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हाय, मैं हूँ एलेक्स।
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एक सस्टेनेबल जीवन के लिए हमें
इंसान के किन जरूरतों को पूरा करना होगा?
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दिलचस्प रूप से,
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सस्टेनेबिलिटी की अधिकांश परिभाषाएं
जरूरतों का उल्लेख करती हैं।
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१९८७ में संयुक्त राष्ट्र
के ब्रंटलैंड आयोग ने,
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सस्टेनेबल डिवेलप्मेंट
को परिभाषित किया
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विकास के रूप में, जो आज
की जरूरतों को पूरा करता है
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भावी पीढ़ियों की क्षमता
से समझौता किए बिना
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अपनी जरूरतों को
पूरा करने के लिए।
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पिछले वीडियो में हमने प्राकृतिक
विज्ञान का इस्तेमाल किया था
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यह देखने के लिए कि सस्टेनेबिलिटी
को परिभाषित किया जा सकता है
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पारिस्थितिक बाधाओं के भीतर इंसान के
जरूरतों को पूरा करने के रूप में।
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हमारे चार सस्टेनेबल सिद्धांतों में
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एक कहता है
एक सस्टेनेबल समाज में,
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लोग ऐसी परिस्थितियों के अधीन
नहीं होते हैं जो व्यवस्थित रूप से
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उनकी जरूरतों को पूरा करने की
उनकी क्षमता को कम करता है।
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तो ये जरूरतें क्या हैं?
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वे हमें सस्टेनेबल बनने में
कैसे मदद कर सकते हैं?
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आप मास्लो की "'ज़रूरतों के
पदानुक्रम" से परिचित हो सकते हैं।
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मैं इसके गहरायीं में नही जाऊँगा लेकिन
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यदि आप रुचि रखते हैं तो
ऑनलाइन कई संसाधन उपलब्ध हैं।
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और यहाँ इंसानी ज़रूरतों के
बारे में एक और दिलचस्प सिद्धांत है
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जिसे चिली के अर्थशास्त्री मैनफ्रेड
मैक्स नीफ ने विकसित किया था।
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उन्होंने १९९१ में ह्यूमन स्केल डेवलपमेंट
नामक पुस्तक प्रकाशित की
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जो यह दर्शाता है कि इंसान की
जरूरतें सीमित और वर्गीकरण योग्य हैं।
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इंसान की नौ मूलभूत जरूरतें हैं
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जो सभी इंसानी सभ्यता में एक जैसा हैं
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और ऐतिहासिक समय अवधि में भी।
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इन ज़रूरतों को पूरा करने के
तरीकों में क्या बदलाव होता है।
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तो इंसानो की ये नौ जरूरतें हैं
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जीवन निर्वाह:
हमें खाना, पानी, घर चाहिए,
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सुरक्षा: हमें रहने के लिए एक सुरक्षित जगह चाहिए,
सामाजिक सुरक्षा,
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भागीदारी: उन निर्णयों का हिस्सा बनना
जो हमारे जीवन को प्रभावित करता है,
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आलस्य: कुछ खाली समय, आराम,
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स्नेह: हमें चाहिए दोस्त, प्यार,
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समझ: सीखना, ध्यान करना,
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निर्माण: खाना बनाना, डिजाइन करना, आविष्कार करना,
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पहचान: अपनेपन की भावना,
खुद को जानना,
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और स्वतंत्रता: यह चुनने में सक्षम होना
कि हम अपना जीवन कैसे जीते हैं।
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हालाँकि ये ज़रूरतें रोमियों
या मूल निवासियों की तरह ही हैं
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जो हज़ारों साल पहले हुआ करती थीं,
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कुछ तरीकों से हम संतुष्ट करते हैं,
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जैसे, सुरक्षा, भागीदारी,
या स्वतंत्रता की हमारी ज़रूरत
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ये आज की तुलना में बहुत
अलग हो सकते हैं।
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जबकि कुछ संतुष्टकर्ता केवल
एक ज़रूरत को पूरा करते हैं,
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उदाहरण के लिए, बीमा
हमें सुरक्षा प्रदान करता है,
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कुछ एक साथ कई जरूरतों को पूरा करते हैं,
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जैसे, स्तनपान बच्चे की निर्वाह
की ज़रूरत को पूरा करने के साथ
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उन्हें सुरक्षा, स्नेह और पहचान भी देता है।
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इन्हें सहक्रियात्मक सन्तुष्टिकारक कहा जाता है।
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मैक्स नीफ अलग तरह के सन्तुष्टिकारक को भी
अलग करता है जिन्हें विध्वंसक कहा जाता है।
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जैसे कि एक ज़रूरत को पूरा करना
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जो हमें कई अन्य लोगों से मिलने से रोकता है।
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उदाहरण के लिए, सेंसरशिप हमारी सुरक्षा की
ज़रूरत को पूरा करने का दिखावा करती है
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लेकिन यह वास्तव में हमें
हमारी समझ, भागीदारी,
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सृजन, पहचान और स्वतंत्रता
की ज़रूरत को पूरा करने से रोकता है।
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कुछ झूठे सन्तुष्टिकारक होते हैं,
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उदाहरण के लिए, फैशन और रुझान
पहचान की झूठी भावना पैदा कर सकते हैं।
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और अंत में, मैक्स नीफ भी चार श्रेणियों में
सन्तुष्टिकारक को बाटा है:
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हम अपनी जरूरतों को कैसे पूरा करते हैं,
इस पर निर्भर करते हुए, अस्तित्व, होना, करना और बातचीत करना।
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