hindi
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0:04 - 0:07[घंटी]
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0:19 - 0:21बौद्ध धर्म में, हम यह सीखते हैं कि
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0:22 - 0:25हम जीवन के लिए
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0:25 - 0:29पर्याप्त परिस्थितियों
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0:31 - 0:33के साथ खुशी पा सकते हैं।
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0:33 - 0:36"पर्याप्तता का ज्ञान" नामक एक शिक्षा है।
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0:38 - 0:43जब हम सक्षम होते हैं निर्माण करने में,
भ्रातृत्व और भगिनीत्व का, -
0:43 - 0:44पिता-पुत्र के रिश्ते का,
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0:45 - 0:47शिक्षक-छात्र संबंध का,
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0:48 - 0:52भले ही हम कम शानदार कार चलाते हों,
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0:52 - 0:57भले ही हम कम स्वादिष्ट भोजन खाते हों,
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0:57 - 1:00हमारी खुशी तब भी उतनी ही होती है।
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1:08 - 1:12बौद्ध धर्म में,
हम पावन भूमि के बारे में बात करते हैं, -
1:12 - 1:14जो कि खुशी के प्रदेश का प्रतीक है।
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1:14 - 1:19प्लम विलेज में, हम वर्तमान क्षण
की पावन भूमि में रहने का अभ्यास करते हैं। -
1:19 - 1:22जीवन के सारे चमत्कार
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1:22 - 1:24पहचाने और संपर्क किये जा सकते है
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1:24 - 1:28यदि हम इस क्षण नामक घर आ सकें।
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1:29 - 1:31यदि हम निर्माण करना जानते हैं
भ्रातृत्व और भगिनीत्व का, -
1:31 - 1:34यदि हमें पोषित होते है,
भ्रातृत्व और भगिनीत्व से, -
1:34 - 1:37उससे उत्पन्न हुई खुशी से,
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1:37 - 1:41हम एक सादा
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1:41 - 1:44फिर भी संतुष्ट और सुखी जीवन जी सकते हैं।
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1:45 - 1:46जब हम एक सरल जीवन खुशहाली से जीना जानते हैं,
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1:46 - 1:51तब हम पृथ्वी ग्रह के
प्राकृतिक संसाधनों का शोषण नहीं करना चाहते -
1:51 - 1:52हम
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1:53 - 1:57तब पर्यावरण को प्रदूषित नहीं करते हैं,
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1:57 - 2:01और हम अपने पीछे एक विरासत छोड़ जाते हैं
हमारे बच्चों के लिए. -
2:01 - 2:05इसलिए, यह जानना कि
हमारे पास पहले से ही पर्याप्त है, -
2:05 - 2:07जो हमारे पास है उससे आसानी से संतुष्ट
होना, कम इच्छाएं और कम लालसाएं रखना, -
2:07 - 2:11यह जीने का एक तरीका है
जो ग्रह को बचा सकता है -
2:11 - 2:12और
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2:12 - 2:17हमारे बच्चों और पोते-पोतियों
के लिए बेहतर भविष्य छोड़ सकता है। -
2:18 - 2:19मैं देखता हूँ
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2:20 - 2:23वर्तमान में हमारे जीने का तरीका
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2:24 - 2:26विनाश करता है
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2:26 - 2:29न केवल प्रकृति का पर मानव जाति का भी।
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2:30 - 2:34मैंने सुना है कि यहाँ Bình Định में,
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2:34 - 2:38युवाओं में हिंसक अपराध
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2:38 - 2:41लगातार गंभीर होते जा रहे हैं।
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2:43 - 2:45अभी सुबह ही,
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2:45 - 2:47मुझे एक पत्र मिला।
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2:51 - 2:55इस पत्र में उन्होंने कहा, ''स्कूल में भी,
14 या 15 साल के छोटे बच्चे -
2:55 - 2:58गिरोह बनाते हैं,
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2:59 - 3:03और एक दूसरे के विरुद्ध आ जाते हैं
सड़क पर खूनी लड़ाइयों और हत्याओं के लिए।" -
3:03 - 3:06छोटी-छोटी बातों पर,
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3:06 - 3:08वे आसानी से चीखने चिल्लाने लगते हैं।
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3:10 - 3:13हाल ही में, सोमवार 4 अप्रैल, 2005 को,
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3:13 - 3:17एक ट्रुंग वुओंग सीनियर
हाई स्कूल में एक त्रासदी घटी। -
3:17 - 3:25एक सहपाठी की जन्मदिन पार्टी में मामूली सी
बात पर, वे चाकू और हंसिया लेकर स्कूल गए, -
3:25 - 3:27प्रतिद्वंद्वी सदस्यों का स्कूल के गेट
पर उपस्थित होने का इंतजार किया -
3:27 - 3:30और अपने सहपाठियों को
कई बार मृत्यु तक चाकू मार दिया। -
3:30 - 3:33ये हत्या का कृत्य क्रूर और निर्दयी था
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3:33 - 3:37जो केवल पेशेवर हत्यारी फिल्मों में पाया जाता था.
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3:41 - 3:46पश्चिम के साथ-साथ एशिया में भी,
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3:46 - 3:48औद्योगिक विकास
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3:49 - 3:53ने ऐसी सामाजिक बुराइयों को जन्म दिया है।
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3:53 - 3:54इसके अतिरिक्त,
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3:54 - 3:59आजकल के युवा फ़िल्मों, पत्रिकाओं और
मीडिया उत्पादों का अत्याधिक उपभोग करते हैं -
3:59 - 4:01जिनमें चित्रात्मक दृश्यों
द्वारा हिंसा और शत्रुता, -
4:01 - 4:05बदले के कार्य,
और कामुक छवियां प्रदर्शित की जाती है। -
4:05 - 4:08इसलिए हमारे बच्चों ने
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4:08 - 4:11आसानी से इच्छाओं
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4:11 - 4:13और हिंसा और आक्रामकता का सार
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4:13 - 4:15इन मीडिया उत्पादों की सामग्री
और छवियों से सीख लिया है -
4:15 - 4:20इसीलिए ये सामाजिक बुराइयाँ
वास्तविक जीवन में हमारे साथ घटित होती हैं। -
4:21 - 4:24बौद्ध धर्म में, हम यह सीखते हैं
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4:25 - 4:29कि हमें अपने शरीर,
हृदय और दिमाग की रक्षा करनी चाहिए। -
4:29 - 4:33जब हम खाते-पीते हैं तो हमें
सावधानी और ध्यान से खाना-पीना चाहिए -
4:33 - 4:35ताकि हम विषाक्त पदार्थ
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4:35 - 4:37अपने शरीर में न लाएं।
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4:37 - 4:43जब हम मीडिया उत्पादों का उपभोग करते हैं जैसे कि
किताबें, पत्रिकाएँ, फ़िल्में, वीडियो, फ़ोटो,..., -
4:43 - 4:47हमें इनका सेवन सोच-समझकर करना होगा।
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4:47 - 4:50यदि हम ऐसे मीडिया उत्पादों का सेवन करते हैं
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4:50 - 4:54जिनमें कामुक उत्तेजना जैसे विषाक्त पदार्थ
होते हैं, क्रोध, बदला लेने की चाहत, हिंसा, -
4:54 - 4:56तब
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4:56 - 4:59वे हमारे दिल और दिमाग
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4:59 - 5:02और हमारे बच्चों और पोते-पोतियों
के दिलों और दिमागों में जहर बन जाते हैं। -
5:02 - 5:05इसलिए पांचवे सचेतन प्रशिक्षण का अनुसरण
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5:06 - 5:09यानी सचेत उपभोग,
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5:09 - 5:12हमारे समाज को उन
सामाजिक कुरीतियों से बचाये रख सकता है। -
5:12 - 5:14इसीलिए
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5:14 - 5:18शाक्यमुनि बुद्ध ने
जो बातें सिखाईं उनमें से एक -
5:18 - 5:21जिसे हमें गंभीरता से लेना चाहिए
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5:21 - 5:24वह यह है कि हमें कभी भी अपने अंदर
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5:24 - 5:25हिंसा और आक्रामकता,
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5:25 - 5:27कामुक उत्तेजना और कामुक सुख,
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5:27 - 5:29क्रोध और बदला लेने की संभावनाओं
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5:29 - 5:32को उपभोग के माध्यम से मजबूत नहीं करना
चाहिए और उन बीजों को सींचना नहीं चाहिए। -
5:32 - 5:35इसीलिए
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5:35 - 5:38यदि हम वास्तव में
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5:38 - 5:40अपने बच्चों और
पोते-पोतियों की रक्षा करना चाहते हैं, -
5:40 - 5:43यदि हम वास्तव में
अपने समाज की रक्षा करना चाहते हैं, -
5:43 - 5:46तो हमें सचेतनता के मार्ग पर चलना होगा,
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5:46 - 5:51जिसका अर्थ है हर चीज़ का
उत्पादन और उपभोग सोच-समझकर करना। -
5:51 - 5:56यदि हम अपने समाज को
बद से बदतर नहीं होने देना चाहते -
5:56 - 5:59तो हमारे देश के शिक्षकों,
शिक्षाविशरदों और राजनेताओं को -
5:59 - 6:04इस बात पर विशेष ध्यान देना चाहिये।
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6:05 - 6:09मैं प्रश्नों के उत्तर देने के लिए
कुछ समय बचाने हेतु यहीं रुकना चाहूँगा।
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