क्यों हिंसा शहरों में समूह बनाती है -- और इसे कैसे घटाएं
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0:01 - 0:04आप एक ट्रॉमा सर्जन हैं,
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0:04 - 0:07जो शहर के आपातकालीन सेवा में आधी रात की
शिफ्ट पर काम करते है। -
0:08 - 0:10एक नौजवान को आपके सामने लाया जाता है,
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0:10 - 0:12जो की स्ट्रेचर पे बेहोश पड़ा है
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0:12 - 0:15उसे पैर पर गोली लगी है
और बहुत खून बह रहा है। -
0:16 - 0:18बहरी और भीतरी घाव को देख कर
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0:18 - 0:20और रक्तस्राव की मात्रा को देखकर
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0:20 - 0:22ये लग रहा है की गोली पैर की धमनी
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0:22 - 0:25जो शरीर की सबसे बड़ी धमनियों में से एक
को काट चुकी है। -
0:25 - 0:28उस नौजवान के डॉक्टर होने के नाते
आपका क्या करना सही होगा ? -
0:28 - 0:31या ये कहा जाये, आपको सबसे पहले
क्या करना चाहिए ? -
0:32 - 0:36आप गौर करते हैं की उस जवान लड़के ने फ़टे
पुराने कपडे पहने हुए हैं। -
0:36 - 0:37वो बेरोज़गार , बेघर या काम पढ़ा लिखा
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0:37 - 0:39हो सकता है।
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0:40 - 0:43तो क्या आप उसका इलाज उसे एक नौकरी दिलवाकर
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0:43 - 0:44एक फ्लैट दिलवाकर या
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0:44 - 0:46उसे GED प्राप्त करने में मदत देकर करेंगे ?
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0:47 - 0:48दूसरी तरफ ,
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0:48 - 0:51ये इंसान किसी झगडे में शामिल हुआ है और
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0:51 - 0:52शायद खतरनाक हो सकता है।
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0:52 - 0:54उसके होश में आने से पहले
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0:54 - 0:55क्या आप उसे ज़ंजीर से बाँध देंगे
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0:55 - 0:58और अस्पताल को खबर देकर
क्या 911 को फ़ोन करेंगे ? -
1:00 - 1:03हम में से ज़्यादातर इनमे से कोई भी
काम नहीं करेंगे। -
1:03 - 1:05इसके बजाये हम सिर्फ समझदारी और इंसानियत
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1:05 - 1:08भरा कदम उठाएंगे।
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1:09 - 1:11सबसे पहले खून का बहना रोकेंगे।
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1:11 - 1:13क्यूंकि जब तक खून बहना नहीं रुकता तब तक
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1:13 - 1:16और कुछ भी मायने नहीं रखता।
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1:17 - 1:21जो कदम आपातकालीन सेवा में सही हैं वो
दुनिया के बाकी सारे शहरों में भी है -
1:21 - 1:26जब बात शहरी हिंसा की होती है , सबसे पहली
प्राथमिकता होती है जानें बचाना -
1:26 - 1:29उस हिंसा का उसी तात्कालिकता के साथ इलाज
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1:29 - 1:31करना, जिस तरह एक गोली की चोट का इलाज
किया जाएगा एक ER में। -
1:32 - 1:36"शहरी हिंसा" कहते वक़्त हम
किस बारे बात कर रहे हैं ? -
1:36 - 1:40शहरी हिंसा वह घातक हिंसा या घातक होने की
क्षमता रखने वाली हिंसा है -
1:40 - 1:42जो की हमारी सड़कों पर देखने को मिलता है
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1:42 - 1:43इसके कई और नाम हैं :
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1:43 - 1:45सड़क हिंसा, युवा हिंसा
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1:45 - 1:47गिरोह हिंसा, बन्दूक हिंसा
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1:48 - 1:50शहरी हिंसा हम में से सबसे वंचित
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1:50 - 1:54और समाज से बेदखल किये गए
लोगो के साथ होता है -
1:54 - 1:55इनमे ज़्यादातर जवान लड़के होते हैं,
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1:55 - 1:58जिनके पास ज़्यादा विकल्प या आशा नहीं होती।
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1:59 - 2:02मैंने ऐसे सैकड़ों नौजवानो के साथ कई घंटे
बिताये हैं -
2:02 - 2:05मैंने उन्हें वाशिंगटन डी सी के
विद्यालय में पढ़ाया था -
2:05 - 2:07जहाँ मेरे एक छात्र की हत्या की गयी
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2:07 - 2:10मैं न्यू यॉर्क शहर के
कटघरों में खड़ा हुआ हूँ, -
2:10 - 2:12जहाँ मैंने एक प्प्रॉसिक्यूटर का पर
काम किया -
2:12 - 2:13और आखिरकार,
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2:13 - 2:17मैं एक शहर से दुसरे शहर एक नीति निर्माता
और शोधकर्ता के तौर पर घूमा हूँ जहाँ -
2:17 - 2:19जहाँ मैं इन नौजवानो से मिला और
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2:19 - 2:22इनके साथ अपने समाज को सुरक्षित बनाने
के तरीकों पर बात चीत की -
2:25 - 2:27हमे इन नौजवानो की चिंता क्यों करनी चाहिए ?
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2:28 - 2:30शहरी हिंसा क्यों मायने रखती है ?
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2:31 - 2:32शहरी हिंसा मायने रखती है,
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2:32 - 2:35क्यूंकि अमेरिका में किसी भी शहरी हिंसा
किसी भी दुसरे प्रकार के -
2:35 - 2:38हिंसा से ज़्यादा जानें लेता है।
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2:39 - 2:40शहरी हिंसा इसलिए भी मायने
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2:40 - 2:43रखती है क्यूंकि हम इसके बारे कुछ करने क
ताकत रखते हैं. -
2:43 - 2:46इसे काबू करना नामुमकिन नहीं है जैसा की
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2:46 - 2:48काफी लोगों का मानना है।
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2:48 - 2:52दरसल , इसके लिए आज ऐसे कई तरह के
उपाय मौजूद हैं जो की -
2:52 - 2:53असरदार साबित हुए हैं।
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2:54 - 2:58और इन सभी उपायों में एक सामान सामग्री है
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2:59 - 3:02ये सब इस बात को मानते हैं की शहरी हिंसा
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3:02 - 3:04चिपचिपी है यानी की ये लोगों और जगहों
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3:04 - 3:08में छोटे समूह बनती है
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3:09 - 3:11उद्धरण के लिए न्यू ओर्लांस में ,
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3:11 - 3:13700 से भी कम लोगों के एक संजाल का
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3:13 - 3:17शहर के ज़्यादातर हिंसक घटनाओं में हाथ है।
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3:17 - 3:19कुछ इन लोगों को "हॉट पीपल" कहते हैं।
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3:20 - 3:21यहाँ बोस्टन में ,
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3:21 - 3:2270 प्रतिशत शूटिंग्स ,
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3:22 - 3:27शहर के सिर्फ 5 प्रतिशत ब्लॉकों और कोनों
में केंद्रित है। -
3:28 - 3:31इन जगहों को अक्सर "हॉट स्पॉट्स" के नाम
से जाना जाता है। -
3:31 - 3:33हर शहर में, ज़्यादातर होने वाली
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3:33 - 3:36घातक हिंसा के लिए यही
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3:36 - 3:39हॉट पीपल और हॉट स्पॉट्स ज़िम्मेदार होते हैं
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3:39 - 3:42यहाँ तक की, ये खोज इतनी बार
दोहराया जा चुका है -
3:43 - 3:47की शोधकर्ता इस घटना को लॉ ऑफ़ क्राइम
कंसंट्रेशन का नाम दे चुके हैं। -
3:47 - 3:52जब हम इसके पीछे के विज्ञान को समझते हैं तब
पाते हैं की स्टिकी सोलूशन्स सबसे कारगर हैं -
3:53 - 3:54सीधे शब्दों में कहें तो,
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3:54 - 3:58आप शूटिंग्स तब तक नहीं रोक सकते जब तक आप
शूटर्स के बारे कुछ नहीं कर लेते -
3:59 - 4:02और आप तब तक हत्यायों को नहीं रोक सकते जब
तक आप वहां नहीं जाते लोगों की हत्या हुई है -
4:04 - 4:05चार साल पहले
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4:05 - 4:07मैंने और मेरे सहकर्मियों ने अहिंसक
रणनीतियों पर एक -
4:07 - 4:09व्यवस्थित मेटा-रिव्यु किया था,
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4:09 - 4:15जिसमे 1400 से ज़्यादा व्यक्तिगत प्रभाव के
मूल्यांकन के नतीजों का सारांश निकाला गया -
4:16 - 4:18हमनें बार बार यही पाया की जो राणीनित्यां
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4:18 - 4:21सबसे ज़्यादा केंद्रित,
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4:21 - 4:22सबसे ज़्यादा लक्षित,
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4:22 - 4:24और सबसे स्टिकी थीं वे
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4:24 - 4:26सबसे कारगर रहीं
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4:26 - 4:27हमने इससे अपराध विज्ञान
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4:27 - 4:31पोलिसिंग के अध्ययन, गिरोह निवारण और उसकी
उसकी पुनः जांच में भी देखा, -
4:31 - 4:34लेकिन हमनें इसे लोक स्वास्थय में भी देखा,
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4:34 - 4:37जहाँ तृतीया और द्वितीय
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4:37 - 4:40ने सामान्य मुख्य निवारण से ज़्यादा
अच्छा प्रदशन दिखाया। -
4:41 - 4:45जब नीति निर्माता सबसे खतरनाक लोगों और
जगहों पे ध्यान देते हैं। -
4:45 - 4:47तब उन्हें बेहतर परिणाम मिलते हैं
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4:48 - 4:52हो सकता है आप पूछें प्रतिस्थापन और
विस्थापन के बारे क्या -
4:52 - 4:55खोज दिखता है की जब ड्रग डीलरों को जेल में
डाल दिया जाता है -
4:55 - 4:59तब नए डीलर्स पुराने डीलर्स की जगह ले लेते हैं,
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4:59 - 5:03कुछ को इस बात की चिंता होती है की जब
पुलिस उनकी कुछ ख़ास जगहों पर -
5:03 - 5:04ज़्यादा ध्यान देती है तब,
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5:04 - 5:07अपराध उन जगहों से निकलकर सड़कों पे आ
जायेगा -
5:07 - 5:12सौभागय से हमे पता है की स्तिक्किनेस्स की
घटना के कारण -
5:12 - 5:16इन स्टिकी रणनीतियों से जुड़े हुए ,
प्रतिस्थापन और विस्थापन के प्रभाव -
5:16 - 5:17न के बराबर हैं ,
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5:18 - 5:21एक शूटर बनने के लिए जीवन भर के ट्रॉमा की
ज़रुरत होती है -
5:21 - 5:24स्पॉट बनाने के लिए दशकों का विनिवेश।
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5:25 - 5:28तो ये लोग और जगह इतनी
आसानी से इधर उधर नहीं होते -
5:32 - 5:33तो मूल कारणों के बारे क्या ?
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5:34 - 5:37क्या गरीबी या असमानता या अवसरों की कमी
के बारे कुछ करना हिंसा को हटाने का -
5:37 - 5:39का सबसे अच्छा उपाय नहीं होगा ?
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5:40 - 5:41विज्ञानं के अनुसार इसका जवाब
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5:41 - 5:43दोनों हाँ और न है ,
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5:43 - 5:46हाँ, क्यूंकि हिंसा के ऊंचे दर स्पष्ट रूप
से -
5:46 - 5:50सामाजिक और आर्थिक नुक़्सानो से जुड़ा हुआ है
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5:50 - 5:52लेकिन चूंकि इन चीज़ों में बदलाव
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5:52 - 5:55लाने से ये ज़रूरी नहीं है की ये हिंसा में
भी बदलाव आएं -
5:55 - 5:57खासकर छोटी दौड़ में तो बिलकुल भी नहीं
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5:57 - 5:59गरीबी के उधार को मान कर चलिए,
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5:59 - 6:03गरीबी के ऊपर जीत हासिल
करने में कई दशक लग जाएंगे , -
6:03 - 6:07जबकि गरीबों को हिंसा से छुटकारा अभी मिलना
चाहिये और ये उनका हक़ भी है -
6:07 - 6:11साथ ही मूल वजहें स्तिक्किनेस्स की घटना को
नहीं समझा सकती -
6:11 - 6:13अगर गरीबी हमेशा हिंसा को बढ़ावा देती तो
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6:13 - 6:16हमें सारे गरीब लोगों में हिंसा दिखाई देनी
चाहिए। -
6:17 - 6:18लेकिन हमें ऐसा नहीं दिखता।
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6:18 - 6:24बल्कि, हम अनुभव से पाते हैं की गरीबी के
केंद्रित होने के -
6:24 - 6:26साथ ही अपराध भी केंद्रित होता चला जाता है
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6:26 - 6:28और हिंसा सबसे ज़्यादा केंद्रित होती है।
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6:29 - 6:31इसलिए स्टिकी सोल्यूशन्स कारगर हैं।
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6:32 - 6:35ये इसलिए कारगर हैं क्यूंकि ये पहले ज़्यादा
ज़रूरी चीज़ें करते हैं। -
6:36 - 6:37और ये ज़रूरी है ,
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6:37 - 6:39क्यूंकि चाहे हिंसा एक तरफ गरीबी को बढ़ावा
देती हो -
6:39 - 6:44सबूत ये दिखाते हैं की हिंसा गरीबी को
बढ़ावा देती है। -
6:45 - 6:46एक उदाहरण इस बात को समझा सकता है ,
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6:46 - 6:49जैसा की समाजशास्त्री पैट्रिक शार्के ने
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6:49 - 6:50पाया, की जब गरीब बच्चों को
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6:50 - 6:55हिंसा देखनीपड़ती है.
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6:55 - 6:56वे बहूत घबरा जाते .
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6:56 - 6:59इससे उनकी नींद , व्यावहारिक जीवन, सोचने
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6:59 - 7:02समझने , और सीखने की क्षमता पर असर होता है
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7:02 - 7:04और अगर गरीब बच्चे सीख न पाएं तो वे
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7:04 - 7:06स्कूल में अच्छे नतीजे नहीं दे पाएंगे।
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7:06 - 7:11और इससे आगे चलकर उनकी कमाई पे असर
होता है जो कि उनकी गरीबी से दूर होने का -
7:11 - 7:13एक ज़रिया है।
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7:13 - 7:16दुर्भाग्य से, अर्थशास्त्री राज शेट्टी की
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7:16 - 7:18ऐतिहासिक अध्ययन की श्रृंख्ला में पाया
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7:18 - 7:20गया की हमने हर समय यही होते हुए देखा है।
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7:21 - 7:25गरीब बच्चे जिन्हे बचपन में हिंसा का सामना
करना पड़ता है उनकी आय की गतिशीलता उन -
7:25 - 7:27से कम होती है जो शांत माहौल में बड़े हुए।
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7:28 - 7:31हिंसा बच्चों को गरीबी के चपेट से निकलने
नहीं देती है। -
7:31 - 7:37इसी लिए ये ज़रूरी है की हम शहरी हिंसा के
बारे में कुछ करें। -
7:37 - 7:39चलिए दो उदाहरणों पर गौर करें।
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7:39 - 7:42यहाँ बोस्टन में , 1990 के आस पास
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7:42 - 7:44पुलिस और समाज के लोगों के बीच एक साझेदारी
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7:44 - 7:48की वजह से युवा हत्याओं में
कमाल की 63 प्रतिशत की कमी पायी गयी। -
7:48 - 7:51ओकलैंड में भी उसी रणनीति की वजह से
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7:51 - 7:55बन्दूक से होनेवाले गैर जानलेवा हमलो में
55 प्रतिशत कमी हुई। -
7:55 - 7:59सिनसिनाटी, इंडिआनापलिस, एवं नई हैवन में
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7:59 - 8:01ऐसी घटनाओं में एक तिहाई की कटौती हुई।
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8:01 - 8:03सीधे तरीके से कहा जाये तो ये रणनीति बस
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8:03 - 8:08लोगों को पहचानने में मदद करती है जो की या
तो किसी और को गोली मार सकते हैं या तो खुद -
8:08 - 8:09उसका शिकार बन सकते हैं
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8:09 - 8:12और फिर उन्हें सहानुभूति और जवाबदेही का
दोहरा -
8:12 - 8:14सन्देश देती है।
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8:14 - 8:17" हमें पता है की तुम गोली चला रहे हो ये
सब रुक -
8:17 - 8:19जाना चाहिए।
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8:19 - 8:21अगर तुम चाहो तो हम तुम्हारी मदद कर सकते
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8:22 - 8:24है ,हम तुम्हे ये सब करने से रोक सकते हैं "
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8:25 - 8:28जो बदलना चाहते हैं उन्हें सेवाएं और समर्थन
प्रदान किया जाता है। -
8:29 - 8:31जो अपना हिंसक बर्ताव जारी रखना चाहते हैं
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8:31 - 8:34उनपर कानून के माध्यम से
न्याय के लिए करवाई होती है। -
8:35 - 8:40शिकागो में , एक दुसरा प्रोग्राम
कॉग्निटिव बहवोरिअल थेरेपी का इस्तेमाल -
8:40 - 8:41करता है युवाओं को मुश्किल विचारों
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8:41 - 8:44और संवेदनाओं का सामना करने में मदद करता
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8:44 - 8:47है उन्हें झगडे काम और नहीं करना सीखाकर।
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8:47 - 8:50इस प्रोग्राम ने हिंसक जुर्म की गिरफ़्तारी
को 50 प्रतिशत घटाने में -
8:50 - 8:52सफलता हासिल की।
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8:52 - 8:55ऐसी रणनीतियों के इस्तेमाल से किसी के
फिर से अपराध -
8:55 - 8:57करने जैसी घटनाएं 50 प्रतिशत घट गयी।
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8:57 - 8:59अब शिकागो ने एक नयी प्रयास की है जिसमे
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8:59 - 9:01वही तकनीकों का इस्तेमाल किया
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9:01 - 9:03गया है उनके लिए जो बन्दूक हिंसा
के ज़्यादा जोखिम मे है -
9:03 - 9:06और यह प्रोग्राम हमें काफी अच्छे नतीजे
दिखा रहा है। -
9:07 - 9:09साथ ही,
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9:09 - 9:12चूंकि ये रणनीतियां इतनी केंद्रित, और
लक्षित हैं, इनपे हमें -
9:12 - 9:14ज़्यादा खर्च भी नहीं करना पड़ता है। और ये उन
कानूनों -
9:15 - 9:17के साथ काम करती हैं जो की
पहले से ही किताबों में दर्ज हैं। -
9:19 - 9:20तो ये थी अच्छी खबर।
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9:21 - 9:23हम अपने शहरों में शान्ति ला सकते हैं,
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9:23 - 9:25अभी,
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9:25 - 9:26बिना ज़्यादा खर्च किये
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9:26 - 9:28और बिना किन्ही नए कानूनों के.
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9:30 - 9:32तो ये अब हुआ क्यों नहीं है ?
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9:33 - 9:36क्यों अब तक ये उपाय सिर्फ कुछ ही छोटे
शहरों में अपने गए हैं ? -
9:36 - 9:40क्यों य इतने कारगर होने के बावजूद सहयोग
पाने के लिए इतने मुश्किलों -
9:40 - 9:41का सामना करते हैं ?
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9:42 - 9:44एक बुरी खबर भी है।
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9:44 - 9:47सच्चाई ये है की हमनें स्टिकी घटनाओं
को अच्छी तरह आयोजित में -
9:47 - 9:50अपना पूरा ज़ोर नहि लगाया है।
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9:50 - 9:53इस बात के तीन मुख्या कारन हैं की क्यों हम
शहरी हिंसा को काम करने -
9:53 - 9:55के मामले में सबूतों पर ध्यान नहीं देते।
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9:55 - 9:58सबसे पहले, जैसा की आप समझ ही गए होंगे
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9:58 - 9:59है राजनीती।
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10:00 - 10:04ज़्यादातर स्टिकी उपाय किसी एक या किसी
दुसरे राजनीतिक मंच के अनुरूप नहीं होता है -
10:04 - 10:08बल्कि ये गाजर और लाठी दोनों का प्रस्ताव
करते हैं, -
10:08 - 10:11इलाज के वादे और गिरफ़्तारी के वादे के साथ,
स्थान आधारित निवेश -
10:11 - 10:14और हॉट स्पॉट नीति का आयोग करते हैं।
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10:14 - 10:16दुसरे शब्दों में
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10:16 - 10:19ये उपाय दोनों एक ही समय पे
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10:19 - 10:21नरम एवं सख्त हैं।
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10:22 - 10:23क्यूंकि ये दोनों एक साथ अच्छे से
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10:23 - 10:27मेल नहीं खाते क्यूंकि राजनेता पूरा समय
सिर्फ लेफ्ट और राइट के बारे बातें करते हैं -
10:27 - 10:31वे कभी इन विचारों की तरफ कदम नहीं उठाएंगे
चाहे उन्हें कितना भी शिक्षित किया जाए या -
10:32 - 10:33दबाव डाला जाए।
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10:34 - 10:35ये आसान नहीं होगा लेकिन,
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10:35 - 10:38के प्रति राजनीति को डाल सकते हैं हिंसा
को एक जीती -
10:38 - 10:42जा सकने वाली बहस नहीं बल्कि एक हल की जाने
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10:42 - 10:45वाली एक समस्या के रूप में देखकर
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10:45 - 10:47हमें विचारधारा के बजाये सबूतों का इस्तेमाल
करना चाहिए -
10:47 - 10:50ये देखने के लिए की हमारे लिए क्या अच्छा
होगा। -
10:51 - 10:54दूसरी वजह की क्यों हम सबूतों पर ध्यान
नहीं देते हैं -
10:54 - 10:57है इन उपायों का जटिल स्वाभाव।
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10:57 - 10:59यहां एक व्यंग्य है।
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10:59 - 11:02हिंसा को रोकने के सबसे आसान तरीके कौन से
हैं ? -
11:03 - 11:04ज़्यादा पुलिस कर्मी।
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11:04 - 11:06ज़्यादा नौकरियां।
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11:06 - 11:07कम बंदूकें।
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11:08 - 11:10कहना तो आसान हैं
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11:10 - 11:13लेकिन करना मुश्किल।
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11:13 - 11:14दूसरी तरफ ,
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11:14 - 11:17शोध से पाए गए उपायों को समझाना मुश्किल है
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11:17 - 11:19लेकिन उनके नतीजे बेहतर होते हैं।
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11:20 - 11:22अभी हमारे पास बहुत सारे प्रोफेसर हैं
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11:22 - 11:24जो हिंसा के बारे अकादमिक जौर्नलों मे
लिख रहे हैं -
11:24 - 11:27और ऐसे बोहोत लोग हैं जो की हमें सड़कों पे
सुरक्षित रखते हैं। -
11:28 - 11:29लेकिन हमारे पास संचार
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11:29 - 11:31की कमी है।
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11:31 - 11:35हमारी शोध और कामों में एक मज़बूत कड़ी नहीं
है। -
11:36 - 11:38और जब भी कोई शोध असल में काम करती है , तब
वह कड़ी -
11:38 - 11:40सिर्फ एक संयोग नहीं होती है।
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11:40 - 11:43ये सिर्फ तभी मुमकिन हो पता है जब कोई समय
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11:43 - 11:45निकलकर ध्यान से उस शोध का मतलब समझाता है।
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11:45 - 11:46की ये क्यों ज़रूरी है
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11:46 - 11:49और ये कैसे एक जगत में बदलाव ला सकती है।
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11:50 - 11:52हम शोध करने में काफी वक़्त ज़ाया करते हैं
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11:52 - 11:56लेकिन उसे छोटे हिस्सों में बांटें में नहीं
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11:56 - 12:00ताकि एक व्यस्त पुलिस कर्मी या समाज सेवक
उसे आसानी से समझ सके। -
12:03 - 12:05ये मानना मुहकिल हो सकता है लेकिन जाती
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12:05 - 12:08तीसरी वजह है जिसकी वजह से हिंसा कम करने के
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12:08 - 12:11लिए ज़्यादा काम नहीं हो पाए हैं।
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12:13 - 12:16शहरी हिंसा गरीब काले समुदायों में
ज़्यादातर पायी जाती है। -
12:17 - 12:21इस वजह से जो उन समुदायों में नहीं रहते वे
इन समस्याओं को आसानी से रफा दफा -
12:21 - 12:24कर देते हैं ये कहकर की ये
उनकी दिक्कत नहींहै। -
12:25 - 12:27ज़ाहिर सी बात है की ये गलत है.
-
12:27 - 12:30शहरी हिंसा सबके लिए एक मुश्किल है।
-
12:30 - 12:31सीधे तरीके से या नहीं भी ,
-
12:31 - 12:34हम उन सब गोली चलने की घटनाओ और
मौतों की कीमत -
12:34 - 12:36चुकाते हैं जो क हमारे शहरों में होती हैं।
-
12:36 - 12:40इसलिए हमें और तरीके ढूंढ़ने की ज़रुरत है
ताकि हम लोगों को रंग और वर्ग -
12:40 - 12:43की इन दीवारों को पार कर इस संघर्ष में
हिस्सा लें। -
12:44 - 12:47क्यूंकि हमें इन रणनीयतियों में ज़्यादा
साधनो की ज़रुरत नहीं है , -
12:47 - 12:49हमें नए सहयोगी दलों को
बढ़ावा नहीं देना होगा -
12:50 - 12:51हमें बस कुछ की ज़रुरत होगी।
-
12:51 - 12:53उन्हें बस ज़ोरदार होना होगा।
-
12:55 - 12:57अगर हम इन समस्याओं का समाधान निकल लें
-
12:57 - 13:00इन स्टिकी सोलूशन्स को उन जगहों तक फैलाएं
जहाँ उनकी ज़रुरत है, -
13:00 - 13:02हम हज़ारों जानें बचा पाएंगे।
-
13:04 - 13:06अगर जिन रणनीतियों के बारे में मैंने आज
-
13:06 - 13:11चर्चा की है, उनके देश के 40 सबसे हिंसक
शहरों में लागु किया जाए तो हम -
13:11 - 13:13अगले आठ सालों में 12000 से भी
-
13:13 - 13:15ज़्यादा जानें बचा पाएंगे।
-
13:17 - 13:18इसकी कीमत कितनी होगी ?
-
13:18 - 13:20एक साल में करीब 10 करोड़।
-
13:21 - 13:24ये सुनने में ज़्यादा लग सकता है , लेकिन
-
13:24 - 13:26असल में ये संख्या सालाना फ़ेडरल बजट
-
13:26 - 13:29के एक प्रतिशत हिस्से से भी कम है।
-
13:29 - 13:32रक्षा मंत्रालय इतना सिर्फ एक ऍफ़-35 फाइटर
जेट -
13:32 - 13:34पर खर्च कर देता है।
-
13:35 - 13:38लाक्षणिक तौर से देखा जाए तो चाहे बात एक
आदमी को गोली लगने की -
13:38 - 13:41हो या एक एक पूरा समुदाय जो की इन घावों
से चलनी हो या एक -
13:41 - 13:44देश जो की ऐसी ही समुदायों से भरा
-
13:44 - 13:46हुआ हो , सबका इलाज एक ही है।
-
13:46 - 13:50हर मामले में , इलाज करने का सबसे पहला कदम
होगा -
13:50 - 13:52खून का बहना बंद करना
-
13:56 - 13:57मुझे पता है की ये काम करेगा
-
13:58 - 14:00मुझे पता है क्यूंकि मैंने ये देखा है।
-
14:01 - 14:04मैंने बन्दूक धारियों को अपनी बंदूकें नीचे
रखते हुए -
14:04 - 14:07और दूसरों को भी करने का बढ़ावा देने में
अपनी ज़िन्दगी व्यतीत करते हुए देखा है -
14:07 - 14:11मैं उन घरों के सामने से गुज़रा हूँ जहाँ
गोलियों की शोर गूंजती थी -
14:11 - 14:13अभी वहां बच्चों को खेलते हुए देखता हूँ।
-
14:13 - 14:15मैं उन पुलिस वालों और उन समुदाय के सदस्यों
के साथ -
14:15 - 14:19बैठा हूँ जो पहले एक दुसरे से
नफरत करते थे मगर अब एक साथ काम करते हैं -
14:19 - 14:21और मैंने हर तरह के लोगों के साथ काम किया
-
14:21 - 14:23आप जैसे लोग, आख़िरकार
-
14:23 - 14:26इस संघर्ष में हिस्सा लेने के लिए
तैयार हो जाते हैं। -
14:26 - 14:28और इसलिए मुझे पता है की हम एक साथ मिलकर,
-
14:28 - 14:32इस मूर्ख संहार का अंत कर सकते हैं, और
करेंगे भी। -
14:33 - 14:34धन्यवाद
-
14:34 - 14:39(तालियां)
- Title:
- क्यों हिंसा शहरों में समूह बनाती है -- और इसे कैसे घटाएं
- Speaker:
- थॉमस अब्त
- Description:
-
अपराध अनुसंधानकर्ता और शिक्षक थॉमस अब्त का मानना है की अमेरिका में हिंसा को घटाना एक नामुमकिन और असभ्य चुनौती नहीं है जैसा की काफी लोग सोचते हैं। वो ये समझाते हैं की शहरी हिंसा किस तरह से "चिपचिपी" है -- यानी की ये बहुत छोटे लोगों और जगहों की संख्या में समूह बनाती है -- और हमें एक परिवर्तनात्मक और केंद्रित रणनीति दिखाते हैं जो की हमारे शहरों को अभी ज़्यादा सुरक्षित बना सकती ही वो भी बिना बड़े बजट या नए कानूनों के।
- Video Language:
- English
- Team:
closed TED
- Project:
- TEDTalks
- Duration:
- 14:51
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Arvind Patil approved Hindi subtitles for Why violence clusters in cities -- and how to reduce it | |
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Arvind Patil accepted Hindi subtitles for Why violence clusters in cities -- and how to reduce it | |
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Ruchika Tirkey edited Hindi subtitles for Why violence clusters in cities -- and how to reduce it | |
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