थकान का निवारण
-
0:00 - 0:04यदि आप ज़ोर से खाँसना चाहते हैं,
तो खाँस सकते हैं। -
0:04 - 0:06किसी को आपके खाँसने से परेशानी
-
0:06 - 0:11नहीं होगी। आप पैर हिला सकते हैं।
हिल-डुल सकते हैं। -
0:11 - 0:18आज की शाम के उत्सव के अगले भाग
के लिए तैयार हो जाईये। -
0:21 - 0:27धम्म चर्चा
-
0:50 - 0:57बहुत अच्छे। आज शाम की धम्म चर्चा के लिए
-
0:57 - 1:00बहुत सारे ख़्याल थे,
-
1:00 - 1:03पर मैं उस विषय पर बात करूँगा
-
1:03 - 1:07जो बहुत लोगों की समस्या है।
-
1:07 - 1:18मैंने इसे महसूस किया है और ध्यान की सहायता
से इस पर काबू पाया है: थकान -
1:18 - 1:23शायद 3, 4 या 5 साल पहले की बात है।
मुझे समय याद नहीं। -
1:23 - 1:27वर्त्तमान में रहने से यही होता है।मुझ जैसे
साधु को मनोभ्रंश (डेमेंशिआ) नहीं होता। -
1:27 - 1:33हमें केवल वर्तमान-में-जीना-भ्रंश होता है।
-
1:33 - 1:38[हँसी] हम भूत या भविष्य के बारे में
ज़्यादा नहीं सोचते। -
1:38 - 1:41जब लोग पूछते हैं - यह कब हुआ था?
"कभी तो हुआ था " -
1:41 - 1:44ऐसा नहीं है कि हमें याद नहीं रहता,
या याद रखना नहीं चाहते। -
1:44 - 1:50ऐसा बुद्धि की क्षमता बढ़ने से, और वर्तमान
में रहने से होता है -
1:50 - 1:53बजाए कि बीते हुए समय में रहने से।
-
1:53 - 1:59कुछ साल पहले जब मैं विदेश में पढ़ा रहा था ,
-
1:59 - 2:06मुझे कुआला लम्पुर में युवक सेमिनार
में बुलाया गया था, -
2:06 - 2:12बहुत अच्छा अवसर था, लगभग 400-500,
15 से 25 साल के युवक-युवतियाँ -
2:12 - 2:17काफी दिलचस्प बातें कर रहे थे ,
-
2:17 - 2:24उन्होंने लोगों से पुछा, 'आपका सबसे
मुश्किल मनोभाव क्या है ?' -
2:24 - 2:3215-25 साल के, चीनी बौद्ध लोग,
कुआला लुम्पुर, मलेशिया में -
2:32 - 2:36आपके जीवन की सबसे बड़ी कठिनाई क्या है?
-
2:36 - 2:43और लोगों का जवाब था- थकावट।
मुझे इस जवाब की उम्मीद नहीं थी। -
2:43 - 2:48लेकिन यह ज़ाहिर है कि लोग थकान महसूस
करते हैं -
2:48 - 2:55जबकि वे अभी अपनी किशोरावस्था में हैं।
आप अपनी जवानी के दिन याद कीजिये -
2:55 - 3:00एक किशोर युवक या युवती पर बहुत दबाव
रहते हैं। -
3:00 - 3:05आपको स्कूल में अच्छा करना है।
आपके माता-पिता, अध्यापक, -
3:05 - 3:09मित्र, सब कहते हैं की पढ़ना और
-
3:09 - 3:11अच्छे नंबर लाना बहुत ज़रूरी है।
-
3:11 - 3:17अभिभावकों को मेरी यह बात अच्छी नहीं लगती।
-
3:17 - 3:19पर मैं बच्चों की तरफ़दारी करता हूँ।
इससे ज़्यादा फ़र्क -
3:19 - 3:22नहीं पड़ता कि आपको स्कूल में कितने
नंबर मिले। -
3:22 - 3:26डेनियल गोलमैन ने अपनी पुस्तक
'भावनात्मक बुद्धि'(emotional intelligence) -
3:26 - 3:31में कहा है कि, आपके स्कूल या विश्वविद्यालय
के नंबर या सर्टिफिकेट -
3:31 - 3:36का आपके जीवन को सफल बनाने में ज्यादा
योगदान नहीं है -
3:36 - 3:39स्कूल के रिजल्ट से जीवन में सफ़लता नहीं
मिलती। किसी और काम से मिलती है। -
3:39 - 3:45कल ही मैं सिंगापुर में लोगों से बात कर
रहा था -
3:45 - 3:49थाईलैंड से लौटते समय
-
3:49 - 3:58कि यदि बच्चों को 'F' ग्रेड मिलता है,
क्या आप जानते हैं कि वह क्या है? -
3:58 - 4:04मैं एक अध्यापक था।
'F' मतलब विलक्षण [Fantastic] । -
4:04 - 4:08अगर उन्हें 'E' ग्रेड मिलता है,
मतलब शानदार [Excellent] -
4:08 - 4:11परन्तु यदि उन्हें 'A' मिलता है,
उसका मतलब है अहंकारी [Arrogant] . -
4:11 - 4:15ये सब लोग जो गर्व से कहते हैं कि
उन्हें 'A' ग्रेड मिले, वे अभिमानी हैं। -
4:15 - 4:20अपने आप से भरे हुए।
-
4:20 - 4:27इसलिए मुझे 'F' पसंद हैं।
विलक्षण व शानदार। -
4:27 - 4:35क्योंकि उन पर अच्छे ग्रेड लाने का या
-
4:35 - 4:41यूनिवर्सिटी में एडमिशन का दबाव नहीं होता।
-
4:41 - 4:45मुझे देखिये, मुझे सबसे अच्छी यूनिवर्सिटी
में एडमिशन मिला, और फिर क्या हुआ। -
4:45 - 4:50मुझे कैम्ब्रिज में जाने से कुछ लाभ
नहीं हुआ। -
4:50 - 4:54इससे अच्छा होता की मैं किसी दूसरे कॉलेज
में चला जाता, या कॉलेज जाता ही नहीं। -
4:54 - 4:59अगर मैं कैम्ब्रिज नहीं जाता तो मैं
काफी पहले ही साधु बन जाता। -
4:59 - 5:02वह और भी अच्छा होता। पर ठीक है,
जीवन ऐसा ही होता है -
5:02 - 5:04आप हमेशा कुछ सीखते हैं।
-
5:04 - 5:13मुझे हमेशा इस बारे में एक बात याद आती है।
-
5:13 - 5:17वह बात जिसकी वजह से मैं शिक्षक बनने की
बजाय साधु बन गया। -
5:17 - 5:22उस समय मुझे उस बात का महत्व इतना नहीं
लगा था। लेकिन जब आप पीछे मुड़ कर -
5:22 - 5:29देखते हैं तो समझते हैं कि वे महत्वपूर्ण
घटनायें ही आपका मार्गदर्शन करती हैं। -
5:29 - 5:35मैं यूनिवर्सिटी में दुसरे कुछ बौद्ध
लोगों के साथ था। -
5:35 - 5:41पर मेरा एक परम मित्र ईसाई था।
कट्टर ईसाई। -
5:41 - 5:47वह बाद में हिप्पी बन गया।
ख़ैर उस समय वह ईसाई था। -
5:47 - 5:53एक दिन उसने मुझे बताया कि वह बाइबिल क्लास
के कुछ दोस्तों के साथ -
5:53 - 6:00सप्ताह में एक दिन वहाँ के एक स्थानीय
अस्पताल में -
6:00 - 6:05मानसिक विकलांग लोगों की सेवा करेंगे।
-
6:05 - 6:10जब उसने मुझे बताया तो मैं नहीं जाना
चाहता था। लेकिन मुझे ऐसा लगा कि यदि -
6:10 - 6:15मैं नहीं गया तो बौद्ध समाज का नाम ख़राब
होगा। मेरे जाने की वजह थी मेरा 'अहंकार'. -
6:15 - 6:22" यदि ईसाई वो काम कर सकते थे तो बौद्ध भी
कर सकते थे। " -
6:22 - 6:26बस यही बात थी।
-
6:26 - 6:31मैं ईमानदारी से बता रहा हूँ। मैं वहाँ गया
क्योंकि वो वहाँ जा रहा था। -
6:31 - 6:34पर एक अजीब बात हुई।
जैसा हमेशा जिंदगी में होता है, -
6:34 - 6:39आप जाते हैं और कुछ काम करते हैं किसी
वजह से। और फिर दूसरे कारण जुड़ जाते हैं, -
6:39 - 6:44और आपकी जिंदगी बदल देते हैं।
वे ईसाई मित्र -
6:44 - 6:49दो - तीन हफ्तों के लिए गए और छोड़ दिया।
मैं वहाँ दो साल तक गया। -
6:49 - 6:55हर दोपहर जब मैं कैंब्रिज में होता था तो
-
6:55 - 7:02क्लास और बाकी काम व्यवस्थित कर लेता था
ताकि मैं अस्पताल जा सकूँ। पता नहीं क्यों -
7:02 - 7:11पर मुझे वहाँ अच्छा लगता था। मैं व्यावसायिक
चिकित्सा विभाग में मनोरोगियों को मदद -
7:11 - 7:16करता था।उन बच्चों की भावनात्मक बुद्धि
देखकर आश्चर्य होता था। -
7:16 - 7:20बच्चे नहीं, बल्कि वे नवयुवक -
नवयुवतियाँ थे। -
7:20 - 7:26हालांकि मैं तब नहीं जानता था कि भावनात्मक
बुद्धि (emotional intelligence) क्या है। -
7:26 - 7:30यह 1969-70 -71 की बात है. वे सब इतने
संवेदनशील और भावुक थे, और मैं उनकी दुनिया -
7:30 - 7:37के बारे में कुछ नहीं जानता था।
मुझे आज भी याद है। -
7:37 - 7:44मैं जवान था।मेरा अपनी प्रेमिका से झगड़ा हो
गया, मैं दुःखी था। मैं जैसे ही वहाँ -
7:44 - 7:49पहुँचा, वे सब दौड़ते हुए मेरे पास आये और
मेरे गले लग गये। मैंने पूछा, 'ऐसा क्यों -
7:49 - 7:54किया?" "आज कुछ गड़बड़ है, है ना?"
"तुम्हें कैसे पता चला?" -
7:54 - 7:58वे बहुत भावुक थे। मुझे अच्छे से जानने लगे
थे। और बहुत प्यार करते थे। -
7:58 - 8:06और वे गज़ब के जज़्बाती थे।और दूसरी तरफ़ मैं
नोबेल प्रतिष्ठित विशेषज्ञों के साथ भी बैठा -
8:06 - 8:14हुआ हूँ, वहाँ उन लोगों से मिलना होता था।
वे लोग सामाजिक तौर पर बहुत संवेदनहीन थे। -
8:14 - 8:19उनके मन में भावुकता का एक कण भी नहीं था।
ख़ैर मैं थोड़ा बड़ा-चढ़ा कर बोल रहा हूँ। -
8:19 - 8:22पर जब बात जिंदगी की समझ की आती है,
-
8:22 - 8:29मैं उन मनोरोगियों के साथ समय बिताना ज़्यादा
पसंद करता था। मैंने उनसे बहुत कुछ सीखा। -
8:29 - 8:36उन्होंने ही मुझे दूसरों के प्रति समानु-
भूति करना सिखाया। प्रोफ़ेसर, लेक्चरर या -
8:36 - 8:44दोस्त जो बातें करते थे, वे थीं -
'गोमायन' -
8:44 - 8:48मुझे यह शब्द बोलने में वक्त लगा, यह
पाली भाषा में 'मूर्खता' को कहते हैं। -
8:48 - 8:55सब कुछ उनके दिमाग में है। दिल में कुछ भी
नहीं। लड़के और लड़कियों को यह नहीं पता कि -
8:55 - 9:02कैसे एक-दूसरे के साथ जीवन बिताया जाये,
सिर्फ कल्पनायें, ख़्वाब, ख्याल और फ़लसफ़े। -
9:02 - 9:12दूसरी तरफ आप इन मनोरोगियों के पास जायें,
वे आपकी भावनायें महसूस कर सकते हैं। -
9:12 - 9:19भले ही वे स्कूल नहीं गए, गणित नहीं पढ़ा,
लेकिन जब आपकी भावनाओं को समझने की, -
9:19 - 9:26उन्हें महसूस करने की, आपके साथ हमदर्दी की
बात आती है, तो ये लोग उसमें निपुण थे। -
9:26 - 9:34मैं अपने अध्यापकों की बजाय इन लोगों के साथ
समय बिताना ज़्यादा पसंद करने लगा था. ऐसा -
9:34 - 9:40क्यों, नहीं जानता था।पर इससे मेरी जिंदगी
के दूसरे पहलू को बढ़ावा मिला- संवेदनशीलता। -
9:40 - 9:46क्योंकि हम अपने अंदर की भावनाओं की दुनिया
से बेख़बर हैं, इसलिए हम बहुत ज्यादा सोचते, -
9:46 - 9:51बहुत ज़्यादा काम करते हैं। इसलिए हम थके
रहते हैं। इन बच्चों के जीवन की यह सबसे -
9:51 - 9:57बड़ी समस्या थी। और यह बात मुझे समझा कर
उन्होंने हम सबके जीवन में सुधार लाने का -
9:57 - 10:05रास्ता खोल दिया। न केवल शारीरिक, मानसिक,
-
10:05 - 10:08व भावनात्मक, बल्कि रिश्तों में सुधार भी।
-
10:08 - 10:14आप में से कितने लोग हैं जो शाम को काम से
घर आते हैं तो चिड़चिड़े होते हैं। -
10:14 - 10:21गुस्से में होते हैं। इतने लोग मुझे पूछते
हैं: "मेरे पति हमेशा गुस्से में रहते हैं, -
10:21 - 10:26हमेशा बच्चों को डांटते रहते हैं, इनके साथ
रहना बहुत मुश्किल है। क्या करें? -
10:26 - 10:31क्या आप इन्हें गुस्से पर काबू पाने का कोई
सुझाव दे सकते हैं ?" -
10:31 - 10:35मेरा जवाब ये होता है कि, आप उन्हें रात
को ठीक से सोना सिखाइये। -
10:35 - 10:41उन्हें अच्छे से आराम करना सिखाईये। देखिये
कि उनकी थकान मिट जाये, -
10:41 - 10:46थकावट जो आज मनुष्य जाति का एक हिस्सा बन
गयी है। -
10:46 - 10:53मैं ऐसा कह रहा हूँ क्योंकि मैं जीवन को ऐसे
ही समझता हूँ। कोई रिसर्च नहीं है जो मेरी -
10:53 - 10:57बात को साबित करे, लेकिन मैं निश्चित हो
कर कह सकता हूँ की अगर लोग रिसर्च करें तो -
10:57 - 11:05वे यही पाएंगे जो मैं कह रहा हूँ। यह थकावट
ही है जिसकी वजह से तलाक़ होते हैं, -
11:05 - 11:10कितने ही रिश्ते टूट जाते हैं, थकावट की
वजह से। -
11:10 - 11:15कैंसर, दिल की बीमारियाँ, थकावट की वजह
से ही होती हैं -
11:15 - 11:19और भी कई बिमारियाँ जो आजकल बहुत लोगों
को हो रही है, जैसे कि -
11:19 - 11:28अवसाद (डिप्रेशन) - बहुत गहरी थकान।
यह आजकल इतनी ज़ाहिर सी बात हो गयी है, -
11:28 - 11:34एक बहुत बड़ी समस्या।
आपको भी कभी न कभी थकावट महसूस होती होगी, -
11:34 - 11:38ऐसा लगने लगता है दुनिया में रहना बहुत
भारी और मुश्किल है। -
11:38 - 11:46आपको बहुत मेहनत करनी पड़ती है जीने के लिए।
इस जद्दोजहद के लिए बहुत शक्ति चाहिए, -
11:46 - 11:53पर कभी-कभी आपके पास वह ऊर्जा
नहीं होती, और आप अवसाद से घिर जाते हैं, -
11:53 - 11:59एकदम कम ऊर्जा, किसी को कुछ देने के लिए
नहीं, कभी-२ बिस्तर से भी उठा नहीं जाता। -
11:59 - 12:04कभी उठ जाते हैं तो कुछ खाने - पीने का मन
नहीं करता, और न ही कुछ काम करने का। -
12:04 - 12:09सिर्फ इसलिए क्योंकि आपके पास शक्ति नहीं
है, आपको गहरी थकान है। -
12:09 - 12:15आजकल अत्यधिक थकान परिलक्षण (chronic
fatigue syndrome) भी एक बीमारी है। मैंने -
12:15 - 12:22यह पहले कभी नहीं सुना था।ऐसा क्यों है? यह
एक समस्या है, बीमारी है, इसके कारण हैं - -
12:22 - 12:25क्योंकि हमारे पास बहुत ही ज़्यादा काम हैं
करने के लिए। -
12:25 - 12:29मुझे इस चर्चा के बाद जल्दी से जाना है।
क्योंकि साधु -
12:29 - 12:35भन्ते गुणरत्न, बहुत प्रसिद्ध व अच्छे
साधु हैं, यहाँ आये हुए हैं। -
12:35 - 12:41वे 88 वर्ष के हैं। उन्हें सप्ताहांत पर
Jhana ग्रोव पर ध्यान सिखाने आना था। -
12:41 - 12:45जब सुना कि वे आये हुए हैं, उन्हें
बुलाने के लिए हमने पृथ्वी-आकाश एक कर दिए । -
12:45 - 12:52मुफ़त में ध्यान चर्चा के लिए। और
उनके लिए वायुयान की टिकिट ले ली। -
12:52 - 12:57पर फिर वे बीमार पड़ गए। उनके डॉक्टर
ने कहा कि आप नहीं जा सकते। -
12:57 - 13:02तो जिम्मेदारी किस पर आ पड़ी?
मुझ पर। अब मैं उनकी जगह पर -
13:02 - 13:08रिट्रीट में पढ़ा रहा हूँ। जबकि मुझे इस
सप्ताहांत पर आराम करना था। -
13:08 - 13:11मैं अभी थाईलैंड के एक लम्बे सफर से लौटा
हूँ , बहुत प्रवचन दे कर। -
13:11 - 13:16और फिर सोमवार सुबह मैं कोरिया जा रहा हूँ,
प्रवचन के लिए। -
13:16 - 13:21जबकि ये मेरे आराम करने का समय था।
इसलिए मैं थक गया हूँ। -
13:21 - 13:26पर मैं एकदम क्लांत भी हो सकता था, जो
नहीं हुआ। मैं एक बात जानता हूँ , जो आप -
13:26 - 13:30इतने बरस ध्यान लगा कर सीख जाते हैं,
-
13:30 - 13:34कि थकावट से कैसे बचा जाये, ताकि आपको
निराशा, चिड़चिड़ापन, गुस्सा ना घेर ले। -
13:34 - 13:40ये सब भावनात्मक व शारीरिक रोग हैं।
-
13:40 - 13:47आज के समय में थकावट से कैसे बचा जाये।
हमें अपने पूर्वजो से ज़्यादा प्रयत्न करने -
13:47 - 13:57पड़ते हैं, इतना सब उनके समय में नहीं होता
था। एक - आपको भविष्य कि चिंता करना छोड़ना -
13:57 - 14:04होगा।क्योंकि आपके पास ऊर्जा नहीं है बर्बाद
करने के लिए। जब मैं बहुत व्यस्त होता हूँ -
14:04 - 14:12तो अपना कैलेंडर देखना बंद कर देता हूँ।
क्योंकि अगर देखूं तो लगेगा 'ओह' इतना सब -
14:12 - 14:15नहीं कर पाऊंगा। दूसरे साधु पूछते हैं,
"गुरु ब्रहम आप ये सब कैसे -
14:15 - 14:17करते हैं?" "क्योंकि मैं
इसे देखता नहीं हूँ। " -
14:17 - 14:20आप अपनी कितनी ऊर्जा ये सोचने में खर्च
कर देते हैं की आप सब काम -
14:20 - 14:26नहीं कर पाएंगे।
-
14:26 - 14:31मैं ऐसा नहीं करता क्योंकि मुझे पता है कि
ऐसा करना व्यर्थ है। -
14:31 - 14:38मैं आज एक साधु को बता रहा था, क्योंकि मैं
बहुत थका हुआ था तो मुझे एक बात याद आ गयी -
14:38 - 14:43जब मैं थाईलैंड मैं एक बौद्ध-विहार से दूसरे
में पूरी आज़ादी से घूमा करता था। -
14:43 - 14:51पर एक दिन मैं 9:00 बजे खाना खाकर
पूरा दिन यात्रा करता रहा और उसके बाद -
14:51 - 14:59खाना नहीं खा सकते थे।और फिर गर्मी में
सारे दिन की यात्रा थाई बस में। तब की बसें -
14:59 - 15:06आजकल की बसों जैसी नहीं होती थी। अब तो बहुत
अच्छी बसें होती हैं - आप मानेंगे नहीं। -
15:06 - 15:16मैंने देखा है। 40 साल पहले ऐसा नहीं था।
गर्मी और ऊपर से छोटी-2 दो सीटें, उस पर -
15:16 - 15:22तीन लोग और साथ में एक मुर्गा भी, या सूअर,
या कुछ और, पता नहीं क्या -
15:22 - 15:28घंटों तक ऐसे तंग होकर बैठ कर अंत में
बौद्ध-विहार पहुंचे जहाँ मुझे जाना था। -
15:28 - 15:36मुझे समय भी याद है, शाम के 5:45 .
वहाँ दो साधु और थे। -
15:36 - 15:42"स्वागत है, आप यहाँ रह सकते हैं, पर आपके
पास 15 मिनट हैं तैयार होने के लिए, क्योंकि -
15:42 - 15:496 बजे से हम ध्यान में बैठेंगे 4 घंटे के
लिए, बिना हिले-डुले। " -
15:49 - 15:56"क्या?! मैं सारा दिन यात्रा करता रहा, मैं
थका हुआ हूँ, मैं नहीं कर पाऊँगा!" -
15:56 - 16:05पर... फिर मेरे अभ्यास का ज्ञान जाग उठा,
मैंने शायद कुछ हफ़्ते पहले एक कहानी -
16:05 - 16:10सुनाई थी, एक पहिये की ठेला गाड़ी में
मिट्टी ढोने वाली। अगर आपने नहीं सुनी है, -
16:10 - 16:15तो यह 'अपने दिल के दरवाज़े खोलिये' (Opening
the Door of Your Heart) पुस्तक में है। -
16:15 - 16:19यह कहानी है जब मुझे अपने शुरूआती
दिनों में सुबह 9 बजे से रात 9 बजे -
16:19 - 16:23तक मिटटी हटाने का काम दिया गया था,
क्योंकि मेरे गुरु यह चाहते थे। -
16:23 - 16:30यह बहुत मेहनत का काम था, बहुत कड़ी
मेहनत। पर मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता था -
16:30 - 16:37मैं स्वस्थ व तंदरुस्त था, अभी भी हूँ।
काम पूरा हो गया।और उस रात गुरु चाह दूसरे -
16:37 - 16:43मठ में चले गए। और उनकी जगह जिस साधु ने
कार्यभार संभाला, उन्होंने मुझसे कहा, -
16:43 - 16:49"तुमने यह गलत जगह रखी है, इसे यहाँ से
हटाओ। इसका मतलब 3 दिन की और कड़ी मेहनत। -
16:49 - 16:55मैं कर सकता था, पर बहुत गंदे हो जाते थे,
और पसीने, और मच्छर इत्यादि । -
16:55 - 16:59आपके दोनों हाथ गाड़ी पर होते हैं, आप
-
16:59 - 17:02मच्छरों से बच नहीं सकते। आप पसीने-2 हो
रहे होते हैं -
17:02 - 17:05और मच्छर आपके ऊपर अपना भोजन कर रहे
होते हैं -
17:05 - 17:08जब आपको वैसा काम करना पड़े,
-
17:08 - 17:11६ दिन के बाद आपको कितनी राहत मिलेगी।
-
17:11 - 17:14उस रात को मेरे गुरु चाह
-
17:14 - 17:17वापिस आ गए और अगली सुबह मुझे बोले,
-
17:17 - 17:20"वह मिटटी तुमने वहाँ क्यों डाल दी?
-
17:20 - 17:23मैंने तो तुम्हे उसे दूसरी जगह डालने को
कहा था। -
17:23 - 17:28हटाओ इसे यहाँ से।"
मतलब और ३ दिन की मेहनत। -
17:28 - 17:32मच्छरों से ग्रस्त पसीने के जंगल में।
-
17:32 - 17:34वो कैदी जो जापानी लोगों के लिए
-
17:34 - 17:37दूसरे विश्वयुद्व में काम करते थे, मैं समझ
सकता था कि उन्हें कैसा महसूस होता होगा। -
17:37 - 17:40ईमानदारी से, बहुत मेहनत का काम
-
17:40 - 17:42और हम कुपोषित भी थे।
-
17:42 - 17:44आप मेरी तब की फोटो देखिये,
-
17:44 - 17:47अब जैसा बिलकुल नहीं दिखता। सच में
-
17:47 - 17:49आप मुझे पहचानेंगे नहीं।
-
17:49 - 17:53मैं थोड़ा मोटा हो गया हूँ क्योंकि अब
मैं पूर्ति कर रहा हूँ -
17:53 - 17:57पहले मैं बहुत पतला था, मेरे ख्याल से यह
उचित है [हंसी] -
17:57 - 17:59ख़ैर, अगला दिन हुआ,
-
17:59 - 18:02मैं ६ दिन पहले से कठिन परिश्रम कर रहा था,
-
18:02 - 18:05और ३ और दिन का काम मेरे सामने था,
-
18:05 - 18:10मैं शिकायत करने लगा। मैं पहले से ही थका
हुआ था, बहुत काम कर चुका था। -
18:10 - 18:14मैंने शिकायत की, वे दिन अच्छे थे,
-
18:14 - 18:17क्योंकि तब ज्यादा विदेशी लोग नहीं थे।
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18:17 - 18:20सिर्फ थाई साधु, और कुछ लाओस के साधु,
-
18:20 - 18:24तो मैं अंग्रेजी में गाली दे सकता था।
-
18:24 - 18:27मुझे लगा की किसी को समझ नहीं आयेगा।
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18:27 - 18:30लेकिन यद्यपि उन्हें अंग्रेज़ी नहीं आती थी,
-
18:30 - 18:33लेकिन वे मेरी शारीरिक भाषा समझ सकते थे,
-
18:33 - 18:35मैं सच में मुसीबत में था।
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18:35 - 18:36तब उनमें से एक साधु,
-
18:36 - 18:39मुझे उनका नाम याद नहीं, पर आप जो कोई
भी थे, -
18:39 - 18:42आपको धन्यवाद, धन्यवाद, धन्यवाद।
-
18:42 - 18:45उन्होंने मुझे अदभुत शिक्षा दी, कहा,
-
18:45 - 18:48"ठेले को धकेलना आसान है,
-
18:48 - 18:53उसके बारे में सोचते रहना मुश्किल काम है।"
-
18:53 - 18:55उन्होंने मुझे पकड़ लिया था।
-
18:55 - 18:58मैं इसके बारे में इतना ज़्यादा सोच रहा था,
-
18:58 - 19:01इसीलिए मुझे यह इतना मुश्किल लग रहा था।
-
19:01 - 19:05काम करना आसान था, इसलिए धन्यवाद, धन्यवाद,
धन्यवाद। -
19:05 - 19:09मैंने उसके बारे में सोचना बंद कर दिया और
यह फिर से आनंददायक हो गया। -
19:09 - 19:12हम दूसरे साधुओं के साथ पहले पहुंचने की दौड़
-
19:12 - 19:16लगाने लगे, कौन फावड़ा चलायेगा,
-
19:16 - 19:18कौन मिट्टी ठेले में डालेगा,
-
19:18 - 19:21माफ़ करना, क्या मैंने ज़ोर से मिटटी फेंकी?
-
19:21 - 19:24मैंने जानबूझ कर ही किया था।
-
19:24 - 19:27मज़े करना, खेल खेलना।
-
19:27 - 19:34मैं वैसे ही बहुत चंचल हूँ।
-
19:34 - 19:38कुछ साल पहले मैं वियतनाम में एक कांफ्रेंस
में गया था -
19:38 - 19:42आप जानते ही हैं, बड़ी कांफ्रेंस में,
-
19:42 - 19:45आयोजक आपको कुछ जगह घुमाने ले जाते हैं।
-
19:45 - 19:48मुझे पर्यटन पसंद नहीं, पर जाना पड़ता है।
-
19:48 - 19:53तो मैं वियतनाम में कहीं था,
-
19:53 - 19:57नहरों, भूमिगत टनल के पास
-
19:57 - 19:58जहाँ बार्ज से जाना पड़ता था,
-
19:58 - 20:03बहुत सुन्दर जगह। परन्तु जब वापिस आ
रहे थे... -
20:03 - 20:10वास्तव में मैं सिंगापुर का प्रतिनिधित्व
कर रहा था, -
20:10 - 20:14ऑस्ट्रेलिया का नहीं। मैं सिंगापुर वाली
नाव में था -
20:14 - 20:16और एक और भी सिंगापुर की नाव थी,
-
20:16 - 20:18हमारी नाव में थेरावाद साधु थे,
-
20:18 - 20:21और महायान साधु दूसरी नाव में थे,
-
20:21 - 20:22मैंने उनकी तरफ देखा और कहा,
-
20:22 - 20:26"चलो दौड़ हो जाये, देखते हैं कौन बेहतर है,
-
20:26 - 20:29महायान या थेरावाद?" [हँसी] ये बौद्ध धर्म
-
20:29 - 20:30के दो भाग हैं। हमने दोनों थेरावाद
-
20:30 - 20:33और महायान के बीच दौड़ करा दी। मैं थेरावाद
-
20:33 - 20:36वाली नाव में चप्पू चला रहा था, और महायान
-
20:36 - 20:38साधु अपनी नाव में जी-जान लगा कर चप्पू चला
-
20:38 - 20:40रहे थे, और कौन जीता? ज़ाहिर है
-
20:40 - 20:44थेरावाद जीता। निस्संदेह।
-
20:44 - 20:45यदि आप बौद्ध धर्म जानते हैं,
-
20:45 - 20:48महायान बोधिसत्त्व हैं,
-
20:48 - 20:50वे दूसरे लोगों को परिज्ञान (enlightenment)
-
20:50 - 20:52में मदद करते हैं, स्वयं से पहले। उन्होंने
-
20:52 - 20:56हमें दौड़ में आगे जाने दिया, यह उनकी
प्रथा है। [हँसी] -
20:56 - 21:00मैं मज़ाक कर रहा हूँ। साधु भी बहुत मज़े
करते हैं। -
21:00 - 21:04हम कभी-२ बेवकूफ़ी भी करते हैं, पर उसमें भी
मज़ा आता है। -
21:04 - 21:08धर्म कभी-२ बहुत गंभीर हो जाता है, पर मैं
-
21:08 - 21:10गंभीर धर्म के बिलकुल ख़िलाफ़ हूँ।
-
21:10 - 21:13ख़ैर, तब मैंने सीखा कि जीवन में
-
21:13 - 21:18आनंद कैसे लिया जाये, क्योंकि मैं थकावट से
क्षीण था, -
21:18 - 21:20ठेले खीच कर। लेकिन बजाय
सोचने के -
21:20 - 21:24मैंने वह काम कर दिया।
-
21:24 - 21:26और सारी थकावट गायब हो गयी।
-
21:26 - 21:28आज शाम की ही तरह
-
21:28 - 21:31सारी थकावट ख़तम हो जाये यदि आप
इसके बारे में सोचना बंद कर दें। -
21:31 - 21:33भविष्य के बारे में सोचना, चिंता करना।
-
21:33 - 21:39आपकी सारी ऊर्जा सिर्फ सोचने में व्यर्थ
हो जाती है। -
21:39 - 21:41अगर आप थके हैं, एक व्यस्त दिन के बाद ,
-
21:41 - 21:46भगवान के लिए, सोचना बंद कीजिये।
-
21:46 - 21:49और शिकायत करना, चिंता करना, और डरना भी..
-
21:49 - 21:51और योजनायें बनाना भी..
-
21:51 - 21:55आपका दिमाग़ पहले ही थका है, उसे थोड़ी शांति
दीजिये। -
21:55 - 21:58पर लोग क्या करते हैं जब थके होते हैं ?
-
21:58 - 22:01वे चिड़चिड़े हो जाते हैं, वे नहीं जानते कि
'सहज' कैसे रहा जाये। -
22:01 - 22:03लोग हमेशा बहुत ज्यादा सोचते रहते हैं।
-
22:03 - 22:08और ये सबसे बड़ा कारण है की लोगों को
इतनी थकान होती है। -
22:08 - 22:13बहुत ज़्यादा सोचना, बजाये कि काम करना
-
22:13 - 22:15मुझे नहीं पता की आप इस सप्ताह के अंत में
क्या करने वाले हैं -
22:15 - 22:18इसके बारे में सोचते मत रहिये बस कर दीजिये।
-
22:18 - 22:20ये बात अपने पति को भी बताइये
-
22:20 - 22:22जिसे गैराज की सफाई करनी होती है
-
22:22 - 22:27कहिये, 'पतिदेव सोचो मत, बस कर दो " [हँसी]
-
22:27 - 22:30आपको बायोप्सी (biopsy) करवानी है,
-
22:30 - 22:33इसके बारे में सोचते मत रहिये, क्योंकि
सोचने से -
22:33 - 22:37आप क्लांत हो जाते हैं, "मुझे कैंसर है,
मैं मरने वाला हूँ..." -
22:37 - 22:39इसके बारे में सोचो मत, बस कर दो।
-
22:39 - 22:43यहाँ तक की मरना भी ठीक है, बस उसके बारे
में सोचो मत, -
22:43 - 22:49बस कर दो [हंसी]
-
22:49 - 22:52इसके बारे में सोचना समस्या है।
-
22:52 - 22:56पर खुद से ऐसा मत करिये, बस जब हो जाये
तब ठीक है। -
22:56 - 23:00मैं थकावट के बारे में इतना जान पाया हूँ
-
23:00 - 23:04कि थकावट शारीरिक क्षीणता है, जिसके
-
23:04 - 23:07बारे में आप ज्यादा कुछ नहीं कर सकते,
-
23:07 - 23:09हालांकि थोड़ा कर सकते हैं, पर ज़्यादातर
-
23:09 - 23:12मानसिक और भावनात्मक थकावट होती है।
-
23:12 - 23:18भावनात्मक थकान, क्योंकि आप बहुत काम
करते हैं। -
23:18 - 23:19पता नहीं आप क्यों ऐसा करते हैं।
-
23:19 - 23:24कभी-२ लोग कहते हैं, "मुझे करना होगा।"
'नहीं'. -
23:24 - 23:27"मेरे बॉस मुझसे बहुत काम करने की
उम्मीद करते हैं।" -
23:27 - 23:29अगर उन्हें लगता है की आप थोड़ा भी काम कर
-
23:29 - 23:32रहे हैं, तो बॉस के लिए ठीक है [हँसी]
-
23:32 - 23:36मुझे कार्टून पढ़ना पसंद है,
-
23:36 - 23:40डिल्बर्ट कार्टून।
-
23:40 - 23:44डिल्बर्ट कार्टून में वॉली ऑफिस में काम
करता है, -
23:44 - 23:47आप उसे देखते हैं सिर्फ कॉफ़ी का कप दायें से
बायें, -
23:47 - 23:50और फिर बायें से दायें ले जाते हुए। वह और
कोई काम नहीं करता, -
23:50 - 23:52सिर्फ कॉफ़ी यहाँ से वहाँ ले जाता है,
-
23:52 - 23:55और ऐसा लगता है कि वो काम कर रहा है,
-
23:55 - 23:57और इस तरह वह अपनी नौकरी बचाता है,
-
23:57 - 24:02शायद मैं भी ऐसा ही करता हूँ। [हँसी]
-
24:02 - 24:05एक और भी अच्छा कार्टून है
-
24:05 - 24:08जो मैंने उस दिन देखा,
-
24:08 - 24:11किसी ने मुझे भेजा था, यह अच्छा है
-
24:11 - 24:16इस बारे में कि- लोग मरने के बारे में
चिंता क्यों करते हैं। -
24:16 - 24:18चिंता मत कीजिये, ये अभी हुआ नहीं है,
-
24:18 - 24:21इसके बारे में मत सोचिये, भविष्य की चिंता
मत कीजिये। -
24:21 - 24:25इस कार्टून का नाम है - Peanuts,
-
24:25 - 24:29स्नूपी और चार्ली ब्राउन इसके पात्र हैं।
-
24:29 - 24:32और सही में, आप ये कॉमिक्स पढ़िए, आपको इनमे
-
24:32 - 24:35ज्यादा काम की बातें लगेंगी, बजाए की
-
24:35 - 24:39संपादकीय या समाचार पढ़ने के।
-
24:39 - 24:42ये ज्यादा व्यावहारिक हैं।
-
24:42 - 24:47इसमें चार्ली ब्राउन और उसका कुत्ता स्नूपी
-
24:47 - 24:49कहीं घूमने जाते हैं,
-
24:49 - 24:52वे एक घाट पर बैठे हैं,
-
24:52 - 24:56दोपहर का मज़ा ले रहे हैं, सामने सुन्दर
दृश्य है। -
24:56 - 24:59सिर्फ पहाड़, नहर और पानी।
-
24:59 - 25:01सुन्दर दोपहर में समय बिताते हुए,
-
25:01 - 25:05चार्ली ब्राउन ने अपने कुत्ते स्नूपी से
कहा, -
25:05 - 25:13"तुम्हे पता है स्नूपी, हम सब एक दिन मर
जायेंगे।" -
25:13 - 25:16और स्नूपी, महान दार्शनिक,
-
25:16 - 25:20वह बहुत बुद्धिमान है, मनुष्यों से भी
ज्यादा, -
25:20 - 25:25स्नूपी ने कहा, 'सच है, एक दिन हम सब मर
जायेंगे, -
25:25 - 25:32पर बाकि दिन हम सब नहीं मरेंगे।" [हँसी]
-
25:32 - 25:35कितनी बुद्धिमानी की बात है.
एक दिन तुम मर जाओगे, -
25:35 - 25:38पर बाकी दिन नहीं [हंसी]
-
25:38 - 25:41तो फिर आप इतने नकारात्मक क्यों हैं?
-
25:41 - 25:45इतना सोचिये नहीं, क्योंकि इसके बारे में
-
25:45 - 25:49सोचना हमें थका देता है।
-
25:49 - 25:54आप चाहते हैं आपके बच्चे TER में अच्छे
नंबर लायें, इसके बारे में सोचिये मत। -
25:54 - 25:58इससे ज्यादा फर्क नहीं पड़ता,
आप कर सकते हैं, तो ठीक है... -
25:58 - 26:02अगर यह आपके लिए स्वाभाविक है, यदि आप
प्रतिभाशाली हैं, तब ठीक है, -
26:02 - 26:05पर अपने आपको ज्यादा मत खींचिए।
-
26:05 - 26:08कुछ माता-पिता इस बात पर मुझसे नाराज़ हो
जाते हैं। पर मैं चाहता हूँ कि -
26:08 - 26:11इन बच्चों की भावनात्मक बुद्धि बढ़े,
इन्हें प्यार व इज़्ज़त मिले, -
26:11 - 26:17भले ही वे परीक्षा में अच्छा करें या नहीं।
-
26:17 - 26:22मैं कहता हूँ की यहाँ मौजूद आधे लोगों के
बच्चे औसत बुद्धि के होंगे। -
26:22 - 26:27आपके बच्चे औसत से कम बुद्धि के होंगे।
-
26:27 - 26:30यह तर्कसंगत है, ऐसा होना ही है।
-
26:30 - 26:32आधे बच्चे औसत से कम बुद्धि के होते हैं,
-
26:32 - 26:39ऐसा होना है, क्योंकि यही औसत का नियम है।
-
26:39 - 26:43अगर आप सभी आइंस्टीन हो, तो आधे आइंस्टीन
-
26:43 - 26:47औसत से कम होंगे। [हँसी]
-
26:47 - 26:53पर आप सोचते हैं- "नहीं मेरा बच्चा ऐसा नहीं
हो सकता, दूसरे का हो सकता है, पर मेरा -
26:53 - 26:57नहीं। देखिए , अपने बच्चों को थोड़ी छूट
दीजिये। -
26:57 - 27:02उन्हें आराम से रहने दीजिये, क्योंकि अगर
-
27:02 - 27:05आप उन पर ज्यादा दबाव नहीं डालेंगे, तो वे
-
27:05 - 27:09छोटी उम्र में निढाल नहीं होंगे, और उनकी
-
27:09 - 27:12भावनात्मक बुद्धि बढ़ेगी, जो कि मैंने
-
27:12 - 27:16डाउन सिंड्रोम वाले लोगों में देखी थी।
-
27:16 - 27:20खूबसूरत लोग। वे हिसाब - किताब नहीं कर
सकते थे , -
27:20 - 27:25बिजली के कारीगर नहीं बन सकते थे, पर साधु
जरूर बन सकते थे। -
27:25 - 27:28वे महसूस कर सकते थे, वे संवेदनशील थे, और
-
27:28 - 27:31उनके आपस में खूबसूरत रिश्ते थे।
-
27:31 - 27:34भाई - बहन , संस्थागत ,
-
27:34 - 27:38पर बहुत दयालु। मैंने देखा है।
-
27:38 - 27:40आप किस तरह के इंसान बनना चाहते हैं ?
-
27:40 - 27:44और अपने बच्चों को बनाना चाहते हैं? वे
लोग निढाल नहीं थे, वे मज़ा करते थे। -
27:44 - 27:49और जब हम जैसे हैं वैसा अपने आपको स्वीकार
कर लेते हैं, -
27:49 - 27:52बजाये कि ....
-
27:52 - 27:55बच्चों को ज्यादा दबाव मत दीजिये, उनका
-
27:55 - 27:59पालन-पोषण कीजिये, प्रोत्साहन दीजिये,
प्रेरित कीजिये, -
27:59 - 28:02कौन जानता है कि वे जीवन में क्या बनेंगे ?
-
28:02 - 28:04वे सब यूनिवर्सिटी नहीं जाने वाले
-
28:04 - 28:06यह बड़ा दुखदायी है कि सबको यूनिवर्सिटी
-
28:06 - 28:08जाना पड़ता है - जीवन में और भी बहुत कुछ है।
-
28:08 - 28:12दुनिया मैं इतने सारे लोगों को
-
28:12 - 28:15यूनिवर्सिटी मारती है।
-
28:15 - 28:19एक भित्ति चित्र था, मुझे याद है
-
28:19 - 28:21फिलॉसॉफी विभाग के बाहर था ,
-
28:21 - 28:27नहीं, भौतिक विज्ञान की लैब के बाहर था।
-
28:27 - 28:30उन दिनों के भित्ति चित्र , लोग देखने जाते
थे, -
28:30 - 28:34क्योंकि उसका अर्थ बहुत गहन था।
-
28:34 - 28:39वह था - "परिक्षाएँ डिग्री से मारती हैं "
-
28:39 - 28:43आप समझे इस मज़ाक को? डिग्री से मारना।
-
28:43 - 28:47वे सीखने की क्षमता ख़त्म करती हैं, ज्ञान
-
28:47 - 28:50खोजने का जोश ख़त्म करती हैं, बस हमें
-
28:50 - 28:53परीक्षा देनी है और नंबर लाने हैं - जो
ज़्यादा ले आये। -
28:53 - 28:58वे भावनात्मक बुद्धि को भी ख़त्म करती हैं ,
-
28:58 - 29:01स्कूल व कॉलेज ज़्यादातर, शायद कुछ बदल
-
29:01 - 29:03गए हैं, पर ज्यादातर आपकी खोजने की क्षमता
-
29:03 - 29:10और मिल-जुल कर काम करने की क्षमता को ख़त्म
-
29:10 - 29:13करते हैं , क्योंकि सबको सिर्फ़ अपने-२ नंबर मिलते हैं।
-
29:13 - 29:16आपको अपने मित्र से प्रतियोगिता करनी पड़ती
-
29:16 - 29:20है, और यह सब बहुत थका देता है।
-
29:20 - 29:24बहुत बार आपको वह बनना पड़ता है जो कि आप
नहीं हैं। -
29:24 - 29:31वह जीवन का बहुत बड़ा तनाव है। मुझे देखिये,
मुझे प्रवचन देने में तनाव नहीं होता। -
29:31 - 29:35बहुत साल पहले मैंने इसका हल ढूंढ लिया था।
बहुत आसान तरीका। -
29:35 - 29:40वह यह कि मैं प्रवचन दूँगा, यदि आपको पसंद
आया, बहुत अच्छे! मुझे ख़ुशी होगी यह -
29:40 - 29:45देखकर कि मैंने आपको मदद की आपके जीवन
को बेहतर बनाने में। -
29:45 - 29:49मुझे ख़ुशी होती है अगर आपको मेरी बातें
अच्छी लगती हैं। -
29:49 - 29:53पर मुझे ज्यादा ख़ुशी होगी अगर आपको वो पसंद
न आये। -
29:53 - 29:57क्योंकि तब आप मुझे अकेले छोड़ देंगे और मैं
अपनी कुटिया में ज्यादा समय बिता सकूंगा। -
29:57 - 30:00मुझे आराम करने का मौका मिलेगा अगर आपको
मेरी बातें पसंद न आएं, -
30:00 - 30:04ऐसे भी आपने मेरे सारे चुटकले और कहानियाँ
पहले सुने हुए हैं, -
30:04 - 30:08तो किसी को यहाँ नहीं आना पड़ेगा, बहुत खूब।
-
30:08 - 30:13मैंने यह तरीका सोचा था, पर वह काम नहीं
आया। -
30:13 - 30:18मैंने सोचा कि मैं अपनी सारी कहानियाँ
किताब में लिख दूँ, ताकि आपको यहाँ नहीं -
30:18 - 30:23आना पड़े। मैंने उन्हें बार-२ दोहराता हूँ
ताकि आपको बोरियत हो जाये और आप यहाँ आना -
30:23 - 30:25बंद करें, पर यह उपाय काम नहीं करता,,
और आप लोग आते -
30:25 - 30:29रहते हैं। आप सब स्वपीड़न कामुक हैं [हँसी]
-
30:29 - 30:35देखिए बात यह है कि, मुझे फर्क नहीं पड़ता।
दोनों स्थितियों में जीवन अच्छा है। -
30:35 - 30:38आप सफल होते हैं, या सफल नहीं होते हैं।
-
30:38 - 30:45पर समस्या यह है कि आपके ऊपर बहुत दबाव है,
आपको सफलता का केवल एक ही तरीका पता है। -
30:45 - 30:50यह जीवन की सफलता को मापने का एक संकीर्ण
नज़रिया है। -
30:50 - 30:56मैं सफलताओं को मापने के तरीके बढ़ाने
चाहता हूँ। -
30:56 - 31:03यदि आप सड़क पर भी रह रहे हैं, आप वहां खुशी
से रह रहे हैं। -
31:03 - 31:05क्या यह सफ़लता है ?
-
31:05 - 31:09लोग सोचते हैं, "बेचारा गरीब इंसान"
-
31:09 - 31:13आप उसको पूछिए, और वह कहे, "नहीं, मैं
मज़े में हूँ, मुझे चिंतायें नहीं हैं .... " -
31:13 - 31:17हाँ थोड़ी ठण्ड जरूर है ...
क्या आप कभी सड़क पर रहे हैं? -
31:17 - 31:21मुझे याद है हिप्पी वाले सालों में,
पुल के नीचे रहना ... -
31:21 - 31:25वह साधु बनने के बाद मेरी सबसे अच्छी
यादें हैं। -
31:25 - 31:30जब थाईलैंड में 5 साल के बाद हमें मठ छोड़
देना था, -
31:30 - 31:34आपको आपकी बुनियादी शिक्षा मिल चुकी होती
है, और आपको मठ छोड़ कर जाना होता है। -
31:34 - 31:41और आपको चल कर जाना होता है, अपना
सारा सामान खुद से उठा कर। -
31:41 - 31:46यह हल्का ही था, मैं चल पा रहा था।
मेरा सारा सामान मेरी पीठ पर -
31:46 - 31:51लदा था, पर कभी पीठ दर्द नहीं की।
और स्वतंत्रता का एहसास अद्भुत था, -
31:51 - 31:56एक परिंदे की तरह, आप मनुष्य हो कर भी
एक परिंदे जैसे आज़ाद हो सकते थे। -
31:56 - 32:02हर चौराहे पर आप जहाँ भी जाना चाहें आप जा
सकते थे, -
32:02 - 32:07आपके ऊपर कोई दबाव नहीं था कि आपको
कहीं पहुँचना है या कुछ काम करना है। -
32:07 - 32:15किसी काम को करने की निर्धारित तिथि नहीं,
न ही कोई अपॉइंटमेंट, जो अच्छा रास्ता लगे -
32:15 - 32:21उस पर चल पड़ो। कहीं भी सो जाओ, धान के खेत
में, या घुड़साल में। -
32:21 - 32:28सबसे उत्तम सोने की जगह, मेरे गुरु के
अनुसार थी, शमशान भूमि। -
32:28 - 32:33उसका कारण यह था कि थाई लोग भूतों से बहुत
-
32:33 - 32:39डरते हैं, तो आपको परेशान करने वहां कोई
नहीं आएगा। -
32:39 - 32:42पर यदि आप कहीं और रहते हैं तो लोग हमेशा
आपसे कुछ न कुछ -
32:42 - 32:46पूछने आते रहते हैं, इसलिए शमशान भूमि मेरी
पसंदीदा जगहों में से थी, -
32:46 - 32:49रात को सोने के लिए।
-
32:49 - 32:57बाकि सब भी वहां सो ही रहे होते हैं -
शव इत्यादि [हँसी] -
32:57 - 33:00सोने के लिए वह बहुत अच्छी जगह है।
-
33:00 - 33:05ख़ैर मैं कह रहा था, यह बहुत अच्छा अहसास
होता है कि आपके ऊपर कोई दबाव न हो। -
33:05 - 33:08पूरी आज़ादी, जहाँ जाना है जाओ।
-
33:08 - 33:14सुबह हो जाये तो किसी भी गाँव में चले जाओ,
वहाँ भिक्षा में आपको खाने के लिए मिल -
33:14 - 33:20जायेगा। आपको पैसे की जरुरत नहीं होती।
केवल अपना भिक्षा का कटोरा चाहिए। -
33:20 - 33:28आज़ादी का सुंदर एहसास, यदि आप बहुत
चले हों, -
33:28 - 33:35वह भी गर्मी में, फिर भी आप थके हुए
या क्लांत महसूस नहीं करते, क्योंकि -
33:35 - 33:39आप ज़्यादा सोचते नहीं, क्योंकि सोचने
के लिए कुछ था ही नहीं। -
33:39 - 33:43आप किस चीज़ के बारे में सोचते हैं?
आपकी चिंतायें। -
33:43 - 33:46आपको क्या करना है और वह सब कैसे होगा,
वगैरह-२। -
33:46 - 33:52हम कितना समय और ऊर्जा बर्बाद करते हैं
भविष्य की चिंता में। -
33:52 - 33:59यदि आप थकान से मुक्ति पाना चाहते हैं,
और यह आपकी बड़ी समस्या है, -
33:59 - 34:04तो एक बात आपको सीखनी होगी कि
अपने दिमाग को सक्षम कैसे रखा जाये। -
34:04 - 34:09जीवन के काम करना आसान है, उनके बारे में
सोचते रहना कठिन है। -
34:09 - 34:16जीवन-साथी के साथ रहना आसान है,
लेकिन यदि आप इसके बारे में सोचते रहें तो -
34:16 - 34:19मुश्किल लगता है। थाईलैंड में कोई कह रहा था
-
34:19 - 34:24"मेरे पति बहुत दुष्ट हैं, मुझसे बुरा
व्यवहार करते हैं। " -
34:24 - 34:30अगर तुम्हारे पति बुरा व्यवहार करते हैं,
-
34:30 - 34:37बुरा बोलते हैं, तो याद रखो, तुम्हारे
पास दो कान हैं, -
34:37 - 34:43एक से सुनो, दूसरे से निकाल दो,
अपने पास कुछ मत रखो। -
34:43 - 34:47क्योंकि यदि अपने पास रखा,
उसका मतलब होगा उसके बारे में सोचना, -
34:47 - 34:50बल्कि जितना जल्दी हो, अपने पास से निकाल
देना चाहिए। -
34:50 - 35:00अनावश्यक बातों को भूल जाने की योग्यता ही
थकान से मुक्ति पाने का मूल-मन्त्र है। -
35:00 - 35:03सोचने की आदत छोड़ दीजिये।
-
35:03 - 35:10भविष्य को भी छोड़ दीजिये, आप बस इस चिंता
से त्रस्त रहते है कि आगे क्या होगा। -
35:10 - 35:17और भूतकाल को भी छोड़ दीजिये। मुझे याद नहीं
अगर मैंने आपको यह बताया था, -
35:17 - 35:24मुझे २-३ हफ्ते पहले एक प्रशंसा मिली थी,
२-३ हफ्ते पहले मैं -
35:24 - 35:31कैंसर वेलनेस एसोसिएशन में वार्षिक भेंट के
लिए गया था, उन्होंने कोटट्सलो (Cottesloe) -
35:31 - 35:36में एक पुराने घर से शुरू किया था, और अब
ऑस्ट्रेलियन सरकार के सहयोग से -
35:36 - 35:42एक बड़े परिसर का निर्माण कर लिया गया है,
हर तरह के कैंसर के उपचार के लिए, -
35:42 - 35:47वहाँ मेलेनोमा सोसाइटी, प्रोस्ट्रेट कैंसर
सोसाइटी, -
35:47 - 35:51ब्रैस्ट कैंसर सोसाइटी, और जनरल वैलनेस
एसोसिएशन सभी हैं, -
35:51 - 35:58सब एक ही जगह पर, यह उत्तम है।
मैं वहाँ हर साल जाता हूँ। -
35:58 - 36:03और इस बार जब मैं वहां गया तो उन्होंने
मुझे बताया की यह मेरा २६ वा साल था, -
36:03 - 36:08२६ साल बहुत होते हैं, और उन्होंने बोला
कि हम आपको हर साल के पहले व्याख्यान -
36:08 - 36:11के लिए आमंत्रित करते हैं, उस साल की
-
36:11 - 36:18अच्छी शुरुआत करने के लिए, उन्होंने कहा की
२६ साल पहले वहाँ एक लड़की थी, -
36:18 - 36:25जिसे कैंसर था, हालाँकि उसकी बीमारी में
सुधार हो रहा था, लेकिन वह हमेशा चिंतित -
36:25 - 36:33रहती थी कि क्या होगा अगर कैंसर
फिर से हो गया, और कोई भी सलाहकार उसको -
36:33 - 36:37मदद नहीं कर पा रहा था। फिर मैंने उसको एक
कहानी सुनाई, -
36:37 - 36:42एक महान दार्शनिक की कहानी। मैं पहले,
स्नूपी, पिछली सदी के महान अमेरिकन पंडित -
36:42 - 36:46की कहानी सुना चुका हूँ। पर उनसे भी पहले
एक और महान इंग्लैंड के दार्शनिक थे, -
36:46 - 36:54जिनकी मैं बहुत इज़्ज़त करता हूँ। अगर आपको
दर्शन शास्त्र पसंद है तो पता करें महान -
36:54 - 37:00दार्शनिक विन्नी द पूह (Winnie the Pooh)
के बारे में [हँसी] -
37:00 - 37:04जिन दार्शनिकों के बारे में यूनिवर्सिटी
में पढ़ाया जाता है वे केवल शब्दों से -
37:04 - 37:08भरे हैं, वे कभी भी दिल तक नहीं पहुंचते।
Winnie the Pooh की -
37:08 - 37:13एक कहानी 'Opening the Door of Your Heart,
में होनी चाहिए थी, -
37:13 - 37:19मैंने डिज्नी (Disney) को अनुमति के लिए
लिखा भी था, उनका कॉपीराइट है Winnie the -
37:19 - 37:23Pooh पर, लेकिन उन्होंने कहा "बिलकुल
नहीं" , क्योंकि डिज्नी के लिए यह -
37:23 - 37:27व्यवसाय है, वे किसी को भी उनकी कहानी उपयोग
करने की अनुमति नहीं देते। -
37:27 - 37:34यह Winnie the Pooh किताब की कहानी है जो
मैंने २६ साल पहले सुनाई थी। -
37:34 - 37:38यह कहानी है Winnie the Pooh और उसके दोस्त
-
37:38 - 37:44पिगलेट (Piglet) की, जो जंगल में से जा रहे
थे, तूफान आ रहा था, पेड़ों से टहनियाँ टूट -
37:44 - 37:48कर गिर रहीं थी, और फिर पेड़ भी जड़ों से
टूट कर गिरने लगे। -
37:48 - 37:55तूफ़ान ख़तरनाक होते हैं। आपको तूफ़ान में जंगल
में नहीं जाना चाहिए, इसलिए पिगलेट -
37:55 - 38:01डरा हुआ था, और उसका डर इतना बढ़ गया कि वह
विन्नी द पूह की तरफ मुड़ा और बोला -
38:01 - 38:06"मैं और नहीं चल सकता, मुझे बहुत डर लग
रहा है। " -
38:06 - 38:08"क्यों?" विन्नी द पूह ने पूछा।
-
38:08 - 38:15"मुझे डर लग रहा है, ऐसा ना हो कि हम एक पेड़
के नीचे हों और वह हमारे ऊपर गिर जाये!" -
38:15 - 38:22जो कि एक सम्भावना थी...
विन्नी द पूह चौंक गए, -
38:22 - 38:27इससे पता चलता है कि वे कितने बड़े दार्शनिक
थे, अगर उनके इतने बाल न होते तो -
38:27 - 38:32वे बौद्ध साधु होते [हँसी]
-
38:32 - 38:43और उन्होंने जवाब दिया, "क्या होगा अगर एक
पेड़ गिरे जब हम उसके नीचे न हों?" -
38:43 - 38:47और वह डर का अंत था।
क्योंकि सारा डर भविष्य को नकारात्मक -
38:47 - 38:52नजरिये से देखने से आता है, उन सब बातों
को सोचना जो कि गलत हो सकती हैं, -
38:52 - 38:58त्रुटियाँ ढूंढ़ने वाला दिमाग, उसे डर कहते
हैं। उसका विपरीत है - आशा , भविष्य को -
38:58 - 39:02एक सकारात्मक नजरिये से देखना, क्या-२
अच्छा हो सकता है भविष्य में, -
39:02 - 39:08और आपने अपनी जिंदगी में देखा होगा कि, अगर
आप किसी बात से बहुत डरते हैं तो वह हो -
39:08 - 39:17जाती है, इसी तरह अगर किसी बात की बहुत
आशा रखते हैं तो वह भी हो जाती है। -
39:17 - 39:24तो जब मैंने २६ साल पहले उस लड़की को यह
कहानी सुनाई तो उसे अपने प्रश्न का उत्तर -
39:24 - 39:27मिल गया। क्या होगा अगर कैंसर वापिस आ गया?
-
39:27 - 39:31उत्तर था - क्या होगा अगर वह वापिस नहीं
आया? -
39:31 - 39:36और वह वापिस नहीं आया। और यही कारण है कि
वे मुझे बार-२ आमंत्रित करते रहे। -
39:36 - 39:41मैं वापिस जाता हूँ, कैंसर नहीं [हँसी]
-
39:41 - 39:44अब आप समझ सकते हैं, ज़रा ध्यान से सोचिये
-
39:44 - 39:48गहराई से सोचने पर लगेगा कि यह स्वाभाविक
है, यदि आप कैंसर के बारे में चिंता करते -
39:48 - 39:51रहते हैं, "क्या होगा यदि यह वापिस आ गया?"
-
39:51 - 39:55आप चिंतित होते हैं, आप तनावग्रस्त हो जाते
हैं, यही तनाव कैंसर का मुख्य कारण है, -
39:55 - 40:01आप खुद ही कैंसर को आमंत्रित करते हैं,
लेकिन यदि आप सोचें की यह वापिस नहीं आएगा, -
40:01 - 40:06आप इसकी चिंता न करें, आप निश्चिंत रहें,
तनावमुक्त रहें, तो -
40:06 - 40:08संभावना है कि कैंसर वापिस नहीं आयेगा।
-
40:08 - 40:17आप सफ़लता, अच्छी सेहत, खुशी की संभावना को
बड़ा देते हैं, -
40:17 - 40:26और आपको ज्यादा थकान भी नहीं होती यह सोच-२
कर कि आगे क्या होगा। -
40:26 - 40:33यह ध्यान सम्बंधित ज्ञान है, और यह बहुत
उत्तम ज्ञान है। -
40:33 - 40:39"इंसान का दिमाग दो भागों में बंटा हुआ है",
यही कारण है कि लोग थक जाते हैं। -
40:39 - 40:43मैं इसे सक्रिय या 'करने वाला' और 'जानने वाला'
भाग कहता हूँ। आप मेरी ध्यान की कक्षा में -
40:43 - 40:50आयें हैं तो आप जानते होंगे। यह इंसानी
दिमाग को देखने का शक्तिशाली नजरिया है। -
40:50 - 40:53'करने वाला' दिमाग प्रतिक्रिया करता है,
यह अभी मेरे बोलने पर भी -
40:53 - 40:56प्रतिक्रिया कर रहा होगा, "यह ठीक बोला",
"यह बेकार बात है" वगैरह। -
40:56 - 41:01यह प्रतिक्रिया भी काम करना है, योजनायें
बनाना, याद रखना, -
41:01 - 41:05बातें समझना, कार्य-कलाप करना,
-
41:05 - 41:10सोचना कि यहाँ से जाकर आप क्या करेंगे,
सप्ताहांत पर आप -
41:10 - 41:15क्या करेंगे, यह सब सक्रिय दिमाग करता है।
-
41:15 - 41:19दिमाग का दूसरा भाग है जो 'जानता है' .
-
41:19 - 41:23निष्क्रिय चेतना, केवल जागृत रहना,
-
41:23 - 41:29अपनी बाज़ु पर हो रही खुजली को महसूस करना,
इस कमरे की ठंडक को महसूस करना, -
41:29 - 41:35दूर से आ रहीं ट्रैफिक की आवाज़ों को सुनना,
-
41:35 - 41:40केवल जानना। अब क्योंकि आपको दिमाग के
-
41:40 - 41:45दोनों भागों में फ़र्क पता चल गया, आपको
आसानी से यह समझ आ जायेगा -
41:45 - 41:50कि आपकी 90% से ज्यादा ऊर्जा
-
41:50 - 41:57काम करने, बातों पर प्रतिक्रिया करने में
खर्च होती है, और आपके पास कुछ बचता ही -
41:57 - 42:02नहीं जागृत रहने, महसूस करने के लिए।
इसलिए इतने सब लोग, -
42:02 - 42:08रात को तारे नहीं देख पाते हैं, भले ही वे
जाग रहे हों, -
42:08 - 42:13वे बस बहुत काम कर रहे हैं। वे हवा को महसूस
नहीं कर पाते हैं, -
42:13 - 42:18उन्हें बारिश का पता नहीं चलता, वे बस कुछ
काम करने में व्यस्त होते हैं, -
42:18 - 42:24वे जिन्दा नहीं हैं, वे बस बुरी तरह से थके
हुए हैं, -
42:24 - 42:33बहुत कुछ 'कर के',
और बहुत कम 'हो कर'। -
42:33 - 42:43क्या होगा यदि आप यह सोचने की बजाय कि आप
'हैं', आप केवल महसूस कीजिये, -
42:43 - 42:46बहती हवा को महसूस कीजिये। ठण्ड को, गर्मी
को महसूस कीजिये। कार तक बिना जूतों -
42:46 - 42:55के जाईये और अपने पाँवों के नीचे पत्थर या
घास को महसूस कीजिये। -
42:55 - 42:59आप अपने आप को जिंदा महसूस करेंगे,
और सिर्फ जीवन नहीं, -
42:59 - 43:04ऐसा करने से आप ऊर्जा को 'जानने' में
स्थानांतरित करते हैं 'करने' से हटा कर। -
43:04 - 43:07जब आप ऊर्जा को निष्क्रिय जागरूकता में
डालते हैं- -
43:07 - 43:17जागृत, माइंडफुलनेस - थकावट जाने लगती है।
आप जाग जाते हैं, क्योंकि -
43:17 - 43:22मानसिक थकावट कम ऊर्जा की पहचान है।
-
43:22 - 43:26अपनी ऊर्जा को माइंडफुलनेस में
लगाइये, आप जागृत महसूस करेंगे। -
43:26 - 43:31इसका एक अच्छा उदाहरण है - चाय या कॉफ़ी।
-
43:31 - 43:34आप सुबह की चाय से पहले कितने बेबस होते हैं
-
43:34 - 43:37चाय या कॉफ़ी पीजिये और फिर आप जागते हैं,
जिन्दा होते हैं, -
43:37 - 43:42उसके बाद आप देख सकते हैं, सुन सकते हैं,
सोच सकते हैं। -
43:42 - 43:49वह कृत्रिम ऊर्जा है, सोचिये कि यदि वह
ऊर्जा प्राकृतिक होती? -
43:49 - 43:53तो आप जब सो कर उठते तो ऊर्जावान उठते।
जब दिमाग ऊर्जावान होता है, -
43:53 - 43:59तो वह शरीर को ऊर्जा देता है,
मैं आपको ध्यान सीखने के बाद १० मिनट -
43:59 - 44:03तक वही कर रहा था। इसीलिए मैं ज़्यादातर
मार्गदर्शित ध्यान [गाइडेड मैडिटेशन] -
44:03 - 44:09कराता हूँ। पर मैं बहुत थका हुआ था,
-
44:09 - 44:12यदि आप जानना चाहते है 'क्यों', तो
मैं आपको बताता हूँ कि मैं पिछले -
44:12 - 44:18२ हफ्ते से क्या कर रहा था , और आज भी वही,
तो मुझे क्षीण होना ही था, -
44:18 - 44:25तो मैंने आपको २० मिनट तक सिखाया, और फिर,
मुझे कुछ और नहीं करना था, -
44:25 - 44:33मैंने अपने मन को स्थिर किया,
और जागृत होने में ऊर्जा वापिस डाली, -
44:33 - 44:41और आप फिर से जिन्दा हो जाते हैं,
यह अद्भुत अहसास है। -
44:41 - 44:48बहती हवा को महसूस करो.. क्या आप हवा की
आवाज़ सुन रहे हैं? सुनिये.. -
44:48 - 44:53ज्यादातर लोग नहीं सुन पाएंगे, पर आपने
सुना। -
44:53 - 45:01ऊर्जा वापिस आने लगती है, और थकान गायब
हो जाती है। -
45:01 - 45:09मैंने एक कांफ्रेंस में एक कहानी सुनी थी,
एक बहुत अच्छा मनोचिकिस्तक था, -
45:09 - 45:15पर वह थोड़ा पागल था,
-
45:15 - 45:20उसका इलाज का तरीका बहुत प्रसिद्व हो
गया था, -
45:20 - 45:30आप उसके पास जाईये, खूब सारा पैसा दीजिये
और वह आपको बताएगा की आप प्रकृतिक स्थान -
45:30 - 45:35पर जाईये। और यह इलाज काम करता था, लोगों
की बीमारियाँ ठीक हो जाती थीं, और वह -
45:35 - 45:39बहुत पैसा बना लेता था, समझदार इंसान।
-
45:39 - 45:44पर ऐसा क्यों है- प्रकृति में चलना, समुद्र
के पास बैठना, -
45:44 - 45:49तैरना या सर्फिंग करना नहीं, सिर्फ बैठना।
जंगल में जाना और कुछ करना नहीं, -
45:49 - 45:56वह इतनी शांति क्यों देता है?
क्योंकि ऊर्जा वापिस आती है -
45:56 - 46:01माइंडफुलनेस में, जानने में,
आप ज्यादा कुछ नहीं कर रहे हैं , -
46:01 - 46:07इसका मतलब है की आपकी थकान जा रही है,
वह ख़त्म हो रही है, और जब थकान -
46:07 - 46:13ख़तम होती है तो आपकी मानसिक, शारीरिक,
भावनात्मक सेहत -
46:13 - 46:20बहुत-२ बढ़ जाती है।
आप ठीक हो जाते हैं क्योंकि प्रकृति के पास -
46:20 - 46:24आप ज्यादा कुछ नहीं कर सकते।
इस सप्ताहांत पर ध्यान देना, -
46:24 - 46:33आपके पास विकल्प है - खरीदारी करने जाइये,
या जंगल में जाईये। -
46:33 - 46:41और देखिये की आपको बाद में कैसा महसूस होता
है। एक ऐसा काम है की आप थक कर आते हैं, -
46:41 - 46:46आप जंगल में जाइये, या समुद्र के किनारे,
किसी एकांत जगह पर अकेले, -
46:46 - 46:49King's पार्क में जाइये, या नदी किनारे
चुपचाप सैर कीजिये, -
46:49 - 46:56कुछ ज्यादा मत कीजिये, आप देखेंगे की आपकी
थकावट ख़तम हो गयी है। भगवान के लिए -
46:56 - 47:01अपने आपको एक छुट्टी दीजिये।
कितने ज्यादा लोगों को कैंसर हो रहा है, -
47:01 - 47:08कितने लोग तलाक ले रहे हैं।
कितने सारे बच्चे अपने माता-पिता से -
47:08 - 47:13जुड़ नहीं पाते, क्योंकि उनके माता-पिता
उनसे जुड़ नहीं पाते, -
47:13 - 47:19क्योंकि वे बहुत थके हुए हैं।
वे सुन नहीं पा रहे क्योंकि वे बहुत निढाल -
47:19 - 47:26हैं।समझने की कोशिश कीजिये कि थकान आज
के समय का बहुत बड़ा अभिशाप है। -
47:26 - 47:33और कुछ तरीके हैं जिनसे कि इससे बचा जा सकता
है, जिसमे से एक आपने आज यहाँ सुना। -
47:33 - 47:42और यह बात मैंने साबित भी कर के दिखा दी है
50 मिनट तक भाषण दे कर, -
47:42 - 47:48यद्यपि ऐसा करना किसी भी विवेकी इंसान
के लिए मुश्किल होता। -
47:48 - 48:03सुनने के लिए धन्यवाद।
साधु !! साधु !! साधु!! -
48:03 - 48:08हाँ, यह ऊर्जा है।
-
48:08 - 48:13बहुत अच्छे। कुछ प्रश्न हैं आयरलैंड,
फ्रांस, और लंदन से ! -
48:13 - 48:18और यूरोप भी।
हम थकान से कैसे बच सकते हैं , जब -
48:18 - 48:22लोग हमें कहते रहते हैं कि हम गलत हैं, या
हमारी मान्यताएँ गलत हैं ? -
48:22 - 48:30बस उन्हें कहते रहो - "हाँ, आप सही हो,
मैं गलत हूँ"। जब मैं मलेशिया गया था, -
48:30 - 48:40वहाँ भी यह समस्या देखी। मलेशिया में
बहुत सारे क्रिस्चियन हैं, -
48:40 - 48:44ये इवैंजेलिकल हैं, जो सबका धर्म-परिवर्तन
करना चाहते हैं। . -
48:44 - 48:49यह मलेशिया की समस्या थी, और
सिंगापुर की भी, -
48:49 - 48:55वहाँ एक बुज़ुर्ग बौद्ध हैं, अपनी सारी उम्र
वे बौद्ध रहे हैं, पर उनका बेटा या पोता -
48:55 - 48:59इवैंजेलिकल बन गया है। बाकि सब लोग बौद्ध
थे, या हिन्दू थे , या कुछ और। -
48:59 - 49:05और अब बेटे को लगता है कि ,"मेरे पिता नर्क
में जायेंगे अगर वे इवैंजेलिकल नहीं बने" -
49:05 - 49:11तो वह अपने बीमार और मरते हुए पिता
के सिरहाने गया पादरी को ले कर, -
49:11 - 49:19और उन्हें प्रताड़ना देता रहा, और उनका
धर्म-परिवर्तन किया, बहुत पीड़ादायक अनुभव था -
49:19 - 49:24और अब सिंगापुर सरकार ने इसके ख़िलाफ़ कानून
बना दिया है। -
49:24 - 49:30किसी ने मुझसे पूछा-आपकी क्या सलाह है?
अगर वह मेरा बेटा या पोता होता, -
49:30 - 49:35मैं मर रहा हूँ, और वह पादरी और अपने
दोस्तों को लेकर आ जाये और -
49:35 - 49:40बाइबिल, हालिलुय की बात करें, और मुझ पर
दबाव डालें धर्म-परिवर्तन के लिये, -
49:40 - 49:44और कहें जीसस तुम्हें लेने आ रहे हैं,
मैं क्या करूँगा? -
49:44 - 49:51उन्हें यह समझाने की कोशिश मत करो कि
वे गलत हैं। धर्म-परिवर्तन कर लो। -
49:51 - 49:54उन्हें बोलो, "आप ठीक कह रहे हो, मैं जीसस
को अपना -
49:54 - 49:58उद्धारक स्वीकार करता हूँ।"
और वे हालिलुय - हालिलुय करते रहें , -
49:58 - 50:01फिर वे आपकी जान छोड़ देंगे।
और फिर जैसे ही वे बाहर जाएँ, -
50:01 - 50:06आप वापिस अपने धर्म में आ जाओ।
[हँसी] बौद्ध बन जाओ। -
50:06 - 50:10यह मेरी व्यावहारिक सलाह है।
तो अगर कोई कहता है, "आप गलत हैं-2, -
50:10 - 50:13"हाँ, आप सही हैं, मैं आपसे सहमत हूँ ,
-
50:13 - 50:18मैं गलत हूँ" , फिर वे आपका पीछा छोड़
देंगे। और जैसे ही वे आपको अकेला छोड़ें, -
50:18 - 50:23"नहीं, क्या बकवास है, मैं ही सही हूँ"
[हँसी] -
50:23 - 50:32नहीं तो यह नामुमकिन है। मैं पति-पत्नी
के बारे में भी यही कहता हूँ, -
50:32 - 50:36आपको अब तक पता होना चाहिए।
[टेलीफोन की घंटी] संगीत बजा -
50:36 - 50:44जवाब देने के लिए , ठीक है,
ऐसा होता है, ऐसे भी यह आपकी गलती नहीं है, -
50:44 - 50:47यह मोबाइल फ़ोन की गलती है,
तो आप खुद से नाराज़ मत होईये, -
50:47 - 50:53अपने फ़ोन को मारिये,
अपने फ़ोन को नज़रबन्द कर दीजिये। -
50:53 - 51:00मैं क्या कह रहा था? हाँ तो मैं
गलत होने के बारे में बात कर रहा था। -
51:00 - 51:05आप अपने जीवन-साथी को कुछ भी बोल कर
समझा नहीं सकते -
51:05 - 51:09कि वह गलत है, बिलकुल नहीं।
-
51:09 - 51:13आप कितने समय से उस आदमी के साथ
रह रहे हैं? -
51:13 - 51:23आप नहीं कर सकते। यदि आप जर्मनी के
प्रधानमंत्री होते तब भी नहीं, -
51:23 - 51:27क्या नाम है उनका? हाँ एंगेला मैर्केल !
-
51:27 - 51:31बहुत प्रतिभावान स्त्री, बहुत शक्तिशाली,
पता नहीं वह शादीशुदा है या नहीं, -
51:31 - 51:34पर मैं पूरे यकीन से कह सकता हूँ कि वह भी
अपने पति से बहस में हार जाती होगी, ऐसा -
51:34 - 51:41नहीं हो सकता कि वह अपने पति से मनवा ले कि
वह गलत है। और ओबामा भी मिशेल से नहीं मनवा -
51:41 - 51:46सकता, पत्नी गलत हो सकती है? असंभव।
चाहे आप कितने प्रभावशाली और समझदार हों। -
51:46 - 51:52ऐसा नहीं हो सकता। इसलिए कोशिश भी मत
कीजिये। बहुत सारे पति कहते हैं -
51:52 - 52:00"हाँ प्रिये, मैं तुमसे सहमत हूँ" और फिर वे
बाहर जाकर जो मन में आता है करते हैं [हँसी] -
52:00 - 52:06यह सच है, पत्नियों को इसकी आदत डाल
लेनी चाहिए। -
52:06 - 52:10एक कहानी सुनिये जो मैं हमेशा
शादियों में सुनाता हूँ , -
52:10 - 52:15कल दोपहर भी एक शादी है।कोई तरीका
नहीं है लोगों को विश्वास दिलाने का कि -
52:15 - 52:23वे गलत हैं, तो बिना किसी के आगे झुके आप
अपने निर्णय लें, और अपनी जिंदगी अपने ढंग -
52:23 - 52:29से जी पायें, ऐसा करना मुश्किल है।
और फिर झुँझलाहट होती है। -
52:29 - 52:33वह (पति) हमेशा सही होता है? मुझे ही हमेशा
उसकी बात क्यों माननी पड़ती है ? -
52:33 - 52:40हमेशा वही (पत्नी) सही क्यों होती है?
तो कैलेंडर विधि अपनाइये, वही समाधान है, -
52:40 - 52:45इससे लोग अपने साथी के साथ सदभावनापूर्ण
रह सकते है। कैलेंडर विधि के अनुसार -
52:45 - 52:51जब कभी अपने साथी से झगड़ा हो जाये, तो यह
मत बहस कीजिये कि कौन गलत है कौन सही, -
52:51 - 52:58कैलेंडर देख कर सुनिश्चित कीजिये, महीने
के विषम दिनों में पत्नी सही है [हँसी] -
52:58 - 53:04लड़कियाँ हमेशा विषम दिनों में सही होती हैं।
सम दिनों में पति सही है। -
53:04 - 53:12यह उचित है। आज १९ तारीख़ है, तो आज
सभी लड़कियाँ सही हैं, -
53:12 - 53:19पर ध्यान रहे, कल पति के सही होने का दिन है
[हँसी], अब आपको बहस करने की जरुरत नहीं है। -
53:19 - 53:26कैलेंडर सुनिश्चित करेगा कि कौन सही है,
और वही निर्णय मान्य होगा। -
53:26 - 53:33अच्छा है कि दूसरा व्यक्ति निर्णय ले रहा है
यह न्यायोचित है। -
53:33 - 53:37और लोगों ने पहले से ही पता लगा लिया है,
लड़कियों ने पहले ही से पता लगा लिया है, -
53:37 - 53:42लड़कियों को ज़्यादा दिन मिलते हैं साल में
सही होने के, चार या पांच, -
53:42 - 53:47मैं लड़कों से कहूंगा कि वे इस बात पर मान
जाएँ। मुश्किल तब होती है, जब लोग पूछते हैं -
53:47 - 53:56क्या होगा अगर आप समलैंगिक रिश्ते में हैं ?
[हँसी] तब अापने मुझे स्टंप आउट कर दिया, -
53:56 - 54:07तब यह काम नहीं करेगा। आप दोनों ही एक ही
दिन सही हैं, और दूसरे दिन गलत। [हँसी] -
54:07 - 54:11हाँ, और यदि लोग कहते हैं कि आप गलत हैं,
तो मैं ध्यान नहीं देता, उन्हें बोलने दो, -
54:11 - 54:14बस अपना काम करो, उनके बारे में मत सोचो,
और बाद में आपको ज्ञात -
54:14 - 54:18होगा कि वे जो चाहे आपको बोल सकते हैं, पर
वह रद्दी है, ध्यान न दें। -
54:18 - 54:21[प्रश्न] क्या आपको लगता है की थकान और
ऑक्सीज़न में संबंध है? -
54:21 - 54:23साँस लेना, प्रदूषण, या साँस लेने
का तरीका ? -
54:23 - 54:26कुछ संबंध है, क्योंकि ऑक्सीजन से आपको
-
54:26 - 54:31ऊर्जा मिलती है, और यदि ऑक्सीजन कम हो,
या प्रदूषण हो , -
54:31 - 54:37तो उसका असर इस पर पड़ेगा कि कितनी ऑक्सीजन
आपके शरीर को मिल रही है, -
54:37 - 54:43लेकिन यदि ऑक्सीजन कम हो जाये तो फेफड़े
ज्यादा काम करते हैं, ज्यादा साँस ले कर। -
54:43 - 54:46जब मैं भूटान गया था तो मेरे साथ ऐसा
हुआ था। -
54:46 - 54:52वहाँ बहुत शुद्ध हवा थी, पर ऑक्सीजन की
मात्रा टाइगर नेस्ट पर बहुत कम होती है, -
54:52 - 54:56क्योंकि वह बहुत ऊंचाई पर है।
उस पहाड़ी के नीचे -
54:56 - 55:01किसी ने एक एनर्जी बार (चॉक्लेट) ख़रीदा था,
-
55:01 - 55:06मार्स चॉक्लेट जैसा, लेकिन जब वे ऊपर गए
तो वह फूल गया। -
55:06 - 55:10उन्होंने मुझे दिखाया, वह गुब्बारे जैसा
हो गया था, क्योकि ऊंचाई पर हवा का दबाव -
55:10 - 55:15बहुत कम होता है. नीचे ज़मीन पर
हवा का दबाव सामान्य था, -
55:15 - 55:19पर जैसे ही हम ऊँचे गए,
वह गुब्बारे जैसा हो गया। -
55:19 - 55:24तो वह उतना ऊँचा था, वहाँ ऑक्सीज़न बहुत
कम थी , पर होता क्या है कि वहाँ -
55:24 - 55:31हमारे फेफड़े ज्यादा काम करने लगते हैं।
तो थकान और ऑक्सीजन के बीच -
55:31 - 55:33सम्बन्ध है , लेकिन हमारा शरीर जानता है
-
55:33 - 55:36कि उसकी पूर्ति कैसे की जाये।
पर शरीर को नहीं पता कि पूर्ति -
55:36 - 55:39की जाये जब आप बहुत ज्यादा सोचने
लगते हैं। -
55:39 - 55:44प्रिये अजान (लंदन से), यदि किसी ने जिंदगी
में अपना सब कुछ खो दिया हो, और उसे -
55:44 - 55:48भविष्य की बहुत चिंता सताती हो, उसे क्या
करना चाहिए? -
55:48 - 55:52मुझे याद करो, मैंने अपना सब कुछ खो
दिया है -
55:52 - 55:57मैंने अपनी डिग्री खो दी, अब उसकी कोई
जरूरत भी नहीं है। -
55:57 - 56:02मैंने अपना सारा पैसा खो दिया, मेरे पास एक
पैसा भी नहीं है। जवानी में कुछ पैसा था। -
56:02 - 56:12मैंने और क्या खोया? प्रेमिकायें, पैसा,
जायदाद , सब कुछ। -
56:12 - 56:18मैंने मेरा बीता हुआ समय (भूतकाल) खो दिया,
सारी यादें और मेरे सारे डर भी। -
56:18 - 56:22मैंने मेरा सिक्योरिटी खो दिया। मेरा कोई
गुजारा भत्ता भी नहीं है। -
56:22 - 56:26और मेरी कोई पेंशन भी नहीं है।
-
56:26 - 56:31मेरे पास कुछ भी नहीं है।
क्या होगा अगर आप मुझे कल से -
56:31 - 56:40खाना देना ही बंद कर दें ?
आह! सब कुछ खो देना समस्या नहीं है -
56:40 - 56:47कभी -२ वह आपको बहुत आज़ादी
देता है , आप साधारण तरीके से जी सकते हैं -
56:47 - 56:53सादा जीवन जीना सीखिए।
परेशानी में रहना यह सोचते हुए कि -
56:53 - 56:56आपने अपनी जायदाद खो दी,
तो आप अपने मन की शांति भी उस बात -
56:56 - 57:03पर खो रहे हैं। कुछ दिन पहले बोधियाना मठ
में चोरी हो गयी, -
57:03 - 57:07चोर कुछ जंजीरे ले गए।
मैंने सीधे बोला की वे हमारी -
57:07 - 57:10जंजीरें चुरा सकते हैं ,
पर वे हमारी मन की शांति -
57:10 - 57:16और दूसरों के लिए करुणा नहीं चुरा
सकते। और वास्तव में वह अच्छा ही हुआ -
57:16 - 57:20क्योंकि वे जंजीरे बहुत पुरानी थी , और
-
57:20 - 57:24अब इन्शुरन्स के पैसे से हम नयी
खरीद सकते हैं। [हँसी] -
57:24 - 57:29तो अगर वह चोर कभी पास में हो,
तो यहाँ आये, हम उसे धन्यवाद देंगे। -
57:29 - 57:32मुझे ऐसा नहीं कहना चाहिए पर अंत
में सब अच्छा ही हुआ। -
57:32 - 57:34वे आपके घर आकर आपका सामान चुरा
सकते हैं , पर आप -
57:34 - 57:38उन्हें अपनी खुशी क्यों चुराने देते हैं ?
-
57:38 - 57:41आप को ऐसा नहीं करना चाहिए।
हो सकता है की आप अपनी सारी संपदा -
57:41 - 57:46खो दें, अपनी पत्नी खो दें,
बच्चे खो दें, या और कुछ, -
57:46 - 57:57पर आपको अपनी ख़ुशी खोने देने नहीं चाहिए।
ऐसा करना अपनी उम्मीद खो देना होगा। -
57:57 - 58:02तो आप अपनी उम्मीद को जीवित रखिये।
दूसरे लोगों को देखिये, -
58:02 - 58:07दूसरे लोग जो आपके समान
परिस्थितियों में हैं , -
58:07 - 58:12क्या कहते हैं उन्हें -
मनोचिकित्सक दल या मित्र-समूह, -
58:12 - 58:15कभी-२ जब हम दूसरे लोगों के जीवन के बारे
में सुनते हैं, जिनका -
58:15 - 58:24जीवन हमारे जैसा बीता है, उनसे हमें उम्मीद
मिलती है, डर या चिंता नहीं। -
58:24 - 58:28यह एक बहुत अहम चीज़ है जो आपको जीवन में
लानी चाहिए - उम्मीद -
58:28 - 58:35तो यदि आपको जीवन में कोई साथी अभी तक
नहीं मिला है - निराश मत होईये, -
58:35 - 58:42यदि आप डरते रहेंगे, कि आपको साथी नहीं
मिलेगा, तो सही में नहीं मिलेगा। उम्मीद -
58:42 - 58:49रखिये , "हाँ, ये हो सकता है", तो आप सफलता
का दरवाज़ा खोल रहे हैं। तो हमेशा भविष्य को -
58:49 - 58:56आशावादी होकर देखिये, तो आपके बुरे अनुभव
आपकी उम्मीद नहीं तोड़ पायेंगे, -
58:56 - 59:03और जहाँ उम्मीद है, वहीँ सफलता है।
-
59:03 - 59:08उन लोगों को धन्यवाद्। ९ बज गए हैं।
और कोई प्रश्न हैं ? -
59:08 - 59:12बहुत अच्छे। अलविदा [हँसी]
-
59:12 - 59:14अब हम बुद्ध, धर्म और संघ को प्रणाम करेंगे।
-
59:14 - 59:19क्षमा कीजिये यदि मैं आपसे बात ना कर पाऊं,
क्योंकि मुझे अभी भागना है -
59:19 - 59:24जंहा ग्रोव मठ में रिट्रीट में पढ़ाने
के लिए
- Title:
- थकान का निवारण
- Description:
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हमारे 24/7 ऑन लाइन समाज की नई महामारी है कि लोग हमेशा थके हुए व क्षिथिलरहते हैं। यह एक कष्टमय अहसास है, और हमारी खुशियों और शांति को ग्रहण लगाता है। थकान का निवारण कैसे किया जाये, गुरु ब्रहम इस विषय पर एक नया दृष्टिकोण व सुझाव प्रस्तुत कर रहे हैं।
- Video Language:
- English
- Team:
Buddhist Society of Western Australia
- Project:
- Friday Night Dhamma Talks
- Duration:
- 01:00:26
| Eug approved Hindi subtitles for Dealing with Tiredness | Ajahn Brahm | ||
| Jagriti Shankar accepted Hindi subtitles for Dealing with Tiredness | Ajahn Brahm | ||
| Jagriti Shankar edited Hindi subtitles for Dealing with Tiredness | Ajahn Brahm | ||
| Eug edited Hindi subtitles for Dealing with Tiredness | Ajahn Brahm |