
    हिल-डुल सकते हैं।
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    आज की शाम के उत्सव के अगले भाग
    के लिए तैयार हो जाईये।
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    धम्म चर्चा
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    बहुत अच्छे। आज शाम की धम्म चर्चा के लिए
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    बहुत सारे ख़्याल थे,
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    पर मैं उस विषय पर बात करूँगा
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    जो बहुत लोगों की समस्या है।
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    मैंने इसे महसूस किया है और ध्यान की सहायता
    से इस पर काबू पाया है: थकान
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    शायद 3, 4 या 5 साल पहले की बात है।
    मुझे समय याद नहीं।
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    वर्त्तमान में रहने से यही होता है।मुझ जैसे
    साधु को मनोभ्रंश (डेमेंशिआ) नहीं होता।
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    हमें केवल वर्तमान-में-जीना-भ्रंश होता है।
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    [हँसी] हम भूत या भविष्य के बारे में
    ज़्यादा नहीं सोचते।
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    जब लोग पूछते हैं - यह कब हुआ था?
    "कभी तो हुआ था "
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    ऐसा नहीं है कि हमें याद नहीं रहता,
    या याद रखना नहीं चाहते।
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    ऐसा बुद्धि की क्षमता बढ़ने से, और वर्तमान
    में रहने से होता है
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    बजाए कि बीते हुए समय में रहने से।
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    कुछ साल पहले जब मैं विदेश में पढ़ा रहा था ,
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    मुझे कुआला लम्पुर में युवक सेमिनार
    में बुलाया गया था,
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    बहुत अच्छा अवसर था, लगभग 400-500,
    15 से 25 साल के युवक-युवतियाँ
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    काफी दिलचस्प बातें कर रहे थे ,
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    उन्होंने लोगों से पुछा, 'आपका सबसे
    मुश्किल मनोभाव क्या है ?'
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    15-25 साल के, चीनी बौद्ध लोग,
    कुआला लुम्पुर, मलेशिया में
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    आपके जीवन की सबसे बड़ी कठिनाई क्या है?
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    और लोगों का जवाब था- थकावट।
    मुझे इस जवाब की उम्मीद नहीं थी।
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    लेकिन यह ज़ाहिर है कि लोग थकान महसूस
    करते हैं
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    जबकि वे अभी अपनी किशोरावस्था में हैं।
    आप अपनी जवानी के दिन याद कीजिये
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    एक किशोर युवक या युवती पर बहुत दबाव
    रहते हैं।
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    आपको स्कूल में अच्छा करना है।
    आपके माता-पिता, अध्यापक,
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    मित्र, सब कहते हैं की पढ़ना और
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    अच्छे नंबर लाना बहुत ज़रूरी है।
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    अभिभावकों को मेरी यह बात अच्छी नहीं लगती।
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    पर मैं बच्चों की तरफ़दारी करता हूँ।
    इससे ज़्यादा फ़र्क
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    नहीं पड़ता कि आपको स्कूल में कितने
    नंबर मिले।
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    डेनियल गोलमैन ने अपनी पुस्तक
    'भावनात्मक बुद्धि'(emotional intelligence)
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    में कहा है कि, आपके स्कूल या विश्वविद्यालय
    के नंबर या सर्टिफिकेट
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    का आपके जीवन को सफल बनाने में ज्यादा
    योगदान नहीं है
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    स्कूल के रिजल्ट से जीवन में सफ़लता नहीं
    मिलती। किसी और काम से मिलती है।
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    कल ही मैं सिंगापुर में लोगों से बात कर
    रहा था
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    थाईलैंड से लौटते समय
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    कि यदि बच्चों को 'F' ग्रेड मिलता है,
    क्या आप जानते हैं कि वह क्या है?
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    मैं एक अध्यापक था।
    'F' मतलब विलक्षण [Fantastic] ।
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    अगर उन्हें 'E' ग्रेड मिलता है,
    मतलब शानदार [Excellent]
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    परन्तु यदि उन्हें 'A' मिलता है,
    उसका मतलब है अहंकारी [Arrogant] .
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    ये सब लोग जो गर्व से कहते हैं कि
    उन्हें 'A' ग्रेड मिले, वे अभिमानी हैं।
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    अपने आप से भरे हुए।
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    इसलिए मुझे 'F' पसंद हैं।
    विलक्षण व शानदार।
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    क्योंकि उन पर अच्छे ग्रेड लाने का या
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    यूनिवर्सिटी में एडमिशन का दबाव नहीं होता।
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    मुझे देखिये, मुझे सबसे अच्छी यूनिवर्सिटी
    में एडमिशन मिला, और फिर क्या हुआ।
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    मुझे कैम्ब्रिज में जाने से कुछ लाभ
    नहीं हुआ।
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    इससे अच्छा होता की मैं किसी दूसरे कॉलेज
    में चला जाता, या कॉलेज जाता ही नहीं।
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    अगर मैं कैम्ब्रिज नहीं जाता तो मैं
    काफी पहले ही साधु बन जाता।
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    वह और भी अच्छा होता। पर ठीक है,
    जीवन ऐसा ही होता है
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    आप हमेशा कुछ सीखते हैं।
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    मुझे हमेशा इस बारे में एक बात याद आती है।
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    वह बात जिसकी वजह से मैं शिक्षक बनने की
    बजाय साधु बन गया।
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    उस समय मुझे उस बात का महत्व इतना नहीं
    लगा था। लेकिन जब आप पीछे मुड़ कर
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    देखते हैं तो समझते हैं कि वे महत्वपूर्ण
    घटनायें ही आपका मार्गदर्शन करती हैं।
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    मैं यूनिवर्सिटी में दुसरे कुछ बौद्ध
    लोगों के साथ था।
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    पर मेरा एक परम मित्र ईसाई था।
    कट्टर ईसाई।
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    वह बाद में हिप्पी बन गया।
    ख़ैर उस समय वह ईसाई था।
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    एक दिन उसने मुझे बताया कि वह बाइबिल क्लास
    के कुछ दोस्तों के साथ
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    सप्ताह में एक दिन वहाँ के एक स्थानीय
    अस्पताल में
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    मानसिक विकलांग लोगों की सेवा करेंगे।
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    जब उसने मुझे बताया तो मैं नहीं जाना
    चाहता था। लेकिन मुझे ऐसा लगा कि यदि
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    मैं नहीं गया तो बौद्ध समाज का नाम ख़राब
    होगा। मेरे जाने की वजह थी मेरा 'अहंकार'.
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    " यदि ईसाई वो काम कर सकते थे तो बौद्ध भी
    कर सकते थे। "
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    बस यही बात थी।
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    मैं ईमानदारी से बता रहा हूँ। मैं वहाँ गया
    क्योंकि वो वहाँ जा रहा था।
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    पर एक अजीब बात हुई।
    जैसा हमेशा जिंदगी में होता है,
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    आप जाते हैं और कुछ काम करते हैं किसी
    वजह से। और फिर दूसरे कारण जुड़ जाते हैं,
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    और आपकी जिंदगी बदल देते हैं।
    वे ईसाई मित्र
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    दो - तीन हफ्तों के लिए गए और छोड़ दिया।
    मैं वहाँ दो साल तक गया।
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    हर दोपहर जब मैं कैंब्रिज में होता था तो
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    क्लास और बाकी काम व्यवस्थित कर लेता था
    ताकि मैं अस्पताल जा सकूँ। पता नहीं क्यों
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    पर मुझे वहाँ अच्छा लगता था। मैं व्यावसायिक
    चिकित्सा विभाग में मनोरोगियों को मदद
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    करता था।उन बच्चों की भावनात्मक बुद्धि
    देखकर आश्चर्य होता था।
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    बच्चे नहीं, बल्कि वे नवयुवक -
    नवयुवतियाँ थे।
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    हालांकि मैं तब नहीं जानता था कि भावनात्मक
    बुद्धि (emotional intelligence) क्या है।
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    यह 1969-70 -71 की बात है. वे सब इतने
    संवेदनशील और भावुक थे, और मैं उनकी दुनिया
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    के बारे में कुछ नहीं जानता था।
    मुझे आज भी याद है।
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    मैं जवान था।मेरा अपनी प्रेमिका से झगड़ा हो
    गया, मैं दुःखी था। मैं जैसे ही वहाँ
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    पहुँचा, वे सब दौड़ते हुए मेरे पास आये और
    मेरे गले लग गये। मैंने पूछा, 'ऐसा क्यों
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    किया?" "आज कुछ गड़बड़ है, है ना?"
    "तुम्हें कैसे पता चला?"
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    वे बहुत भावुक थे। मुझे अच्छे से जानने लगे
    थे। और बहुत प्यार करते थे।
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    और वे गज़ब के जज़्बाती थे।और दूसरी तरफ़ मैं
    नोबेल प्रतिष्ठित विशेषज्ञों के साथ भी बैठा
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    हुआ हूँ, वहाँ उन लोगों से मिलना होता था।
    वे लोग सामाजिक तौर पर बहुत संवेदनहीन थे।
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    उनके मन में भावुकता का एक कण भी नहीं था।
    ख़ैर मैं थोड़ा बड़ा-चढ़ा कर बोल रहा हूँ।
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    पर जब बात जिंदगी की समझ की आती है,
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    मैं उन मनोरोगियों के साथ समय बिताना ज़्यादा
    पसंद करता था। मैंने उनसे बहुत कुछ सीखा।
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    उन्होंने ही मुझे दूसरों के प्रति समानु-
    भूति करना सिखाया। प्रोफ़ेसर, लेक्चरर या
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    दोस्त जो बातें करते थे, वे थीं -
    'गोमायन'
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    मुझे यह शब्द बोलने में वक्त लगा, यह
    पाली भाषा में 'मूर्खता' को कहते हैं।
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    सब कुछ उनके दिमाग में है। दिल में कुछ भी
    नहीं। लड़के और लड़कियों को यह नहीं पता कि
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    कैसे एक-दूसरे के साथ जीवन बिताया जाये,
    सिर्फ कल्पनायें, ख़्वाब, ख्याल और फ़लसफ़े।
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    दूसरी तरफ आप इन मनोरोगियों के पास जायें,
    वे आपकी भावनायें महसूस कर सकते हैं।
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    भले ही वे स्कूल नहीं गए, गणित नहीं पढ़ा,
    लेकिन जब आपकी भावनाओं को समझने की,
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    उन्हें महसूस करने की, आपके साथ हमदर्दी की
    बात आती है, तो ये लोग उसमें निपुण थे।
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    मैं अपने अध्यापकों की बजाय इन लोगों के साथ
    समय बिताना ज़्यादा पसंद करने लगा था. ऐसा
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    क्यों, नहीं जानता था।पर इससे मेरी जिंदगी
    के दूसरे पहलू को बढ़ावा मिला- संवेदनशीलता।
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    क्योंकि हम अपने अंदर की भावनाओं की दुनिया
    से बेख़बर हैं, इसलिए हम बहुत ज्यादा सोचते,
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    बहुत ज़्यादा काम करते हैं। इसलिए हम थके
    रहते हैं। इन बच्चों के जीवन की यह सबसे
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    बड़ी समस्या थी। और यह बात मुझे समझा कर
    उन्होंने हम सबके जीवन में सुधार लाने का
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    रास्ता खोल दिया। न केवल शारीरिक, मानसिक,
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    व भावनात्मक, बल्कि रिश्तों में सुधार भी।
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    आप में से कितने लोग हैं जो शाम को काम से
    घर आते हैं तो चिड़चिड़े होते हैं।
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    गुस्से में होते हैं। इतने लोग मुझे पूछते
    हैं: "मेरे पति हमेशा गुस्से में रहते हैं,
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    हमेशा बच्चों को डांटते रहते हैं, इनके साथ
    रहना बहुत मुश्किल है। क्या करें?
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    क्या आप इन्हें गुस्से पर काबू पाने का कोई
    सुझाव दे सकते हैं ?"
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    मेरा जवाब ये होता है कि, आप उन्हें रात
    को ठीक से सोना सिखाइये।
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    उन्हें अच्छे से आराम करना सिखाईये। देखिये
    कि उनकी थकान मिट जाये,
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    थकावट जो आज मनुष्य जाति का एक हिस्सा बन
    गयी है।
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    मैं ऐसा कह रहा हूँ क्योंकि मैं जीवन को ऐसे
    ही समझता हूँ। कोई रिसर्च नहीं है जो मेरी
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    बात को साबित करे, लेकिन मैं निश्चित हो
    कर कह सकता हूँ की अगर लोग रिसर्च करें तो
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    वे यही पाएंगे जो मैं कह रहा हूँ। यह थकावट
    ही है जिसकी वजह से तलाक़ होते हैं,
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    कितने ही रिश्ते टूट जाते हैं, थकावट की
    वजह से।
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    कैंसर, दिल की बीमारियाँ, थकावट की वजह
    से ही होती हैं
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    और भी कई बिमारियाँ जो आजकल बहुत लोगों
    को हो रही है, जैसे कि
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    अवसाद (डिप्रेशन) - बहुत गहरी थकान।
    यह आजकल इतनी ज़ाहिर सी बात हो गयी है,
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    एक बहुत बड़ी समस्या।
    आपको भी कभी न कभी थकावट महसूस होती होगी,
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    ऐसा लगने लगता है दुनिया में रहना बहुत
    भारी और मुश्किल है।
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    आपको बहुत मेहनत करनी पड़ती है जीने के लिए।
    इस जद्दोजहद के लिए बहुत शक्ति चाहिए,
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    पर कभी-कभी आपके पास वह ऊर्जा
    नहीं होती, और आप अवसाद से घिर जाते हैं,
  • 11:53 - 11:59
    एकदम कम ऊर्जा, किसी को कुछ देने के लिए
    नहीं, कभी-२ बिस्तर से भी उठा नहीं जाता।
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    कभी उठ जाते हैं तो कुछ खाने - पीने का मन
    नहीं करता, और न ही कुछ काम करने का।
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    सिर्फ इसलिए क्योंकि आपके पास शक्ति नहीं
    है, आपको गहरी थकान है।
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    आजकल अत्यधिक थकान परिलक्षण (chronic
    fatigue syndrome) भी एक बीमारी है। मैंने
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    यह पहले कभी नहीं सुना था।ऐसा क्यों है? यह
    एक समस्या है, बीमारी है, इसके कारण हैं -
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    क्योंकि हमारे पास बहुत ही ज़्यादा काम हैं
    करने के लिए।
  • 12:25 - 12:29
    मुझे इस चर्चा के बाद जल्दी से जाना है।
    क्योंकि साधु
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    भन्ते गुणरत्न, बहुत प्रसिद्ध व अच्छे
    साधु हैं, यहाँ आये हुए हैं।
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    वे 88 वर्ष के हैं। उन्हें सप्ताहांत पर
    Jhana ग्रोव पर ध्यान सिखाने आना था।
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    जब सुना कि वे आये हुए हैं, उन्हें
    बुलाने के लिए हमने पृथ्वी-आकाश एक कर दिए ।
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    मुफ़त में ध्यान चर्चा के लिए। और
    उनके लिए वायुयान की टिकिट ले ली।
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    पर फिर वे बीमार पड़ गए। उनके डॉक्टर
    ने कहा कि आप नहीं जा सकते।
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    तो जिम्मेदारी किस पर आ पड़ी?
    मुझ पर। अब मैं उनकी जगह पर
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    रिट्रीट में पढ़ा रहा हूँ। जबकि मुझे इस
    सप्ताहांत पर आराम करना था।
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    मैं अभी थाईलैंड के एक लम्बे सफर से लौटा
    हूँ , बहुत प्रवचन दे कर।
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    और फिर सोमवार सुबह मैं कोरिया जा रहा हूँ,
    प्रवचन के लिए।
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    जबकि ये मेरे आराम करने का समय था।
    इसलिए मैं थक गया हूँ।
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    पर मैं एकदम क्लांत भी हो सकता था, जो
    नहीं हुआ। मैं एक बात जानता हूँ , जो आप
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    इतने बरस ध्यान लगा कर सीख जाते हैं,
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    कि थकावट से कैसे बचा जाये, ताकि आपको
    निराशा, चिड़चिड़ापन, गुस्सा ना घेर ले।
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    ये सब भावनात्मक व शारीरिक रोग हैं।
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    आज के समय में थकावट से कैसे बचा जाये।
    हमें अपने पूर्वजो से ज़्यादा प्रयत्न करने
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    पड़ते हैं, इतना सब उनके समय में नहीं होता
    था। एक - आपको भविष्य कि चिंता करना छोड़ना
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    होगा।क्योंकि आपके पास ऊर्जा नहीं है बर्बाद
    करने के लिए। जब मैं बहुत व्यस्त होता हूँ
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    तो अपना कैलेंडर देखना बंद कर देता हूँ।
    क्योंकि अगर देखूं तो लगेगा 'ओह' इतना सब
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    नहीं कर पाऊंगा। दूसरे साधु पूछते हैं,
    "गुरु ब्रहम आप ये सब कैसे
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    करते हैं?" "क्योंकि मैं
    इसे देखता नहीं हूँ। "
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    आप अपनी कितनी ऊर्जा ये सोचने में खर्च
    कर देते हैं की आप सब काम
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    नहीं कर पाएंगे।
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    मैं ऐसा नहीं करता क्योंकि मुझे पता है कि
    ऐसा करना व्यर्थ है।
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    मैं आज एक साधु को बता रहा था, क्योंकि मैं
    बहुत थका हुआ था तो मुझे एक बात याद आ गयी
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    जब मैं थाईलैंड मैं एक बौद्ध-विहार से दूसरे
    में पूरी आज़ादी से घूमा करता था।
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    पर एक दिन मैं 9:00 बजे खाना खाकर
    पूरा दिन यात्रा करता रहा और उसके बाद
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    खाना नहीं खा सकते थे।और फिर गर्मी में
    सारे दिन की यात्रा थाई बस में। तब की बसें
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    आजकल की बसों जैसी नहीं होती थी। अब तो बहुत
    अच्छी बसें होती हैं - आप मानेंगे नहीं।
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    मैंने देखा है। 40 साल पहले ऐसा नहीं था।
    गर्मी और ऊपर से छोटी-2 दो सीटें, उस पर
  • 15:16 - 15:22
    तीन लोग और साथ में एक मुर्गा भी, या सूअर,
    या कुछ और, पता नहीं क्या
  • 15:22 - 15:28
    घंटों तक ऐसे तंग होकर बैठ कर अंत में
    बौद्ध-विहार पहुंचे जहाँ मुझे जाना था।
  • 15:28 - 15:36
    मुझे समय भी याद है, शाम के 5:45 .
    वहाँ दो साधु और थे।
  • 15:36 - 15:42
    "स्वागत है, आप यहाँ रह सकते हैं, पर आपके
    पास 15 मिनट हैं तैयार होने के लिए, क्योंकि
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    6 बजे से हम ध्यान में बैठेंगे 4 घंटे के
    लिए, बिना हिले-डुले। "
  • 15:49 - 15:56
    "क्या?! मैं सारा दिन यात्रा करता रहा, मैं
    थका हुआ हूँ, मैं नहीं कर पाऊँगा!"
  • 15:56 - 16:05
    पर... फिर मेरे अभ्यास का ज्ञान जाग उठा,
    मैंने शायद कुछ हफ़्ते पहले एक कहानी
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    सुनाई थी, एक पहिये की ठेला गाड़ी में
    मिट्टी ढोने वाली। अगर आपने नहीं सुनी है,
  • 16:10 - 16:15
    तो यह 'अपने दिल के दरवाज़े खोलिये' (Opening
    the Door of Your Heart) पुस्तक में है।
  • 16:15 - 16:19
    यह कहानी है जब मुझे अपने शुरूआती
    दिनों में सुबह 9 बजे से रात 9 बजे
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    तक मिटटी हटाने का काम दिया गया था,
    क्योंकि मेरे गुरु यह चाहते थे।
  • 16:23 - 16:30
    यह बहुत मेहनत का काम था, बहुत कड़ी
    मेहनत। पर मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता था
  • 16:30 - 16:37
    मैं स्वस्थ व तंदरुस्त था, अभी भी हूँ।
    काम पूरा हो गया।और उस रात गुरु चाह दूसरे
  • 16:37 - 16:43
    मठ में चले गए। और उनकी जगह जिस साधु ने
    कार्यभार संभाला, उन्होंने मुझसे कहा,
  • 16:43 - 16:49
    "तुमने यह गलत जगह रखी है, इसे यहाँ से
    हटाओ। इसका मतलब 3 दिन की और कड़ी मेहनत।
  • 16:49 - 16:55
    मैं कर सकता था, पर बहुत गंदे हो जाते थे,
    और पसीने, और मच्छर इत्यादि ।
  • 16:55 - 16:59
    आपके दोनों हाथ गाड़ी पर होते हैं, आप
  • 16:59 - 17:02
    मच्छरों से बच नहीं सकते। आप पसीने-2 हो
    रहे होते हैं
  • 17:02 - 17:05
    और मच्छर आपके ऊपर अपना भोजन कर रहे
    होते हैं
  • 17:05 - 17:08
    जब आपको वैसा काम करना पड़े,
  • 17:08 - 17:11
    ६ दिन के बाद आपको कितनी राहत मिलेगी।
  • 17:11 - 17:14
    उस रात को मेरे गुरु चाह
  • 17:14 - 17:17
    वापिस आ गए और अगली सुबह मुझे बोले,
  • 17:17 - 17:20
    "वह मिटटी तुमने वहाँ क्यों डाल दी?
  • 17:20 - 17:23
    मैंने तो तुम्हे उसे दूसरी जगह डालने को
    कहा था।
  • 17:23 - 17:28
    हटाओ इसे यहाँ से।"
    मतलब और ३ दिन की मेहनत।
  • 17:28 - 17:32
    मच्छरों से ग्रस्त पसीने के जंगल में।
  • 17:32 - 17:34
    वो कैदी जो जापानी लोगों के लिए
  • 17:34 - 17:37
    दूसरे विश्वयुद्व में काम करते थे, मैं समझ
    सकता था कि उन्हें कैसा महसूस होता होगा।
  • 17:37 - 17:40
    ईमानदारी से, बहुत मेहनत का काम
  • 17:40 - 17:42
    और हम कुपोषित भी थे।
  • 17:42 - 17:44
    आप मेरी तब की फोटो देखिये,
  • 17:44 - 17:47
    अब जैसा बिलकुल नहीं दिखता। सच में
  • 17:47 - 17:49
    आप मुझे पहचानेंगे नहीं।
  • 17:49 - 17:53
    मैं थोड़ा मोटा हो गया हूँ क्योंकि अब
    मैं पूर्ति कर रहा हूँ
  • 17:53 - 17:57
    पहले मैं बहुत पतला था, मेरे ख्याल से यह
    उचित है [हंसी]
  • 17:57 - 17:59
    ख़ैर, अगला दिन हुआ,
  • 17:59 - 18:02
    मैं ६ दिन पहले से कठिन परिश्रम कर रहा था,
  • 18:02 - 18:05
    और ३ और दिन का काम मेरे सामने था,
  • 18:05 - 18:10
    मैं शिकायत करने लगा। मैं पहले से ही थका
    हुआ था, बहुत काम कर चुका था।
  • 18:10 - 18:14
    मैंने शिकायत की, वे दिन अच्छे थे,
  • 18:14 - 18:17
    क्योंकि तब ज्यादा विदेशी लोग नहीं थे।
  • 18:17 - 18:20
    सिर्फ थाई साधु, और कुछ लाओस के साधु,
  • 18:20 - 18:24
    तो मैं अंग्रेजी में गाली दे सकता था।
  • 18:24 - 18:27
    मुझे लगा की किसी को समझ नहीं आयेगा।
  • 18:27 - 18:30
    लेकिन यद्यपि उन्हें अंग्रेज़ी नहीं आती थी,
  • 18:30 - 18:33
    लेकिन वे मेरी शारीरिक भाषा समझ सकते थे,
  • 18:33 - 18:35
    मैं सच में मुसीबत में था।
  • 18:35 - 18:36
    तब उनमें से एक साधु,
  • 18:36 - 18:39
    मुझे उनका नाम याद नहीं, पर आप जो कोई
    भी थे,
  • 18:39 - 18:42
    आपको धन्यवाद, धन्यवाद, धन्यवाद।
  • 18:42 - 18:45
    उन्होंने मुझे अदभुत शिक्षा दी, कहा,
  • 18:45 - 18:48
    "ठेले को धकेलना आसान है,
  • 18:48 - 18:53
    उसके बारे में सोचते रहना मुश्किल काम है।"
  • 18:53 - 18:55
    उन्होंने मुझे पकड़ लिया था।
  • 18:55 - 18:58
    मैं इसके बारे में इतना ज़्यादा सोच रहा था,
  • 18:58 - 19:01
    इसीलिए मुझे यह इतना मुश्किल लग रहा था।
  • 19:01 - 19:05
    काम करना आसान था, इसलिए धन्यवाद, धन्यवाद,
    धन्यवाद।
  • 19:05 - 19:09
    मैंने उसके बारे में सोचना बंद कर दिया और
    यह फिर से आनंददायक हो गया।
  • 19:09 - 19:12
    हम दूसरे साधुओं के साथ पहले पहुंचने की दौड़
  • 19:12 - 19:16
    लगाने लगे, कौन फावड़ा चलायेगा,
  • 19:16 - 19:18
    कौन मिट्टी ठेले में डालेगा,
  • 19:18 - 19:21
    माफ़ करना, क्या मैंने ज़ोर से मिटटी फेंकी?
  • 19:21 - 19:24
    मैंने जानबूझ कर ही किया था।
  • 19:24 - 19:27
    मज़े करना, खेल खेलना।
  • 19:27 - 19:34
    मैं वैसे ही बहुत चंचल हूँ।
  • 19:34 - 19:38
    कुछ साल पहले मैं वियतनाम में एक कांफ्रेंस
    में गया था
  • 19:38 - 19:42
    आप जानते ही हैं, बड़ी कांफ्रेंस में,
  • 19:42 - 19:45
    आयोजक आपको कुछ जगह घुमाने ले जाते हैं।
  • 19:45 - 19:48
    मुझे पर्यटन पसंद नहीं, पर जाना पड़ता है।
  • 19:48 - 19:53
    तो मैं वियतनाम में कहीं था,
  • 19:53 - 19:57
    नहरों, भूमिगत टनल के पास
  • 19:57 - 19:58
    जहाँ बार्ज से जाना पड़ता था,
  • 19:58 - 20:03
    बहुत सुन्दर जगह। परन्तु जब वापिस आ
    रहे थे...
  • 20:03 - 20:10
    वास्तव में मैं सिंगापुर का प्रतिनिधित्व
    कर रहा था,
  • 20:10 - 20:14
    ऑस्ट्रेलिया का नहीं। मैं सिंगापुर वाली
    नाव में था
  • 20:14 - 20:16
    और एक और भी सिंगापुर की नाव थी,
  • 20:16 - 20:18
    हमारी नाव में थेरावाद साधु थे,
  • 20:18 - 20:21
    और महायान साधु दूसरी नाव में थे,
  • 20:21 - 20:22
    मैंने उनकी तरफ देखा और कहा,
  • 20:22 - 20:26
    "चलो दौड़ हो जाये, देखते हैं कौन बेहतर है,
  • 20:26 - 20:29
    महायान या थेरावाद?" [हँसी] ये बौद्ध धर्म
  • 20:29 - 20:30
    के दो भाग हैं। हमने दोनों थेरावाद
  • 20:30 - 20:33
    और महायान के बीच दौड़ करा दी। मैं थेरावाद
  • 20:33 - 20:36
    वाली नाव में चप्पू चला रहा था, और महायान
  • 20:36 - 20:38
    साधु अपनी नाव में जी-जान लगा कर चप्पू चला
  • 20:38 - 20:40
    रहे थे, और कौन जीता? ज़ाहिर है
  • 20:40 - 20:44
    थेरावाद जीता। निस्संदेह।
  • 20:44 - 20:45
    यदि आप बौद्ध धर्म जानते हैं,
  • 20:45 - 20:48
    महायान बोधिसत्त्व हैं,
  • 20:48 - 20:50
    वे दूसरे लोगों को परिज्ञान (enlightenment)
  • 20:50 - 20:52
    में मदद करते हैं, स्वयं से पहले। उन्होंने
  • 20:52 - 20:56
    हमें दौड़ में आगे जाने दिया, यह उनकी
    प्रथा है। [हँसी]
  • 20:56 - 21:00
    मैं मज़ाक कर रहा हूँ। साधु भी बहुत मज़े
    करते हैं।
  • 21:00 - 21:04
    हम कभी-२ बेवकूफ़ी भी करते हैं, पर उसमें भी
    मज़ा आता है।
  • 21:04 - 21:08
    धर्म कभी-२ बहुत गंभीर हो जाता है, पर मैं
  • 21:08 - 21:10
    गंभीर धर्म के बिलकुल ख़िलाफ़ हूँ।
  • 21:10 - 21:13
    ख़ैर, तब मैंने सीखा कि जीवन में
  • 21:13 - 21:18
    आनंद कैसे लिया जाये, क्योंकि मैं थकावट से
    क्षीण था,
  • 21:18 - 21:20
    ठेले खीच कर। लेकिन बजाय
    सोचने के
  • 21:20 - 21:24
    मैंने वह काम कर दिया।
  • 21:24 - 21:26
    और सारी थकावट गायब हो गयी।
  • 21:26 - 21:28
    आज शाम की ही तरह
  • 21:28 - 21:31
    सारी थकावट ख़तम हो जाये यदि आप
    इसके बारे में सोचना बंद कर दें।
  • 21:31 - 21:33
    भविष्य के बारे में सोचना, चिंता करना।
  • 21:33 - 21:39
    आपकी सारी ऊर्जा सिर्फ सोचने में व्यर्थ
    हो जाती है।
  • 21:39 - 21:41
    अगर आप थके हैं, एक व्यस्त दिन के बाद ,
  • 21:41 - 21:46
    भगवान के लिए, सोचना बंद कीजिये।
  • 21:46 - 21:49
    और शिकायत करना, चिंता करना, और डरना भी..
  • 21:49 - 21:51
    और योजनायें बनाना भी..
  • 21:51 - 21:55
    आपका दिमाग़ पहले ही थका है, उसे थोड़ी शांति
    दीजिये।
  • 21:55 - 21:58
    पर लोग क्या करते हैं जब थके होते हैं ?
  • 21:58 - 22:01
    वे चिड़चिड़े हो जाते हैं, वे नहीं जानते कि
    'सहज' कैसे रहा जाये।
  • 22:01 - 22:03
    लोग हमेशा बहुत ज्यादा सोचते रहते हैं।
  • 22:03 - 22:08
    और ये सबसे बड़ा कारण है की लोगों को
    इतनी थकान होती है।
  • 22:08 - 22:13
    बहुत ज़्यादा सोचना, बजाये कि काम करना
  • 22:13 - 22:15
    मुझे नहीं पता की आप इस सप्ताह के अंत में
    क्या करने वाले हैं
  • 22:15 - 22:18
    इसके बारे में सोचते मत रहिये बस कर दीजिये।
  • 22:18 - 22:20
    ये बात अपने पति को भी बताइये
  • 22:20 - 22:22
    जिसे गैराज की सफाई करनी होती है
  • 22:22 - 22:27
    कहिये, 'पतिदेव सोचो मत, बस कर दो " [हँसी]
  • 22:27 - 22:30
    आपको बायोप्सी (biopsy) करवानी है,
  • 22:30 - 22:33
    इसके बारे में सोचते मत रहिये, क्योंकि
    सोचने से
  • 22:33 - 22:37
    आप क्लांत हो जाते हैं, "मुझे कैंसर है,
    मैं मरने वाला हूँ..."
  • 22:37 - 22:39
    इसके बारे में सोचो मत, बस कर दो।
  • 22:39 - 22:43
    यहाँ तक की मरना भी ठीक है, बस उसके बारे
    में सोचो मत,
  • 22:43 - 22:49
    बस कर दो [हंसी]
  • 22:49 - 22:52
    इसके बारे में सोचना समस्या है।
  • 22:52 - 22:56
    पर खुद से ऐसा मत करिये, बस जब हो जाये
    तब ठीक है।
  • 22:56 - 23:00
    मैं थकावट के बारे में इतना जान पाया हूँ
  • 23:00 - 23:04
    कि थकावट शारीरिक क्षीणता है, जिसके
  • 23:04 - 23:07
    बारे में आप ज्यादा कुछ नहीं कर सकते,
  • 23:07 - 23:09
    हालांकि थोड़ा कर सकते हैं, पर ज़्यादातर
  • 23:09 - 23:12
    मानसिक और भावनात्मक थकावट होती है।
  • 23:12 - 23:18
    भावनात्मक थकान, क्योंकि आप बहुत काम
    करते हैं।
  • 23:18 - 23:19
    पता नहीं आप क्यों ऐसा करते हैं।
  • 23:19 - 23:24
    कभी-२ लोग कहते हैं, "मुझे करना होगा।"
    'नहीं'.
  • 23:24 - 23:27
    "मेरे बॉस मुझसे बहुत काम करने की
    उम्मीद करते हैं।"
  • 23:27 - 23:29
    अगर उन्हें लगता है की आप थोड़ा भी काम कर
  • 23:29 - 23:32
    रहे हैं, तो बॉस के लिए ठीक है [हँसी]
  • 23:32 - 23:36
    मुझे कार्टून पढ़ना पसंद है,
  • 23:36 - 23:40
    डिल्बर्ट कार्टून।
  • 23:40 - 23:44
    डिल्बर्ट कार्टून में वॉली ऑफिस में काम
    करता है,
  • 23:44 - 23:47
    आप उसे देखते हैं सिर्फ कॉफ़ी का कप दायें से
    बायें,
  • 23:47 - 23:50
    और फिर बायें से दायें ले जाते हुए। वह और
    कोई काम नहीं करता,
  • 23:50 - 23:52
    सिर्फ कॉफ़ी यहाँ से वहाँ ले जाता है,
  • 23:52 - 23:55
    और ऐसा लगता है कि वो काम कर रहा है,
  • 23:55 - 23:57
    और इस तरह वह अपनी नौकरी बचाता है,
  • 23:57 - 24:02
    शायद मैं भी ऐसा ही करता हूँ। [हँसी]
  • 24:02 - 24:05
    एक और भी अच्छा कार्टून है
  • 24:05 - 24:08
    जो मैंने उस दिन देखा,
  • 24:08 - 24:11
    किसी ने मुझे भेजा था, यह अच्छा है
  • 24:11 - 24:16
    इस बारे में कि- लोग मरने के बारे में
    चिंता क्यों करते हैं।
  • 24:16 - 24:18
    चिंता मत कीजिये, ये अभी हुआ नहीं है,
  • 24:18 - 24:21
    इसके बारे में मत सोचिये, भविष्य की चिंता
    मत कीजिये।
  • 24:21 - 24:25
    इस कार्टून का नाम है - Peanuts,
  • 24:25 - 24:29
    स्नूपी और चार्ली ब्राउन इसके पात्र हैं।
  • 24:29 - 24:32
    और सही में, आप ये कॉमिक्स पढ़िए, आपको इनमे
  • 24:32 - 24:35
    ज्यादा काम की बातें लगेंगी, बजाए की
  • 24:35 - 24:39
    संपादकीय या समाचार पढ़ने के।
  • 24:39 - 24:42
    ये ज्यादा व्यावहारिक हैं।
  • 24:42 - 24:47
    इसमें चार्ली ब्राउन और उसका कुत्ता स्नूपी
  • 24:47 - 24:49
    कहीं घूमने जाते हैं,
  • 24:49 - 24:52
    वे एक घाट पर बैठे हैं,
  • 24:52 - 24:56
    दोपहर का मज़ा ले रहे हैं, सामने सुन्दर
    दृश्य है।
  • 24:56 - 24:59
    सिर्फ पहाड़, नहर और पानी।
  • 24:59 - 25:01
    सुन्दर दोपहर में समय बिताते हुए,
  • 25:01 - 25:05
    चार्ली ब्राउन ने अपने कुत्ते स्नूपी से
    कहा,
  • 25:05 - 25:13
    "तुम्हे पता है स्नूपी, हम सब एक दिन मर
    जायेंगे।"
  • 25:13 - 25:16
    और स्नूपी, महान दार्शनिक,
  • 25:16 - 25:20
    वह बहुत बुद्धिमान है, मनुष्यों से भी
    ज्यादा,
  • 25:20 - 25:25
    स्नूपी ने कहा, 'सच है, एक दिन हम सब मर
    जायेंगे,
  • 25:25 - 25:32
    पर बाकि दिन हम सब नहीं मरेंगे।" [हँसी]
  • 25:32 - 25:35
    कितनी बुद्धिमानी की बात है.
    एक दिन तुम मर जाओगे,
  • 25:35 - 25:38
    पर बाकी दिन नहीं [हंसी]
  • 25:38 - 25:41
    तो फिर आप इतने नकारात्मक क्यों हैं?
  • 25:41 - 25:45
    इतना सोचिये नहीं, क्योंकि इसके बारे में
  • 25:45 - 25:49
    सोचना हमें थका देता है।
  • 25:49 - 25:54
    आप चाहते हैं आपके बच्चे TER में अच्छे
    नंबर लायें, इसके बारे में सोचिये मत।
  • 25:54 - 25:58
    इससे ज्यादा फर्क नहीं पड़ता,
    आप कर सकते हैं, तो ठीक है...
  • 25:58 - 26:02
    अगर यह आपके लिए स्वाभाविक है, यदि आप
    प्रतिभाशाली हैं, तब ठीक है,
  • 26:02 - 26:05
    पर अपने आपको ज्यादा मत खींचिए।
  • 26:05 - 26:08
    कुछ माता-पिता इस बात पर मुझसे नाराज़ हो
    जाते हैं। पर मैं चाहता हूँ कि
  • 26:08 - 26:11
    इन बच्चों की भावनात्मक बुद्धि बढ़े,
    इन्हें प्यार व इज़्ज़त मिले,
  • 26:11 - 26:17
    भले ही वे परीक्षा में अच्छा करें या नहीं।
  • 26:17 - 26:22
    मैं कहता हूँ की यहाँ मौजूद आधे लोगों के
    बच्चे औसत बुद्धि के होंगे।
  • 26:22 - 26:27
    आपके बच्चे औसत से कम बुद्धि के होंगे।
  • 26:27 - 26:30
    यह तर्कसंगत है, ऐसा होना ही है।
  • 26:30 - 26:32
    आधे बच्चे औसत से कम बुद्धि के होते हैं,
  • 26:32 - 26:39
    ऐसा होना है, क्योंकि यही औसत का नियम है।
  • 26:39 - 26:43
    अगर आप सभी आइंस्टीन हो, तो आधे आइंस्टीन
  • 26:43 - 26:47
    औसत से कम होंगे। [हँसी]
  • 26:47 - 26:53
    पर आप सोचते हैं- "नहीं मेरा बच्चा ऐसा नहीं
    हो सकता, दूसरे का हो सकता है, पर मेरा
  • 26:53 - 26:57
    नहीं। देखिए , अपने बच्चों को थोड़ी छूट
    दीजिये।
  • 26:57 - 27:02
    उन्हें आराम से रहने दीजिये, क्योंकि अगर
  • 27:02 - 27:05
    आप उन पर ज्यादा दबाव नहीं डालेंगे, तो वे
  • 27:05 - 27:09
    छोटी उम्र में निढाल नहीं होंगे, और उनकी
  • 27:09 - 27:12
    भावनात्मक बुद्धि बढ़ेगी, जो कि मैंने
  • 27:12 - 27:16
    डाउन सिंड्रोम वाले लोगों में देखी थी।
  • 27:16 - 27:20
    खूबसूरत लोग। वे हिसाब - किताब नहीं कर
    सकते थे ,
  • 27:20 - 27:25
    बिजली के कारीगर नहीं बन सकते थे, पर साधु
    जरूर बन सकते थे।
  • 27:25 - 27:28
    वे महसूस कर सकते थे, वे संवेदनशील थे, और
  • 27:28 - 27:31
    उनके आपस में खूबसूरत रिश्ते थे।
  • 27:31 - 27:34
    भाई - बहन , संस्थागत ,
  • 27:34 - 27:38
    पर बहुत दयालु। मैंने देखा है।
  • 27:38 - 27:40
    आप किस तरह के इंसान बनना चाहते हैं ?
  • 27:40 - 27:44
    और अपने बच्चों को बनाना चाहते हैं? वे
    लोग निढाल नहीं थे, वे मज़ा करते थे।
  • 27:44 - 27:49
    और जब हम जैसे हैं वैसा अपने आपको स्वीकार
    कर लेते हैं,
  • 27:49 - 27:52
    बजाये कि ....
  • 27:52 - 27:55
    बच्चों को ज्यादा दबाव मत दीजिये, उनका
  • 27:55 - 27:59
    पालन-पोषण कीजिये, प्रोत्साहन दीजिये,
    प्रेरित कीजिये,
  • 27:59 - 28:02
    कौन जानता है कि वे जीवन में क्या बनेंगे ?
  • 28:02 - 28:04
    वे सब यूनिवर्सिटी नहीं जाने वाले
  • 28:04 - 28:06
    यह बड़ा दुखदायी है कि सबको यूनिवर्सिटी
  • 28:06 - 28:08
    जाना पड़ता है - जीवन में और भी बहुत कुछ है।
  • 28:08 - 28:12
    दुनिया मैं इतने सारे लोगों को
  • 28:12 - 28:15
    यूनिवर्सिटी मारती है।
  • 28:15 - 28:19
    एक भित्ति चित्र था, मुझे याद है
  • 28:19 - 28:21
    फिलॉसॉफी विभाग के बाहर था ,
  • 28:21 - 28:27
    नहीं, भौतिक विज्ञान की लैब के बाहर था।
  • 28:27 - 28:30
    उन दिनों के भित्ति चित्र , लोग देखने जाते
    थे,
  • 28:30 - 28:34
    क्योंकि उसका अर्थ बहुत गहन था।
  • 28:34 - 28:39
    वह था - "परिक्षाएँ डिग्री से मारती हैं "
  • 28:39 - 28:43
    आप समझे इस मज़ाक को? डिग्री से मारना।
  • 28:43 - 28:47
    वे सीखने की क्षमता ख़त्म करती हैं, ज्ञान
  • 28:47 - 28:50
    खोजने का जोश ख़त्म करती हैं, बस हमें
  • 28:50 - 28:53
    परीक्षा देनी है और नंबर लाने हैं - जो
    ज़्यादा ले आये।
  • 28:53 - 28:58
    वे भावनात्मक बुद्धि को भी ख़त्म करती हैं ,
  • 28:58 - 29:01
    स्कूल व कॉलेज ज़्यादातर, शायद कुछ बदल
  • 29:01 - 29:03
    गए हैं, पर ज्यादातर आपकी खोजने की क्षमता
  • 29:03 - 29:10
    और मिल-जुल कर काम करने की क्षमता को ख़त्म
  • 29:10 - 29:13
    करते हैं , क्योंकि सबको सिर्फ़ अपने-२ नंबर मिलते हैं।
  • 29:13 - 29:16
    आपको अपने मित्र से प्रतियोगिता करनी पड़ती
  • 29:16 - 29:20
    है, और यह सब बहुत थका देता है।
  • 29:20 - 29:24
    बहुत बार आपको वह बनना पड़ता है जो कि आप
    नहीं हैं।
  • 29:24 - 29:31
    वह जीवन का बहुत बड़ा तनाव है। मुझे देखिये,
    मुझे प्रवचन देने में तनाव नहीं होता।
  • 29:31 - 29:35
    बहुत साल पहले मैंने इसका हल ढूंढ लिया था।
    बहुत आसान तरीका।
  • 29:35 - 29:40
    वह यह कि मैं प्रवचन दूँगा, यदि आपको पसंद
    आया, बहुत अच्छे! मुझे ख़ुशी होगी यह
  • 29:40 - 29:45
    देखकर कि मैंने आपको मदद की आपके जीवन
    को बेहतर बनाने में।
  • 29:45 - 29:49
    मुझे ख़ुशी होती है अगर आपको मेरी बातें
    अच्छी लगती हैं।
  • 29:49 - 29:53
    पर मुझे ज्यादा ख़ुशी होगी अगर आपको वो पसंद
    न आये।
  • 29:53 - 29:57
    क्योंकि तब आप मुझे अकेले छोड़ देंगे और मैं
    अपनी कुटिया में ज्यादा समय बिता सकूंगा।
  • 29:57 - 30:00
    मुझे आराम करने का मौका मिलेगा अगर आपको
    मेरी बातें पसंद न आएं,
  • 30:00 - 30:04
    ऐसे भी आपने मेरे सारे चुटकले और कहानियाँ
    पहले सुने हुए हैं,
  • 30:04 - 30:08
    तो किसी को यहाँ नहीं आना पड़ेगा, बहुत खूब।
  • 30:08 - 30:13
    मैंने यह तरीका सोचा था, पर वह काम नहीं
    आया।
  • 30:13 - 30:18
    मैंने सोचा कि मैं अपनी सारी कहानियाँ
    किताब में लिख दूँ, ताकि आपको यहाँ नहीं
  • 30:18 - 30:23
    आना पड़े। मैंने उन्हें बार-२ दोहराता हूँ
    ताकि आपको बोरियत हो जाये और आप यहाँ आना
  • 30:23 - 30:25
    बंद करें, पर यह उपाय काम नहीं करता,,
    और आप लोग आते
  • 30:25 - 30:29
    रहते हैं। आप सब स्वपीड़न कामुक हैं [हँसी]
  • 30:29 - 30:35
    देखिए बात यह है कि, मुझे फर्क नहीं पड़ता।
    दोनों स्थितियों में जीवन अच्छा है।
  • 30:35 - 30:38
    आप सफल होते हैं, या सफल नहीं होते हैं।
  • 30:38 - 30:45
    पर समस्या यह है कि आपके ऊपर बहुत दबाव है,
    आपको सफलता का केवल एक ही तरीका पता है।
  • 30:45 - 30:50
    यह जीवन की सफलता को मापने का एक संकीर्ण
    नज़रिया है।
  • 30:50 - 30:56
    मैं सफलताओं को मापने के तरीके बढ़ाने
    चाहता हूँ।
  • 30:56 - 31:03
    यदि आप सड़क पर भी रह रहे हैं, आप वहां खुशी
    से रह रहे हैं।
  • 31:03 - 31:05
    क्या यह सफ़लता है ?
  • 31:05 - 31:09
    लोग सोचते हैं, "बेचारा गरीब इंसान"
  • 31:09 - 31:13
    आप उसको पूछिए, और वह कहे, "नहीं, मैं
    मज़े में हूँ, मुझे चिंतायें नहीं हैं .... "
  • 31:13 - 31:17
    हाँ थोड़ी ठण्ड जरूर है ...
    क्या आप कभी सड़क पर रहे हैं?
  • 31:17 - 31:21
    मुझे याद है हिप्पी वाले सालों में,
    पुल के नीचे रहना ...
  • 31:21 - 31:25
    वह साधु बनने के बाद मेरी सबसे अच्छी
    यादें हैं।
  • 31:25 - 31:30
    जब थाईलैंड में 5 साल के बाद हमें मठ छोड़
    देना था,
  • 31:30 - 31:34
    आपको आपकी बुनियादी शिक्षा मिल चुकी होती
    है, और आपको मठ छोड़ कर जाना होता है।
  • 31:34 - 31:41
    और आपको चल कर जाना होता है, अपना
    सारा सामान खुद से उठा कर।
  • 31:41 - 31:46
    यह हल्का ही था, मैं चल पा रहा था।
    मेरा सारा सामान मेरी पीठ पर
  • 31:46 - 31:51
    लदा था, पर कभी पीठ दर्द नहीं की।
    और स्वतंत्रता का एहसास अद्भुत था,
  • 31:51 - 31:56
    एक परिंदे की तरह, आप मनुष्य हो कर भी
    एक परिंदे जैसे आज़ाद हो सकते थे।
  • 31:56 - 32:02
    हर चौराहे पर आप जहाँ भी जाना चाहें आप जा
    सकते थे,
  • 32:02 - 32:07
    आपके ऊपर कोई दबाव नहीं था कि आपको
    कहीं पहुँचना है या कुछ काम करना है।
  • 32:07 - 32:15
    किसी काम को करने की निर्धारित तिथि नहीं,
    न ही कोई अपॉइंटमेंट, जो अच्छा रास्ता लगे
  • 32:15 - 32:21
    उस पर चल पड़ो। कहीं भी सो जाओ, धान के खेत
    में, या घुड़साल में।
  • 32:21 - 32:28
    सबसे उत्तम सोने की जगह, मेरे गुरु के
    अनुसार थी, शमशान भूमि।
  • 32:28 - 32:33
    उसका कारण यह था कि थाई लोग भूतों से बहुत
  • 32:33 - 32:39
    डरते हैं, तो आपको परेशान करने वहां कोई
    नहीं आएगा।
  • 32:39 - 32:42
    पर यदि आप कहीं और रहते हैं तो लोग हमेशा
    आपसे कुछ न कुछ
  • 32:42 - 32:46
    पूछने आते रहते हैं, इसलिए शमशान भूमि मेरी
    पसंदीदा जगहों में से थी,
  • 32:46 - 32:49
    रात को सोने के लिए।
  • 32:49 - 32:57
    बाकि सब भी वहां सो ही रहे होते हैं -
    शव इत्यादि [हँसी]
  • 32:57 - 33:00
    सोने के लिए वह बहुत अच्छी जगह है।
  • 33:00 - 33:05
    ख़ैर मैं कह रहा था, यह बहुत अच्छा अहसास
    होता है कि आपके ऊपर कोई दबाव न हो।
  • 33:05 - 33:08
    पूरी आज़ादी, जहाँ जाना है जाओ।
  • 33:08 - 33:14
    सुबह हो जाये तो किसी भी गाँव में चले जाओ,
    वहाँ भिक्षा में आपको खाने के लिए मिल
  • 33:14 - 33:20
    जायेगा। आपको पैसे की जरुरत नहीं होती।
    केवल अपना भिक्षा का कटोरा चाहिए।
  • 33:20 - 33:28
    आज़ादी का सुंदर एहसास, यदि आप बहुत
    चले हों,
  • 33:28 - 33:35
    वह भी गर्मी में, फिर भी आप थके हुए
    या क्लांत महसूस नहीं करते, क्योंकि
  • 33:35 - 33:39
    आप ज़्यादा सोचते नहीं, क्योंकि सोचने
    के लिए कुछ था ही नहीं।
  • 33:39 - 33:43
    आप किस चीज़ के बारे में सोचते हैं?
    आपकी चिंतायें।
  • 33:43 - 33:46
    आपको क्या करना है और वह सब कैसे होगा,
    वगैरह-२।
  • 33:46 - 33:52
    हम कितना समय और ऊर्जा बर्बाद करते हैं
    भविष्य की चिंता में।
  • 33:52 - 33:59
    यदि आप थकान से मुक्ति पाना चाहते हैं,
    और यह आपकी बड़ी समस्या है,
  • 33:59 - 34:04
    तो एक बात आपको सीखनी होगी कि
    अपने दिमाग को सक्षम कैसे रखा जाये।
  • 34:04 - 34:09
    जीवन के काम करना आसान है, उनके बारे में
    सोचते रहना कठिन है।
  • 34:09 - 34:16
    जीवन-साथी के साथ रहना आसान है,
    लेकिन यदि आप इसके बारे में सोचते रहें तो
  • 34:16 - 34:19
    मुश्किल लगता है। थाईलैंड में कोई कह रहा था
  • 34:19 - 34:24
    "मेरे पति बहुत दुष्ट हैं, मुझसे बुरा
    व्यवहार करते हैं। "
  • 34:24 - 34:30
    अगर तुम्हारे पति बुरा व्यवहार करते हैं,
  • 34:30 - 34:37
    बुरा बोलते हैं, तो याद रखो, तुम्हारे
    पास दो कान हैं,
  • 34:37 - 34:43
    एक से सुनो, दूसरे से निकाल दो,
    अपने पास कुछ मत रखो।
  • 34:43 - 34:47
    क्योंकि यदि अपने पास रखा,
    उसका मतलब होगा उसके बारे में सोचना,
  • 34:47 - 34:50
    बल्कि जितना जल्दी हो, अपने पास से निकाल
    देना चाहिए।
  • 34:50 - 35:00
    अनावश्यक बातों को भूल जाने की योग्यता ही
    थकान से मुक्ति पाने का मूल-मन्त्र है।
  • 35:00 - 35:03
    सोचने की आदत छोड़ दीजिये।
  • 35:03 - 35:10
    भविष्य को भी छोड़ दीजिये, आप बस इस चिंता
    से त्रस्त रहते है कि आगे क्या होगा।
  • 35:10 - 35:17
    और भूतकाल को भी छोड़ दीजिये। मुझे याद नहीं
    अगर मैंने आपको यह बताया था,
  • 35:17 - 35:24
    मुझे २-३ हफ्ते पहले एक प्रशंसा मिली थी,
    २-३ हफ्ते पहले मैं
  • 35:24 - 35:31
    कैंसर वेलनेस एसोसिएशन में वार्षिक भेंट के
    लिए गया था, उन्होंने कोटट्सलो (Cottesloe)
  • 35:31 - 35:36
    में एक पुराने घर से शुरू किया था, और अब
    ऑस्ट्रेलियन सरकार के सहयोग से
  • 35:36 - 35:42
    एक बड़े परिसर का निर्माण कर लिया गया है,
    हर तरह के कैंसर के उपचार के लिए,
  • 35:42 - 35:47
    वहाँ मेलेनोमा सोसाइटी, प्रोस्ट्रेट कैंसर
    सोसाइटी,
  • 35:47 - 35:51
    ब्रैस्ट कैंसर सोसाइटी, और जनरल वैलनेस
    एसोसिएशन सभी हैं,
  • 35:51 - 35:58
    सब एक ही जगह पर, यह उत्तम है।
    मैं वहाँ हर साल जाता हूँ।
  • 35:58 - 36:03
    और इस बार जब मैं वहां गया तो उन्होंने
    मुझे बताया की यह मेरा २६ वा साल था,
  • 36:03 - 36:08
    २६ साल बहुत होते हैं, और उन्होंने बोला
    कि हम आपको हर साल के पहले व्याख्यान
  • 36:08 - 36:11
    के लिए आमंत्रित करते हैं, उस साल की
  • 36:11 - 36:18
    अच्छी शुरुआत करने के लिए, उन्होंने कहा की
    २६ साल पहले वहाँ एक लड़की थी,
  • 36:18 - 36:25
    जिसे कैंसर था, हालाँकि उसकी बीमारी में
    सुधार हो रहा था, लेकिन वह हमेशा चिंतित
  • 36:25 - 36:33
    रहती थी कि क्या होगा अगर कैंसर
    फिर से हो गया, और कोई भी सलाहकार उसको
  • 36:33 - 36:37
    मदद नहीं कर पा रहा था। फिर मैंने उसको एक
    कहानी सुनाई,
  • 36:37 - 36:42
    एक महान दार्शनिक की कहानी। मैं पहले,
    स्नूपी, पिछली सदी के महान अमेरिकन पंडित
  • 36:42 - 36:46
    की कहानी सुना चुका हूँ। पर उनसे भी पहले
    एक और महान इंग्लैंड के दार्शनिक थे,
  • 36:46 - 36:54
    जिनकी मैं बहुत इज़्ज़त करता हूँ। अगर आपको
    दर्शन शास्त्र पसंद है तो पता करें महान
  • 36:54 - 37:00
    दार्शनिक विन्नी द पूह (Winnie the Pooh)
    के बारे में [हँसी]
  • 37:00 - 37:04
    जिन दार्शनिकों के बारे में यूनिवर्सिटी
    में पढ़ाया जाता है वे केवल शब्दों से
  • 37:04 - 37:08
    भरे हैं, वे कभी भी दिल तक नहीं पहुंचते।
    Winnie the Pooh की
  • 37:08 - 37:13
    एक कहानी 'Opening the Door of Your Heart,
    में होनी चाहिए थी,
  • 37:13 - 37:19
    मैंने डिज्नी (Disney) को अनुमति के लिए
    लिखा भी था, उनका कॉपीराइट है Winnie the
  • 37:19 - 37:23
    Pooh पर, लेकिन उन्होंने कहा "बिलकुल
    नहीं" , क्योंकि डिज्नी के लिए यह
  • 37:23 - 37:27
    व्यवसाय है, वे किसी को भी उनकी कहानी उपयोग
    करने की अनुमति नहीं देते।
  • 37:27 - 37:34
    यह Winnie the Pooh किताब की कहानी है जो
    मैंने २६ साल पहले सुनाई थी।
  • 37:34 - 37:38
    यह कहानी है Winnie the Pooh और उसके दोस्त
  • 37:38 - 37:44
    पिगलेट (Piglet) की, जो जंगल में से जा रहे
    थे, तूफान आ रहा था, पेड़ों से टहनियाँ टूट
  • 37:44 - 37:48
    कर गिर रहीं थी, और फिर पेड़ भी जड़ों से
    टूट कर गिरने लगे।
  • 37:48 - 37:55
    तूफ़ान ख़तरनाक होते हैं। आपको तूफ़ान में जंगल
    में नहीं जाना चाहिए, इसलिए पिगलेट
  • 37:55 - 38:01
    डरा हुआ था, और उसका डर इतना बढ़ गया कि वह
    विन्नी द पूह की तरफ मुड़ा और बोला
  • 38:01 - 38:06
    "मैं और नहीं चल सकता, मुझे बहुत डर लग
    रहा है। "
  • 38:06 - 38:08
    "क्यों?" विन्नी द पूह ने पूछा।
  • 38:08 - 38:15
    "मुझे डर लग रहा है, ऐसा ना हो कि हम एक पेड़
    के नीचे हों और वह हमारे ऊपर गिर जाये!"
  • 38:15 - 38:22
    जो कि एक सम्भावना थी...
    विन्नी द पूह चौंक गए,
  • 38:22 - 38:27
    इससे पता चलता है कि वे कितने बड़े दार्शनिक
    थे, अगर उनके इतने बाल न होते तो
  • 38:27 - 38:32
    वे बौद्ध साधु होते [हँसी]
  • 38:32 - 38:43
    और उन्होंने जवाब दिया, "क्या होगा अगर एक
    पेड़ गिरे जब हम उसके नीचे न हों?"
  • 38:43 - 38:47
    और वह डर का अंत था।
    क्योंकि सारा डर भविष्य को नकारात्मक
  • 38:47 - 38:52
    नजरिये से देखने से आता है, उन सब बातों
    को सोचना जो कि गलत हो सकती हैं,
  • 38:52 - 38:58
    त्रुटियाँ ढूंढ़ने वाला दिमाग, उसे डर कहते
    हैं। उसका विपरीत है - आशा , भविष्य को
  • 38:58 - 39:02
    एक सकारात्मक नजरिये से देखना, क्या-२
    अच्छा हो सकता है भविष्य में,
  • 39:02 - 39:08
    और आपने अपनी जिंदगी में देखा होगा कि, अगर
    आप किसी बात से बहुत डरते हैं तो वह हो
  • 39:08 - 39:17
    जाती है, इसी तरह अगर किसी बात की बहुत
    आशा रखते हैं तो वह भी हो जाती है।
  • 39:17 - 39:24
    तो जब मैंने २६ साल पहले उस लड़की को यह
    कहानी सुनाई तो उसे अपने प्रश्न का उत्तर
  • 39:24 - 39:27
    मिल गया। क्या होगा अगर कैंसर वापिस आ गया?
  • 39:27 - 39:31
    उत्तर था - क्या होगा अगर वह वापिस नहीं
    आया?
  • 39:31 - 39:36
    और वह वापिस नहीं आया। और यही कारण है कि
    वे मुझे बार-२ आमंत्रित करते रहे।
  • 39:36 - 39:41
    मैं वापिस जाता हूँ, कैंसर नहीं [हँसी]
  • 39:41 - 39:44
    अब आप समझ सकते हैं, ज़रा ध्यान से सोचिये
  • 39:44 - 39:48
    गहराई से सोचने पर लगेगा कि यह स्वाभाविक
    है, यदि आप कैंसर के बारे में चिंता करते
  • 39:48 - 39:51
    रहते हैं, "क्या होगा यदि यह वापिस आ गया?"
  • 39:51 - 39:55
    आप चिंतित होते हैं, आप तनावग्रस्त हो जाते
    हैं, यही तनाव कैंसर का मुख्य कारण है,
  • 39:55 - 40:01
    आप खुद ही कैंसर को आमंत्रित करते हैं,
    लेकिन यदि आप सोचें की यह वापिस नहीं आएगा,
  • 40:01 - 40:06
    आप इसकी चिंता न करें, आप निश्चिंत रहें,
    तनावमुक्त रहें, तो
  • 40:06 - 40:08
    संभावना है कि कैंसर वापिस नहीं आयेगा।
  • 40:08 - 40:17
    आप सफ़लता, अच्छी सेहत, खुशी की संभावना को
    बड़ा देते हैं,
  • 40:17 - 40:26
    और आपको ज्यादा थकान भी नहीं होती यह सोच-२
    कर कि आगे क्या होगा।
  • 40:26 - 40:33
    यह ध्यान सम्बंधित ज्ञान है, और यह बहुत
    उत्तम ज्ञान है।
  • 40:33 - 40:39
    "इंसान का दिमाग दो भागों में बंटा हुआ है",
    यही कारण है कि लोग थक जाते हैं।
  • 40:39 - 40:43
    मैं इसे सक्रिय या 'करने वाला' और 'जानने वाला'
    भाग कहता हूँ। आप मेरी ध्यान की कक्षा में
  • 40:43 - 40:50
    आयें हैं तो आप जानते होंगे। यह इंसानी
    दिमाग को देखने का शक्तिशाली नजरिया है।
  • 40:50 - 40:53
    'करने वाला' दिमाग प्रतिक्रिया करता है,
    यह अभी मेरे बोलने पर भी
  • 40:53 - 40:56
    प्रतिक्रिया कर रहा होगा, "यह ठीक बोला",
    "यह बेकार बात है" वगैरह।
  • 40:56 - 41:01
    यह प्रतिक्रिया भी काम करना है, योजनायें
    बनाना, याद रखना,
  • 41:01 - 41:05
    बातें समझना, कार्य-कलाप करना,
  • 41:05 - 41:10
    सोचना कि यहाँ से जाकर आप क्या करेंगे,
    सप्ताहांत पर आप
  • 41:10 - 41:15
    क्या करेंगे, यह सब सक्रिय दिमाग करता है।
  • 41:15 - 41:19
    दिमाग का दूसरा भाग है जो 'जानता है' .
  • 41:19 - 41:23
    निष्क्रिय चेतना, केवल जागृत रहना,
  • 41:23 - 41:29
    अपनी बाज़ु पर हो रही खुजली को महसूस करना,
    इस कमरे की ठंडक को महसूस करना,
  • 41:29 - 41:35
    दूर से आ रहीं ट्रैफिक की आवाज़ों को सुनना,
  • 41:35 - 41:40
    केवल जानना। अब क्योंकि आपको दिमाग के
  • 41:40 - 41:45
    दोनों भागों में फ़र्क पता चल गया, आपको
    आसानी से यह समझ आ जायेगा
  • 41:45 - 41:50
    कि आपकी 90% से ज्यादा ऊर्जा
  • 41:50 - 41:57
    काम करने, बातों पर प्रतिक्रिया करने में
    खर्च होती है, और आपके पास कुछ बचता ही
  • 41:57 - 42:02
    नहीं जागृत रहने, महसूस करने के लिए।
    इसलिए इतने सब लोग,
  • 42:02 - 42:08
    रात को तारे नहीं देख पाते हैं, भले ही वे
    जाग रहे हों,
  • 42:08 - 42:13
    वे बस बहुत काम कर रहे हैं। वे हवा को महसूस
    नहीं कर पाते हैं,
  • 42:13 - 42:18
    उन्हें बारिश का पता नहीं चलता, वे बस कुछ
    काम करने में व्यस्त होते हैं,
  • 42:18 - 42:24
    वे जिन्दा नहीं हैं, वे बस बुरी तरह से थके
    हुए हैं,
  • 42:24 - 42:33
    बहुत कुछ 'कर के',
    और बहुत कम 'हो कर'।
  • 42:33 - 42:43
    क्या होगा यदि आप यह सोचने की बजाय कि आप
    'हैं', आप केवल महसूस कीजिये,
  • 42:43 - 42:46
    बहती हवा को महसूस कीजिये। ठण्ड को, गर्मी
    को महसूस कीजिये। कार तक बिना जूतों
  • 42:46 - 42:55
    के जाईये और अपने पाँवों के नीचे पत्थर या
    घास को महसूस कीजिये।
  • 42:55 - 42:59
    आप अपने आप को जिंदा महसूस करेंगे,
    और सिर्फ जीवन नहीं,
  • 42:59 - 43:04
    ऐसा करने से आप ऊर्जा को 'जानने' में
    स्थानांतरित करते हैं 'करने' से हटा कर।
  • 43:04 - 43:07
    जब आप ऊर्जा को निष्क्रिय जागरूकता में
    डालते हैं-
  • 43:07 - 43:17
    जागृत, माइंडफुलनेस - थकावट जाने लगती है।
    आप जाग जाते हैं, क्योंकि
  • 43:17 - 43:22
    मानसिक थकावट कम ऊर्जा की पहचान है।
  • 43:22 - 43:26
    अपनी ऊर्जा को माइंडफुलनेस में
    लगाइये, आप जागृत महसूस करेंगे।
  • 43:26 - 43:31
    इसका एक अच्छा उदाहरण है - चाय या कॉफ़ी।
  • 43:31 - 43:34
    आप सुबह की चाय से पहले कितने बेबस होते हैं
  • 43:34 - 43:37
    चाय या कॉफ़ी पीजिये और फिर आप जागते हैं,
    जिन्दा होते हैं,
  • 43:37 - 43:42
    उसके बाद आप देख सकते हैं, सुन सकते हैं,
    सोच सकते हैं।
  • 43:42 - 43:49
    वह कृत्रिम ऊर्जा है, सोचिये कि यदि वह
    ऊर्जा प्राकृतिक होती?
  • 43:49 - 43:53
    तो आप जब सो कर उठते तो ऊर्जावान उठते।
    जब दिमाग ऊर्जावान होता है,
  • 43:53 - 43:59
    तो वह शरीर को ऊर्जा देता है,
    मैं आपको ध्यान सीखने के बाद १० मिनट
  • 43:59 - 44:03
    तक वही कर रहा था। इसीलिए मैं ज़्यादातर
    मार्गदर्शित ध्यान [गाइडेड मैडिटेशन]
  • 44:03 - 44:09
    कराता हूँ। पर मैं बहुत थका हुआ था,
  • 44:09 - 44:12
    यदि आप जानना चाहते है 'क्यों', तो
    मैं आपको बताता हूँ कि मैं पिछले
  • 44:12 - 44:18
    २ हफ्ते से क्या कर रहा था , और आज भी वही,
    तो मुझे क्षीण होना ही था,
  • 44:18 - 44:25
    तो मैंने आपको २० मिनट तक सिखाया, और फिर,
    मुझे कुछ और नहीं करना था,
  • 44:25 - 44:33
    मैंने अपने मन को स्थिर किया,
    और जागृत होने में ऊर्जा वापिस डाली,
  • 44:33 - 44:41
    और आप फिर से जिन्दा हो जाते हैं,
    यह अद्भुत अहसास है।
  • 44:41 - 44:48
    बहती हवा को महसूस करो.. क्या आप हवा की
    आवाज़ सुन रहे हैं? सुनिये..
  • 44:48 - 44:53
    ज्यादातर लोग नहीं सुन पाएंगे, पर आपने
    सुना।
  • 44:53 - 45:01
    ऊर्जा वापिस आने लगती है, और थकान गायब
    हो जाती है।
  • 45:01 - 45:09
    मैंने एक कांफ्रेंस में एक कहानी सुनी थी,
    एक बहुत अच्छा मनोचिकिस्तक था,
  • 45:09 - 45:15
    पर वह थोड़ा पागल था,
  • 45:15 - 45:20
    उसका इलाज का तरीका बहुत प्रसिद्व हो
    गया था,
  • 45:20 - 45:30
    आप उसके पास जाईये, खूब सारा पैसा दीजिये
    और वह आपको बताएगा की आप प्रकृतिक स्थान
  • 45:30 - 45:35
    पर जाईये। और यह इलाज काम करता था, लोगों
    की बीमारियाँ ठीक हो जाती थीं, और वह
  • 45:35 - 45:39
    बहुत पैसा बना लेता था, समझदार इंसान।
  • 45:39 - 45:44
    पर ऐसा क्यों है- प्रकृति में चलना, समुद्र
    के पास बैठना,
  • 45:44 - 45:49
    तैरना या सर्फिंग करना नहीं, सिर्फ बैठना।
    जंगल में जाना और कुछ करना नहीं,
  • 45:49 - 45:56
    वह इतनी शांति क्यों देता है?
    क्योंकि ऊर्जा वापिस आती है
  • 45:56 - 46:01
    माइंडफुलनेस में, जानने में,
    आप ज्यादा कुछ नहीं कर रहे हैं ,
  • 46:01 - 46:07
    इसका मतलब है की आपकी थकान जा रही है,
    वह ख़त्म हो रही है, और जब थकान
  • 46:07 - 46:13
    ख़तम होती है तो आपकी मानसिक, शारीरिक,
    भावनात्मक सेहत
  • 46:13 - 46:20
    बहुत-२ बढ़ जाती है।
    आप ठीक हो जाते हैं क्योंकि प्रकृति के पास
  • 46:20 - 46:24
    आप ज्यादा कुछ नहीं कर सकते।
    इस सप्ताहांत पर ध्यान देना,
  • 46:24 - 46:33
    आपके पास विकल्प है - खरीदारी करने जाइये,
    या जंगल में जाईये।
  • 46:33 - 46:41
    और देखिये की आपको बाद में कैसा महसूस होता
    है। एक ऐसा काम है की आप थक कर आते हैं,
  • 46:41 - 46:46
    आप जंगल में जाइये, या समुद्र के किनारे,
    किसी एकांत जगह पर अकेले,
  • 46:46 - 46:49
    King's पार्क में जाइये, या नदी किनारे
    चुपचाप सैर कीजिये,
  • 46:49 - 46:56
    कुछ ज्यादा मत कीजिये, आप देखेंगे की आपकी
    थकावट ख़तम हो गयी है। भगवान के लिए
  • 46:56 - 47:01
    अपने आपको एक छुट्टी दीजिये।
    कितने ज्यादा लोगों को कैंसर हो रहा है,
  • 47:01 - 47:08
    कितने लोग तलाक ले रहे हैं।
    कितने सारे बच्चे अपने माता-पिता से
  • 47:08 - 47:13
    जुड़ नहीं पाते, क्योंकि उनके माता-पिता
    उनसे जुड़ नहीं पाते,
  • 47:13 - 47:19
    क्योंकि वे बहुत थके हुए हैं।
    वे सुन नहीं पा रहे क्योंकि वे बहुत निढाल
  • 47:19 - 47:26
    हैं।समझने की कोशिश कीजिये कि थकान आज
    के समय का बहुत बड़ा अभिशाप है।
  • 47:26 - 47:33
    और कुछ तरीके हैं जिनसे कि इससे बचा जा सकता
    है, जिसमे से एक आपने आज यहाँ सुना।
  • 47:33 - 47:42
    और यह बात मैंने साबित भी कर के दिखा दी है
    50 मिनट तक भाषण दे कर,
  • 47:42 - 47:48
    यद्यपि ऐसा करना किसी भी विवेकी इंसान
    के लिए मुश्किल होता।
  • 47:48 - 48:03
    सुनने के लिए धन्यवाद।
    साधु !! साधु !! साधु!!
  • 48:03 - 48:08
    हाँ, यह ऊर्जा है।
  • 48:08 - 48:13
    बहुत अच्छे। कुछ प्रश्न हैं आयरलैंड,
    फ्रांस, और लंदन से !
  • 48:13 - 48:18
    और यूरोप भी।
    हम थकान से कैसे बच सकते हैं , जब
  • 48:18 - 48:22
    लोग हमें कहते रहते हैं कि हम गलत हैं, या
    हमारी मान्यताएँ गलत हैं ?
  • 48:22 - 48:30
    बस उन्हें कहते रहो - "हाँ, आप सही हो,
    मैं गलत हूँ"। जब मैं मलेशिया गया था,
  • 48:30 - 48:40
    वहाँ भी यह समस्या देखी। मलेशिया में
    बहुत सारे क्रिस्चियन हैं,
  • 48:40 - 48:44
    ये इवैंजेलिकल हैं, जो सबका धर्म-परिवर्तन
    करना चाहते हैं। .
  • 48:44 - 48:49
    यह मलेशिया की समस्या थी, और
    सिंगापुर की भी,
  • 48:49 - 48:55
    वहाँ एक बुज़ुर्ग बौद्ध हैं, अपनी सारी उम्र
    वे बौद्ध रहे हैं, पर उनका बेटा या पोता
  • 48:55 - 48:59
    इवैंजेलिकल बन गया है। बाकि सब लोग बौद्ध
    थे, या हिन्दू थे , या कुछ और।
  • 48:59 - 49:05
    और अब बेटे को लगता है कि ,"मेरे पिता नर्क
    में जायेंगे अगर वे इवैंजेलिकल नहीं बने"
  • 49:05 - 49:11
    तो वह अपने बीमार और मरते हुए पिता
    के सिरहाने गया पादरी को ले कर,
  • 49:11 - 49:19
    और उन्हें प्रताड़ना देता रहा, और उनका
    धर्म-परिवर्तन किया, बहुत पीड़ादायक अनुभव था
  • 49:19 - 49:24
    और अब सिंगापुर सरकार ने इसके ख़िलाफ़ कानून
    बना दिया है।
  • 49:24 - 49:30
    किसी ने मुझसे पूछा-आपकी क्या सलाह है?
    अगर वह मेरा बेटा या पोता होता,
  • 49:30 - 49:35
    मैं मर रहा हूँ, और वह पादरी और अपने
    दोस्तों को लेकर आ जाये और
  • 49:35 - 49:40
    बाइबिल, हालिलुय की बात करें, और मुझ पर
    दबाव डालें धर्म-परिवर्तन के लिये,
  • 49:40 - 49:44
    और कहें जीसस तुम्हें लेने आ रहे हैं,
    मैं क्या करूँगा?
  • 49:44 - 49:51
    उन्हें यह समझाने की कोशिश मत करो कि
    वे गलत हैं। धर्म-परिवर्तन कर लो।
  • 49:51 - 49:54
    उन्हें बोलो, "आप ठीक कह रहे हो, मैं जीसस
    को अपना
  • 49:54 - 49:58
    उद्धारक स्वीकार करता हूँ।"
    और वे हालिलुय - हालिलुय करते रहें ,
  • 49:58 - 50:01
    फिर वे आपकी जान छोड़ देंगे।
    और फिर जैसे ही वे बाहर जाएँ,
  • 50:01 - 50:06
    आप वापिस अपने धर्म में आ जाओ।
    [हँसी] बौद्ध बन जाओ।
  • 50:06 - 50:10
    यह मेरी व्यावहारिक सलाह है।
    तो अगर कोई कहता है, "आप गलत हैं-2,
  • 50:10 - 50:13
    "हाँ, आप सही हैं, मैं आपसे सहमत हूँ ,
  • 50:13 - 50:18
    मैं गलत हूँ" , फिर वे आपका पीछा छोड़
    देंगे। और जैसे ही वे आपको अकेला छोड़ें,
  • 50:18 - 50:23
    "नहीं, क्या बकवास है, मैं ही सही हूँ"
    [हँसी]
  • 50:23 - 50:32
    नहीं तो यह नामुमकिन है। मैं पति-पत्नी
    के बारे में भी यही कहता हूँ,
  • 50:32 - 50:36
    आपको अब तक पता होना चाहिए।
    [टेलीफोन की घंटी] संगीत बजा
  • 50:36 - 50:44
    जवाब देने के लिए , ठीक है,
    ऐसा होता है, ऐसे भी यह आपकी गलती नहीं है,
  • 50:44 - 50:47
    यह मोबाइल फ़ोन की गलती है,
    तो आप खुद से नाराज़ मत होईये,
  • 50:47 - 50:53
    अपने फ़ोन को मारिये,
    अपने फ़ोन को नज़रबन्द कर दीजिये।
  • 50:53 - 51:00
    मैं क्या कह रहा था? हाँ तो मैं
    गलत होने के बारे में बात कर रहा था।
  • 51:00 - 51:05
    आप अपने जीवन-साथी को कुछ भी बोल कर
    समझा नहीं सकते
  • 51:05 - 51:09
    कि वह गलत है, बिलकुल नहीं।
  • 51:09 - 51:13
    आप कितने समय से उस आदमी के साथ
    रह रहे हैं?
  • 51:13 - 51:23
    आप नहीं कर सकते। यदि आप जर्मनी के
    प्रधानमंत्री होते तब भी नहीं,
  • 51:23 - 51:27
    क्या नाम है उनका? हाँ एंगेला मैर्केल !
  • 51:27 - 51:31
    बहुत प्रतिभावान स्त्री, बहुत शक्तिशाली,
    पता नहीं वह शादीशुदा है या नहीं,
  • 51:31 - 51:34
    पर मैं पूरे यकीन से कह सकता हूँ कि वह भी
    अपने पति से बहस में हार जाती होगी, ऐसा
  • 51:34 - 51:41
    नहीं हो सकता कि वह अपने पति से मनवा ले कि
    वह गलत है। और ओबामा भी मिशेल से नहीं मनवा
  • 51:41 - 51:46
    सकता, पत्नी गलत हो सकती है? असंभव।
    चाहे आप कितने प्रभावशाली और समझदार हों।
  • 51:46 - 51:52
    ऐसा नहीं हो सकता। इसलिए कोशिश भी मत
    कीजिये। बहुत सारे पति कहते हैं
  • 51:52 - 52:00
    "हाँ प्रिये, मैं तुमसे सहमत हूँ" और फिर वे
    बाहर जाकर जो मन में आता है करते हैं [हँसी]
  • 52:00 - 52:06
    यह सच है, पत्नियों को इसकी आदत डाल
    लेनी चाहिए।
  • 52:06 - 52:10
    एक कहानी सुनिये जो मैं हमेशा
    शादियों में सुनाता हूँ ,
  • 52:10 - 52:15
    कल दोपहर भी एक शादी है।कोई तरीका
    नहीं है लोगों को विश्वास दिलाने का कि
  • 52:15 - 52:23
    वे गलत हैं, तो बिना किसी के आगे झुके आप
    अपने निर्णय लें, और अपनी जिंदगी अपने ढंग
  • 52:23 - 52:29
    से जी पायें, ऐसा करना मुश्किल है।
    और फिर झुँझलाहट होती है।
  • 52:29 - 52:33
    वह (पति) हमेशा सही होता है? मुझे ही हमेशा
    उसकी बात क्यों माननी पड़ती है ?
  • 52:33 - 52:40
    हमेशा वही (पत्नी) सही क्यों होती है?
    तो कैलेंडर विधि अपनाइये, वही समाधान है,
  • 52:40 - 52:45
    इससे लोग अपने साथी के साथ सदभावनापूर्ण
    रह सकते है। कैलेंडर विधि के अनुसार
  • 52:45 - 52:51
    जब कभी अपने साथी से झगड़ा हो जाये, तो यह
    मत बहस कीजिये कि कौन गलत है कौन सही,
  • 52:51 - 52:58
    कैलेंडर देख कर सुनिश्चित कीजिये, महीने
    के विषम दिनों में पत्नी सही है [हँसी]
  • 52:58 - 53:04
    लड़कियाँ हमेशा विषम दिनों में सही होती हैं।
    सम दिनों में पति सही है।
  • 53:04 - 53:12
    यह उचित है। आज १९ तारीख़ है, तो आज
    सभी लड़कियाँ सही हैं,
  • 53:12 - 53:19
    पर ध्यान रहे, कल पति के सही होने का दिन है
    [हँसी], अब आपको बहस करने की जरुरत नहीं है।
  • 53:19 - 53:26
    कैलेंडर सुनिश्चित करेगा कि कौन सही है,
    और वही निर्णय मान्य होगा।
  • 53:26 - 53:33
    अच्छा है कि दूसरा व्यक्ति निर्णय ले रहा है
    यह न्यायोचित है।
  • 53:33 - 53:37
    और लोगों ने पहले से ही पता लगा लिया है,
    लड़कियों ने पहले ही से पता लगा लिया है,
  • 53:37 - 53:42
    लड़कियों को ज़्यादा दिन मिलते हैं साल में
    सही होने के, चार या पांच,
  • 53:42 - 53:47
    मैं लड़कों से कहूंगा कि वे इस बात पर मान
    जाएँ। मुश्किल तब होती है, जब लोग पूछते हैं
  • 53:47 - 53:56
    क्या होगा अगर आप समलैंगिक रिश्ते में हैं ?
    [हँसी] तब अापने मुझे स्टंप आउट कर दिया,
  • 53:56 - 54:07
    तब यह काम नहीं करेगा। आप दोनों ही एक ही
    दिन सही हैं, और दूसरे दिन गलत। [हँसी]
  • 54:07 - 54:11
    हाँ, और यदि लोग कहते हैं कि आप गलत हैं,
    तो मैं ध्यान नहीं देता, उन्हें बोलने दो,
  • 54:11 - 54:14
    बस अपना काम करो, उनके बारे में मत सोचो,
    और बाद में आपको ज्ञात
  • 54:14 - 54:18
    होगा कि वे जो चाहे आपको बोल सकते हैं, पर
    वह रद्दी है, ध्यान न दें।
  • 54:18 - 54:21
    [प्रश्न] क्या आपको लगता है की थकान और
    ऑक्सीज़न में संबंध है?
  • 54:21 - 54:23
    साँस लेना, प्रदूषण, या साँस लेने
    का तरीका ?
  • 54:23 - 54:26
    कुछ संबंध है, क्योंकि ऑक्सीजन से आपको
  • 54:26 - 54:31
    ऊर्जा मिलती है, और यदि ऑक्सीजन कम हो,
    या प्रदूषण हो ,
  • 54:31 - 54:37
    तो उसका असर इस पर पड़ेगा कि कितनी ऑक्सीजन
    आपके शरीर को मिल रही है,
  • 54:37 - 54:43
    लेकिन यदि ऑक्सीजन कम हो जाये तो फेफड़े
    ज्यादा काम करते हैं, ज्यादा साँस ले कर।
  • 54:43 - 54:46
    जब मैं भूटान गया था तो मेरे साथ ऐसा
    हुआ था।
  • 54:46 - 54:52
    वहाँ बहुत शुद्ध हवा थी, पर ऑक्सीजन की
    मात्रा टाइगर नेस्ट पर बहुत कम होती है,
  • 54:52 - 54:56
    क्योंकि वह बहुत ऊंचाई पर है।
    उस पहाड़ी के नीचे
  • 54:56 - 55:01
    किसी ने एक एनर्जी बार (चॉक्लेट) ख़रीदा था,
  • 55:01 - 55:06
    मार्स चॉक्लेट जैसा, लेकिन जब वे ऊपर गए
    तो वह फूल गया।
  • 55:06 - 55:10
    उन्होंने मुझे दिखाया, वह गुब्बारे जैसा
    हो गया था, क्योकि ऊंचाई पर हवा का दबाव
  • 55:10 - 55:15
    बहुत कम होता है. नीचे ज़मीन पर
    हवा का दबाव सामान्य था,
  • 55:15 - 55:19
    पर जैसे ही हम ऊँचे गए,
    वह गुब्बारे जैसा हो गया।
  • 55:19 - 55:24
    तो वह उतना ऊँचा था, वहाँ ऑक्सीज़न बहुत
    कम थी , पर होता क्या है कि वहाँ
  • 55:24 - 55:31
    हमारे फेफड़े ज्यादा काम करने लगते हैं।
    तो थकान और ऑक्सीजन के बीच
  • 55:31 - 55:33
    सम्बन्ध है , लेकिन हमारा शरीर जानता है
  • 55:33 - 55:36
    कि उसकी पूर्ति कैसे की जाये।
    पर शरीर को नहीं पता कि पूर्ति
  • 55:36 - 55:39
    की जाये जब आप बहुत ज्यादा सोचने
    लगते हैं।
  • 55:39 - 55:44
    प्रिये अजान (लंदन से), यदि किसी ने जिंदगी
    में अपना सब कुछ खो दिया हो, और उसे
  • 55:44 - 55:48
    भविष्य की बहुत चिंता सताती हो, उसे क्या
    करना चाहिए?
  • 55:48 - 55:52
    मुझे याद करो, मैंने अपना सब कुछ खो
    दिया है
  • 55:52 - 55:57
    मैंने अपनी डिग्री खो दी, अब उसकी कोई
    जरूरत भी नहीं है।
  • 55:57 - 56:02
    मैंने अपना सारा पैसा खो दिया, मेरे पास एक
    पैसा भी नहीं है। जवानी में कुछ पैसा था।
  • 56:02 - 56:12
    मैंने और क्या खोया? प्रेमिकायें, पैसा,
    जायदाद , सब कुछ।
  • 56:12 - 56:18
    मैंने मेरा बीता हुआ समय (भूतकाल) खो दिया,
    सारी यादें और मेरे सारे डर भी।
  • 56:18 - 56:22
    मैंने मेरा सिक्योरिटी खो दिया। मेरा कोई
    गुजारा भत्ता भी नहीं है।
  • 56:22 - 56:26
    और मेरी कोई पेंशन भी नहीं है।
  • 56:26 - 56:31
    मेरे पास कुछ भी नहीं है।
    क्या होगा अगर आप मुझे कल से
  • 56:31 - 56:40
    खाना देना ही बंद कर दें ?
    आह! सब कुछ खो देना समस्या नहीं है
  • 56:40 - 56:47
    कभी -२ वह आपको बहुत आज़ादी
    देता है , आप साधारण तरीके से जी सकते हैं
  • 56:47 - 56:53
    सादा जीवन जीना सीखिए।
    परेशानी में रहना यह सोचते हुए कि
  • 56:53 - 56:56
    आपने अपनी जायदाद खो दी,
    तो आप अपने मन की शांति भी उस बात
  • 56:56 - 57:03
    पर खो रहे हैं। कुछ दिन पहले बोधियाना मठ
    में चोरी हो गयी,
  • 57:03 - 57:07
    चोर कुछ जंजीरे ले गए।
    मैंने सीधे बोला की वे हमारी
  • 57:07 - 57:10
    जंजीरें चुरा सकते हैं ,
    पर वे हमारी मन की शांति
  • 57:10 - 57:16
    और दूसरों के लिए करुणा नहीं चुरा
    सकते। और वास्तव में वह अच्छा ही हुआ
  • 57:16 - 57:20
    क्योंकि वे जंजीरे बहुत पुरानी थी , और
  • 57:20 - 57:24
    अब इन्शुरन्स के पैसे से हम नयी
    खरीद सकते हैं। [हँसी]
  • 57:24 - 57:29
    तो अगर वह चोर कभी पास में हो,
    तो यहाँ आये, हम उसे धन्यवाद देंगे।
  • 57:29 - 57:32
    मुझे ऐसा नहीं कहना चाहिए पर अंत
    में सब अच्छा ही हुआ।
  • 57:32 - 57:34
    वे आपके घर आकर आपका सामान चुरा
    सकते हैं , पर आप
  • 57:34 - 57:38
    उन्हें अपनी खुशी क्यों चुराने देते हैं ?
  • 57:38 - 57:41
    आप को ऐसा नहीं करना चाहिए।
    हो सकता है की आप अपनी सारी संपदा
  • 57:41 - 57:46
    खो दें, अपनी पत्नी खो दें,
    बच्चे खो दें, या और कुछ,
  • 57:46 - 57:57
    पर आपको अपनी ख़ुशी खोने देने नहीं चाहिए।
    ऐसा करना अपनी उम्मीद खो देना होगा।
  • 57:57 - 58:02
    तो आप अपनी उम्मीद को जीवित रखिये।
    दूसरे लोगों को देखिये,
  • 58:02 - 58:07
    दूसरे लोग जो आपके समान
    परिस्थितियों में हैं ,
  • 58:07 - 58:12
    क्या कहते हैं उन्हें -
    मनोचिकित्सक दल या मित्र-समूह,
  • 58:12 - 58:15
    कभी-२ जब हम दूसरे लोगों के जीवन के बारे
    में सुनते हैं, जिनका
  • 58:15 - 58:24
    जीवन हमारे जैसा बीता है, उनसे हमें उम्मीद
    मिलती है, डर या चिंता नहीं।
  • 58:24 - 58:28
    यह एक बहुत अहम चीज़ है जो आपको जीवन में
    लानी चाहिए - उम्मीद
  • 58:28 - 58:35
    तो यदि आपको जीवन में कोई साथी अभी तक
    नहीं मिला है - निराश मत होईये,
  • 58:35 - 58:42
    यदि आप डरते रहेंगे, कि आपको साथी नहीं
    मिलेगा, तो सही में नहीं मिलेगा। उम्मीद
  • 58:42 - 58:49
    रखिये , "हाँ, ये हो सकता है", तो आप सफलता
    का दरवाज़ा खोल रहे हैं। तो हमेशा भविष्य को
  • 58:49 - 58:56
    आशावादी होकर देखिये, तो आपके बुरे अनुभव
    आपकी उम्मीद नहीं तोड़ पायेंगे,
  • 58:56 - 59:03
    और जहाँ उम्मीद है, वहीँ सफलता है।
  • 59:03 - 59:08
    उन लोगों को धन्यवाद्। ९ बज गए हैं।
    और कोई प्रश्न हैं ?
  • 59:08 - 59:12
    बहुत अच्छे। अलविदा [हँसी]
  • 59:12 - 59:14
    अब हम बुद्ध, धर्म और संघ को प्रणाम करेंगे।
  • 59:14 - 59:19
    क्षमा कीजिये यदि मैं आपसे बात ना कर पाऊं,
    क्योंकि मुझे अभी भागना है
  • 59:19 - 59:24
    जंहा ग्रोव मठ में रिट्रीट में पढ़ाने
    के लिए
Title:
थकान का निवारण
Description:

हमारे 24/7 ऑन लाइन समाज की नई महामारी है कि लोग हमेशा थके हुए व क्षिथिलरहते हैं। यह एक कष्टमय अहसास है, और हमारी खुशियों और शांति को ग्रहण लगाता है। थकान का निवारण कैसे किया जाये, गुरु ब्रहम इस विषय पर एक नया दृष्टिकोण व सुझाव प्रस्तुत कर रहे हैं।

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Video Language:
English
Team:
Buddhist Society of Western Australia
Project:
Friday Night Dhamma Talks
Duration:
01:00:26

Hindi subtitles

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