पेंसिल उत्तम क्यों है
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0:00 - 0:04पेंसिल के उपयोग के अनुभव में,
ध्वनि की भूमिका बड़ी महत्त्वपूर्ण होती है। -
0:04 - 0:07उसकी रगड़ की आवाज़
साफ़ सुनाई देती है। -
0:07 - 0:09(रगड़ की आवाज़)
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0:10 - 0:13[छोटी चीज़ें। बड़े विचार।]
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0:14 - 0:16[पेंसिल के बारे में कैरोलिन वीवर के विचार]
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0:17 - 0:19पेंसिल एक अत्यन्त साधारण वस्तु है।
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0:19 - 0:21यह लकड़ी से बनती है
जिस पर पेंट की कुछ परतें होती हैं -
0:21 - 0:23रबड़ लगा होता है और भीतर का भाग,
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0:23 - 0:25ग्रेफाइट, मिट्टी और पानी से बना होता है।
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0:25 - 0:28हाँ, सैकड़ों लोगों को सदियाँ लग गई
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0:28 - 0:30इसे यह रूप देने में।
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0:30 - 0:33और यह सहकार्य का लंबा इतिहास ही
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0:33 - 0:36इसे एक उत्तम वस्तु बनाता है।
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0:36 - 0:38पेंसिल की कहानी
ग्रेफाइट से शुरू होती है। -
0:38 - 0:41लोगों ने इस नए पदार्थ के
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0:41 - 0:43उपयोगी अनुप्रयोगों की खोज की।
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0:43 - 0:45उन्होंने इसे छोटी छड़ों में काट लिया
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0:45 - 0:48और इसे धागे या भेड़ की खाल
या कागज़ में लपेट दिया -
0:48 - 0:50और इसे लंदन की गलियों में बेचा
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0:50 - 0:52लिखने या चित्र बनाने के काम के लिये।
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0:52 - 0:54कई बार,
किसानों और चरवाहों को भी बेचा गया, -
0:54 - 0:56जो इससे जानवरों पर
निशान लगाते थे। -
0:56 - 0:57फ्रांस में,
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0:57 - 1:01निकोलस-जैक्स कॉन्टे ने ग्रेफाइट पीसने का
तरीका खोजा, -
1:01 - 1:05उसे चिकनी मिट्टी
और पानी के साथ मिलाया। -
1:05 - 1:08उसके बाद, इस लेई को साँचे में डाला
और उसे भट्ठी में पकाया, -
1:08 - 1:11और नतीजतन
ग्रेफाइट बहुत मज़बूत बन गया -
1:11 - 1:14जो कि टूटता नहीं था,
चिकना था, इस्तेमाल में-- -
1:14 - 1:17उस दौर में मौजूद
किसी भी चीज़ से कहीं बेहतर था, -
1:17 - 1:21और आज भी, पेंसिल बनाने में
यही तरीका काम आता है। -
1:21 - 1:25इस बीच, अमेरिका में,
मैसाचुसेट्स के कॉनकॉर्ड में, -
1:25 - 1:28हेनरी डेविड थोरो ने ग्रेडिंग स्केल बनाया
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1:28 - 1:30पेंसिल की
विभिन्न प्रकार की कठोरता के लिये। -
1:30 - 1:32इसे एक से चार में वर्गीकृत किया,
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1:32 - 1:35सामान्य उपयोग के लिये
नंबर दो आदर्श कठोरता थी। -
1:35 - 1:38पेंसिल जितनी नर्म होगी,
उसमें ग्रेफाइट उतना अधिक होगा, -
1:38 - 1:40और उसकी लिखायी
उतनी गहरी और साफ़ होगी। -
1:41 - 1:44पेंसिल जितनी सख्त होगी,
उसमें मिट्टी उतनी ज़्यादा होगी -
1:44 - 1:46और उसकी लिखायी उतनी ही हल्की और पतली होगी।
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1:47 - 1:50मूलरूप से, जब पेंसिल हाथ से बनती थी,
वह गोल होती थी। -
1:50 - 1:51उन्हें बनाने का आसान तरीका नहीं था,
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1:51 - 1:55और यह अमेरिकी ही थे
जिन्होंने इस कला का मशीनीकरण किया। -
1:55 - 1:57कई लोग जोसेफ़ डिक्सन को श्रेय देते हैं
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1:57 - 2:00उन प्रथम अन्वेषक में से एक होने का
जिन्होंने असली मशीनों का विकास किया -
2:00 - 2:04लकड़ी की पतली पट्टी काटने,
लकड़ी में छेद करने के लिये, -
2:04 - 2:06उन पर गोंद लगाने को...
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2:06 - 2:08और उन्होंने तरीका खोजा
इसे आसान बनाने और बरबादी कम करने का। -
2:08 - 2:10पेंसिल को षट्कोण बनाने का,
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2:10 - 2:12जो कि उसका मानक बन गया।
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2:13 - 2:14पेंसिल के शुरूआती दिनों से ही,
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2:14 - 2:16लोगों को पसंद था कि
इससे लिखा मिट जाता है। -
2:18 - 2:20मूलरूप से, ब्रेड के टुकड़े
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2:20 - 2:22पेंसिल का लिखा मिटाने के लिये
लगाये जाते थे -
2:22 - 2:23और बाद में, रबर और झांवा।
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2:24 - 2:27रबड़ को जोड़ने का काम 1858 में हुआ,
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2:27 - 2:31हाईमन लिपमैन ने पहली पेंसिल पेटेंट करवायी
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2:31 - 2:32जिसमें रबड़ लगा था,
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2:32 - 2:34जिसने पेंसिल के मायने ही बदल दिये।
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2:35 - 2:38दुनिया की पहली पीली पेंसिल
कोह-इ-नूर 1500 थी। -
2:38 - 2:40कोह-इ-नूर ने अजीब प्रयोग किया
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2:40 - 2:43उन्होंने पेंसिल पर पीले पेंट की
14 परतें चढ़ा दी -
2:43 - 2:45और उसे 14-कैरट सोने में डुबो दिया।
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2:45 - 2:47सबके लिये अलग तरह की पेंसिल थी
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2:47 - 2:49और हर पेंसिल की अपनी कहानी है।
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2:50 - 2:54ब्लैकविंग 602 प्रसिद्ध है
क्योंकि बहुत से लेखक इसे काम में लाते हैं, -
2:54 - 2:57ख़ासतौर पर जॉन स्टीनबेक
और व्लादिमीर नबोकोव। -
2:57 - 3:00और फिर, आपके पास डिक्सन पेंसिल कंपनी है।
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3:00 - 3:03उन्होंने डिक्सन टिकॉन्डेरोगा दी।
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3:03 - 3:04यह एक आइकन है,
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3:04 - 3:05पेंसिल से यही याद आती है
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3:05 - 3:07स्कूल से यही याद आती है।
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3:07 - 3:09और मैं सोचती हूँ
पेंसिल सचमुच एक ऐसी चीज़ है, -
3:09 - 3:11एक औसत उपभोक्ता
कभी नहीं सोचता, -
3:11 - 3:14यह कैसी बनी या क्यों बनी
जैसी वह है, -
3:14 - 3:16क्योंकि यह हमेशा से ऐसा ही रही है।
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3:16 - 3:18मेरे विचार से, कुछ नहीं किया जा सकता
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3:19 - 3:23पेंसिल को इससे बेहतर बनाने के लिये।
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3:24 - 3:25यह उत्तम है।
- Title:
- पेंसिल उत्तम क्यों है
- Speaker:
- कैरोलिन वीवर
- Description:
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पेंसिल का आकार षट्कोण क्यों होता है, और उन्हें अपना विशेष पीला रंग कैसे मिला? पेंसिल की दुकान की मालिक कैरोलिन वीवर हमें पेंसिल का दिलचस्प इतिहास बता रही हैं।
- Video Language:
- English
- Team:
closed TED
- Project:
- TED Series
- Duration:
- 03:39
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Omprakash Bisen approved Hindi subtitles for Why the pencil is perfect | |
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Omprakash Bisen accepted Hindi subtitles for Why the pencil is perfect | |
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Omprakash Bisen edited Hindi subtitles for Why the pencil is perfect | |
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Purnima Pandey edited Hindi subtitles for Why the pencil is perfect |