मैं सोचा करती थी जीवन का पूर्ण उद्देश्य प्रसन्नता का पीछा करना था। सभी ने कहा सफलता प्रसन्नता की राह थी, इसलिए मैंने ऐसी आदर्श नौकरी की खोज की, ऐसे सही प्रेमी की, ऐसे सुंदर अपार्टमेंट की। लेकिन कभी भी पूरी संतुष्ट महसूस करने की बजाय, मैं चिंतित और डाँवाँडोल रही। और मैं अकेली नहीं थी ; मेरे मित्र -- वे भी इसी से संघर्ष गुज़रे। आखिर, मैंने सकारात्मक मनोविज्ञान के लिए स्नातक स्कूल जाने का निर्णय लिया यह जानने के लिए कि वास्तव में लोगों को क्या खुश करता है? लेकिन मुझे वहां जो पता चला मेरी उसने जिंदगी बदल दी। आंकड़े बताते हैं कि खुशी का पीछा करना लोगों को दुखी कर सकता है। और वास्तव में जो मुझे सूझा वह यह था: दुनिया भर में आत्महत्या की दर बढ़ रही है, और हाल ही यह अमेरिका में 30 साल की उच्चतम दर तक पहुंची। हालांकि भौतिक परिपेक्ष में जीवन अच्छा हो रहा है लगभग हर कल्पनीय मानक द्वारा, अधिक लोगों को निराशा है, वे उदास और अकेले हैं। लोगों के लिए एक कष्टमय खालीपन है, लाक्षणिक दृष्टि से उदास महसूस करना जरूरी नहीं है। मुझे लगता है कि देर सवेर हम सभी को आश्चर्य होता है: क्या बस इतना ही है? और शोध अनुसार, इस निराशा का कारण प्रसन्नता का अभाव नहीं है। यह किसी और बात की कमी है, जीवन में अर्थ होने की कमी। इसने मेरे मन में कुछ प्रश्न पैदा कर दिए। क्या जीवन में प्रसन्न रहने से बढ़ कर कुछ और भी है? और अंतर क्या है प्रसन्न होने में और जीवन अर्थपूर्ण होने में ? कई मनोवैज्ञानिक प्रसन्नता को आराम और आसान परिस्थिति से परिभाषित करते हैं, उस पल अच्छा महसूस करने को। मतलब, हालांकि, गहरा है। प्रसिद्ध मनोविज्ञानी मार्टिन सेलिग्मन कहते हैं अर्थ लगाव होने से आता हैऔर अपने स्वार्थ से हट के कुछ सेवा कार्य करने से और आप के भीतर सर्वश्रेष्ठता लाने से। हमारी संस्कृति खुशी से ग्रस्त है, लेकिन मुझे पता चला कि अर्थ की चाह अधिक परिपूर्ण पथ है। और अध्ययनों से पता चलता है कि वे लोग जिनका जीवन अर्थपूर्ण है, वे अधिक लचीले होते हैं, वे स्कूल में और काम पर अच्छे होते हैं, और वे दीर्घायु भी होते हैं। तो इस सब ने मुझे आश्चर्यचकित किया : कैसे हम में से प्रत्येक अधिक अर्थपूर्ण रह सकता है ? पता लगाने के लिए, मैंने पांच साल सैकड़ों लोगों का साक्षात्कार करने में बिताए और हजारों पन्नों को पढ़ने में मनोविज्ञान के, तंत्रिका विज्ञान और दर्शन शास्त्र के इन सब को एकत्रित करके, मैंने पाया कि एक अर्थपूर्ण जीवन के चार स्तम्भ हैं। और हम सब अर्थपूर्ण जीवन निर्मित कर सकते हैं हमारे जीवन में इन स्तंभों में से कुछ या सभी का निर्माण करके। पहला स्तंभ संबंधित होना है। संबंध बनाने से लगाव होता है जहां आपका अपनी आंतरिक विशेषता के कारण मूल्याकन होता है और वहां आप दूसरों को भी महत्व देते हैं। लेकिन कुछ समूह और रिश्ते सस्तेपन का एहसास कराते हैं ; आपके विचारों से आप का मूल्याकन होता है, आप किससे नफरत करते हैं, इसलिए नहीं कि आप कौन हैं। सत्य लगाव प्रेम से हिलोरे लेता है। यह व्यक्तियों के बीच हर पल रहता है, और यह एक विकल्प है - आप चुन सकते हैं दूसरों के साथ संबंध बढ़ाने के लिए। यहाँ एक उदाहरण है हर सुबह, मेरा दोस्त जोनाथन एक समाचार पत्र खरीदता है न्यूयॉर्क में एक ही सड़क विक्रेता से। यद्यपि वे सिर्फ एक लेनदेन ही नहीं करते हैं। वे धीमे, बात करने के लिए एक क्षण लेते हैं, और मनुष्यों की तरह एक-दूसरे के साथ व्यवहार करते हैं। लेकिन एक बार, जोनाथन के पास खुले पैसे नहीं थे, और विक्रेता ने कहा, "इस बारे चिंता मत करो।" लेकिन जोनाथन ने भुगतान पर जोर दिया, तो वह दुकान में गया और उसने कुछ खरीदा जिसकी उसे ज़रूरत नहीं थी खुले पैसों के लिए। लेकिन जब उसने विक्रेता को पैसा दिया, विक्रेता ने इंकार किया । उसे दुःख हुआ। वह कुछ दयालु होने की कोशिश कर रहा था, लेकिन जोनाथन ने उसे अस्वीकार कर दिया था। मुझे लगता है हम सभी ऐसे ही छोटे तरीके से लोगों को मना करते हैं । मैं करती हूँ। मैं किसी परिचित के पास से बिना अभिवादन गुज़र जाती हूँ। मैं अपना फोन देखती हूँ जब कोई मेरे साथ बात कर रहा है। ये कार्य दूसरों को कम समझते हैं। वे उन्हें अदृश्य और अयोग्य महसूस कराते हैं। लेकिन जब आप प्यार से बढ़ते हो, आप एक सम्बन्ध बनाते हैं जो आप सब का मनोबल बढ़ाता है। कई लोगों के लिए अर्थ का सबसे आवश्यक स्रोत लगाव है, परिवार व दोस्तों के लिए रिश्तों का बंधन। दूसरों के लिए, अर्थ की कुंजी दूसरा स्तंभ है: उद्देश्य अब, अपना उद्देश्य ढूंढना वही बात नहीं है जैसे ऐसी नौकरी की तलाश जिससे आपको खुशी होती है। उद्देश्य आप जो पाना चाहते हैं उसके मुकाबले आप जो देते हैं एक अस्पताल संरक्षक ने बिमारों को ठीक करना उद्देश्य बताया। कई माता-पिता मुझे बताते हैं, "मेरा उद्देश्य मेरे बच्चों को पालन है।" उद्देश्य की कुंजी अपनी शक्तियों का उपयोग कर अन्य सेवा करना है। बेशक, हम में से कईयों के लिए, यह काम के माध्यम से होता है। इसी तरह हम योगदान करते हैं और ज़रूरत महसूस करते हैं। लेकिन इसका अर्थ यह भी है काम से हटाए जाना जैसे मुद्दे, बेरोज़गारी, कम श्रम बल भागीदारी - ये सिर्फ आर्थिक समस्याएं नहीं हैं, वे अस्तित्व की भी हैं। कुछ सार्थक करने के बिना, लोग अस्थिर होते हैं। बेशक, आपको काम पर उद्देश्य खोजने की जरूरत नहीं है, लेकिन उद्देश्य आपको जीने के लिए कुछ देता है, कुछ "क्यों" जो आपको अग्रेषित करता है अर्थ का तीसरा स्तंभ अपने स्वार्थ से परे आगे कदम के बारे में भी है, लेकिन पूरी तरह से अलग तरीके से: श्रेष्ठता। श्रेष्ठ परिस्थितियां वे दुर्लभ क्षण हैं जब आप दैनिक जीवन की हलचल से ऊपर उठे होते हैं, स्वयं का अस्तित्व ओझल हो जाता है, और आप एक उच्च वास्तविकता से जुड़ा हुआ महसूस करते हैं। एक व्यक्ति की श्रेष्ठ परिस्थिती अत्याधुनिक कला देखने से बनी दूसरे व्यक्ति के लिए, यह चर्च में था। मेरे लिए, मैं एक लेखिका हूं, यह लेखन के माध्यम से होता है। कभी-कभी मुझे देश काल का आभास तक नहीं रहता। ये उत्कृष्ट अनुभव आपको बदल सकते हैं। एक अध्ययन में छात्रों ने 200 फुट लम्बे नीलगिरि पेड़ो के ऊपर देखा एक मिनट के लिए। लेकिन बाद में उन्होंने आत्म-केंद्रित महसूस किया, और उन्होंने व्यवहार भी अधिक उदारता से किया जब उन्हें किसी की मदद करने का मौका दिया । लगाव, उद्देश्य, उत्कृष्टता अब, चौथा अर्थपूर्ण स्तंभ, मैंने पाया है, लोगों को आश्चर्यचकित करता है चौथा स्तंभ कहानी सुनाना है, आपकी अपनी कहानी जो आप स्वयं को सुनाते हो। अपने जीवन की घटनाओं से एक कथा बनाना स्पष्टता लाता है। यह आपको समझने में मदद करता है आप जो हो वह कैसे बने। पर हमें सदा एहसास नहीं होता कि हम हमारी कहानियों के लेखक हैं और हम अपने सुनाने के ढंग से बदल सकते हैं। आपका जीवन केवल घटनाओं की एक सूची नहीं है आप संपादन व व्याख्या कर सकते हैं व अपनी कथा पुनः सुना सकते हैं, भले ही आप तथ्यों से विवश हो। मैं एमेका नामक युवक से मिला जो फुटबॉल खेलते हुए अपंग हो गया था। अपनी चोट के बाद, एमेका ने खुद से कहा, "मेरा जीवन फुटबॉल खेलते हुए महान था, लेकिन अब मुझे देखो। " जो लोग इस तरह से कहानियां सुनाते हैं - "मेरा जीवन अच्छा था। अब यह बुरा है।" -- अधिक उत्सुक और उदास हो जाते हैं और कुछ समय के लिए एमेका ऐसा था। लेकिन समय के साथ, उसने एक अलग कहानी बनानी शुरू कर दी। उसकी नई कहानी थी, "चोट से पहले मेरी, मेरी ज़िंदगी निरुद्देश्य थी। मैंने बहुत कुछ किया और एक बहुत स्वार्थी आदमी था। पर मेरी चोट से मुझे लगा कि मैं एक बेहतर आदमी हो सकता था।" उसकी कहानी को उस संपादन ने एमेका के जीवन को बदल दिया। खुद को नई कहानी सुनाने उपरांत, एमेका ने बच्चों का मार्गदर्शन शुरू किया, और उसने पाया कि उसका उद्देश्य था: दूसरों की सेवा। मनोवैज्ञानिक दान मैकआडम इसे "मुक्ति कहानी" कहते हैं जहां अच्छाई द्वारा बुराई से मुक्ति मिल जाती है। उसे पता लगा है कि सार्थक जीवन जीने वाले लोग अपने जीवन बारे कहानियां सुनाते हैं मुक्ति, विकास और प्रेम से परिभाषित। लेकिन लोग अपनी कहानियों को कैसे बदलते हैं? कुछ लोग चिकित्सक से सहायता लेते हैं, लेकिन आप इसे स्वयं पर भी कर सकते हैं, सिर्फ अपने जीवन पर विचारपूर्वक प्रतिबिंबित करके, कैसे आपके परिभाषित अनुभवों ने आपको ढाला, तुमने क्या खोया, क्या पाया। एमेका ने यही किया। आप रातो रात अपनी कहानी नहीं बदलोगे; सालों साल लग सकते हैं और यह दर्दनाक हो सकता है। आख़िर, हम सब ने कष्ट झेला है, और हम सब संघर्ष करते हैं। पर उन दर्दनाक यादों को गले लगा हमें नई अंतर्दृष्टि व ज्ञान हो सकता है उस अच्छाई को ढूंढ़ने का जो हमें संभालता है। संबंध लगाव, उद्देश्य, श्रेष्टता, कहानी सुनाना: ये सार्थकता के चार स्तंभ हैं। जब मैं छोटी थी, चारों ओर से सभी स्तंभों द्वारा घिरी मैं बहुत भाग्यशाली थी। मेरे माता-पिता ने मॉन्ट्रियल में हमारे घर से सूफी सभा गृह चलाया। सूफीवाद एक आध्यात्मिक अभ्यास है जो झूमने से संबंधित है और कवि रूमी से। सप्ताह में दो बार, सूफ़ी हमारे घर आते ध्यान के लिए, फ़ारसी चाय पीने, और कहानियों को साझा करने। उनके अभ्यास में सभी सृजन की सेवा भी शामिल थी प्यार के छोटे कृत्यों के माध्यम से, अर्थ यह था दयालु होना चाहे जब लोगों ने आपसे गलत किया हो। लेकिन इसने उन्हें एक उद्देश्य दिया: अहंकार पर संयम के लिए। अंततः, मैंने कॉलेज के लिए घर छोड़ दिया और मेरे जीवन में सुफीवाद की दैनिक मूल-सिद्धांतों के बिना, मैं बेलगाम हो गई। और मैंने उन चीजों को खोजना शुरू किया जो जीवन को जीने योग्य बनाते हैं। इसी ने मुझे इस यात्रा पर लगा दिया। पीछे देख कर मुझे अब अहसास होता है कि सूफी गृह में अर्थपूर्ण वास्तविक संस्कृति थी। स्तम्भ वास्तुकला के हिस्से थे, और स्तम्भ उपस्थिति ने हम सब की अधिक गहराई से जीने में मदद की। बेशक, वही सिद्धांत लागू होता है अन्य मजबूत समुदायों में भी - - अच्छे और बुरे समुदायों में। गिरोह, संप्रदाय: ये अर्थपूर्ण संस्कृतियां हैं जो स्तंभों का उपयोग करती हैं और लोगों को कुछ जीने और मरने के लिए देती हैं। इसलिए हमें एक समाज के नाते बेहतर विकल्प प्रदान करने चाहियें। हमें इन स्तंभों को बनाने की ज़रूरत है हमारे परिवारों व संस्थानों में लोगों को स्वयं में सर्वश्रेष्ट बनने में मदद हेतु। लेकिन एक सार्थक जीवन जीने के लिए काम करना होता है। यह एक सतत प्रक्रिया है। जैसे-जैसे हर दिन बीतता है, हम सतत अपना जीवन निर्मित करते है, अपनी कहानी में जोड़ते हुए। और कभी-कभी हम पटरी से उतर सकते हैं। जब भी मेरे साथ ऐसा होता है, मैं अपने पिता संग घटित उस शक्तिशाली अनुभव को याद करती हूँ। मेरे कॉलेज से स्नातक करने के कई महीनों बाद, मेरे पिता को दिल का भयंकर दौरा पड़ा जिससे वह मर सकते था । वो बच गये, और जब मैंने उससे पूछा उनके दिमाग में क्या चल रहा था जब उसे मौत का सामना करना पड़ा, उन्होंने कहा कि वे जो सोच सके वो यह था कि वे जीना चाहते थे ताकि वे मेरे भाई के और मेरे पास हो सकें, और इसने उसे जीवन के लिए लड़ने हेतु इच्छाशक्ति दी। जब वो आपातकालीन सर्जरी के लिए बेहोश हुए, 10 से पीछे की गिनती के बजाय, उसने हमारे नामों को एक मंत्र की तरह दोहराया। उन्होंने चाहा कि पृथ्वी पर बोले उसके अंतिम शब्द हमारे नाम हों अगर वह मर जाये। मेरे पिता एक बढ़ई और सूफी हैं यह एक विनम्र जीवन है, लेकिन एक अच्छा जीवन। मौत का सामना करते लेटे हुए, उसके पास जीने का कारण था: मोहब्बत। अपने परिवार में उसकी लगाव भावना, एक पिता के रूप में उनका उद्देश्य, उनका उत्कृष्ट ध्यान, हमारे नाम दोहराना - ये, वह कहते है, ये कारण हैं कि वो क्यों बच गये। यह वह कहानी है जो वो स्वयं बताते है। यह अर्थ की शक्ति है खुशी आती और जाती है लेकिन जब जीवन वास्तव में अच्छा है और जब चीजें सचमुच खराब होती हैं, कुछ अर्थपूर्ण होने से उससे चिपके रहने का कारण बनता है। धन्यवाद। (तालियां)