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← हम आर्थिक संकटों के लिए व्यक्तियों को क्यों दोश देते हैं?

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Showing Revision 13 created 11/02/2020 by Arvind Patil.

  1. वह एक ठंडा, सूर्यवत मार्च का दिन था।
  2. मैं रीगा में सड़क के किनारे चल रही थी।
  3. मुझे याद है कि सर्दी
    धीरे-धीरे जा रही थी।
  4. अभी भी इधर उधर कुछ बर्फ थी,
  5. लेकिन फुटपाथ साफ और सूखा था।
  6. यदि आप रीगा में रहते हैं,
  7. आपको पता होगी वो राहत की भावना
  8. जो वसंत अपने आने के
    संकेत के तौर पर लाती है,
  9. और आपको सड़कों पर बर्फ और कीचड़ के
    उस घिनौने मिश्रण से नहीं गुज़रना पड़ता।
  10. तो मैं वहाँ हूँ,
    अपनी सैर का आनंद ले रही हूँ,
  11. जब अचानक मैं
    फुटपाथ पर एक स्टैंसिल देखती हूँ,
  12. एक भित्ति चित्र:
  13. इन गहरे धूसर ईंटों पर चित्रित सफेद अक्षर।
  14. वह कहती है,
  15. " आपकी ज़िम्मेदारी कहां है ?"
  16. उस प्रश्न ने मुझे
    मार्ग में रोक दिय।
  17. और जब मैं उसके अर्थ पर
    गौर करते हुए वहां खड़ी हूँ,
  18. तब मैं ध्यान देती हूँ कि मैं
    रीगा नगरपालिका के

  19. सामाजिक कल्याण विभाग के बाहर खड़ी हूँ।
  20. अतः एसा प्रतीत होता है कि
    इस भित्तिचित्र का लेखक, जो भी हो,
  21. यह सवाल सामाजिक सहायता के लिए
    आवेदन करने के लिए आने वाले
  22. लोगों से पूछ रहा है।
  23. उस सर्दी, मैं लातविया के वित्तीय
    संकट के परिणाम पर अनुसंधान कर रही थी।

  24. जब वैश्विक वित्तीय संकट २००८ में आया था
    तब लातविया को,
  25. एक छोटी, खुली अर्थव्यवसथा के भांति,
    कड़ी मुश्किल का सामना करना पड़ा था।
  26. बही खातों को संतुलित करने के लिए,
    लातवियाई सरकार ने
  27. आंतरिक अवमूल्यन की रणनीति को चुना था।
  28. अब, संक्षेप में, इसका मतलब
  29. सार्वजनिक बजट खर्च को
    ज़बरदस्त रूप से कम करना था,
  30. इसलिए, सार्वजनिक क्षेत्र के श्रमिकों के
    वेतन मे कमी,
  31. सिविल सेवा का घटना,
  32. बेरोज़गारी लाभ और
    अन्य सामाजिक सहायतों में कटौती,
  33. टैक्स मे बढ़त।
  34. मेरी माँ, उनके पूरे जीवन से,
    इतिहास की शिक्षिका के रूप में

  35. काम कर रहीं हैं।
  36. उनके लिए कठिनता का मतलब था
    उनके वेतन को अचानक से
  37. ३० प्रतिशत तक घटता देखना।
  38. और इस स्तिथि में कई थे, या बदतर।
  39. और संकट की लागत
    साधारण लातवियाई लोगों के

  40. कंधों पर डाल दी गई थी।
  41. संकट और कठोर नियमों के कारण,
  42. लातवियाई अर्थव्यवस्था दो साल की अवधि में
    २५ प्रतिशत तक सिकुड़ गई थी।
  43. केवल यूनान ने एक तुल्नीय पैमाने पर
    आर्थिक संकुचन का नुकसान उठाया था।
  44. फिर भी, जब यूनानी
    सड़कों पर महीनों निरंतर विरोध,
  45. अक्सर एथेंस में हिंसक विरोध,
    कर रहे थे, रीगा में सब शांत था।
  46. प्रसिद्ध अर्थशास्त्री
    "द न्यू‌‌याॅर्क टाइम्स" के काॅलम में
  47. लातविया के इस अनोखे
    तपस्या शासन के
  48. प्रयोग को लेकर लड़ रहे थे, और वे
    अविश्वास में देख रहे थे
  49. कि कैसे लातवी समाज
    इस शासन को निभा रहा था।
  50. मैं उस समय लंदंन में पढ़ रही थी,
  51. मुझे याद है कि वहां
    ऑक्यूपाई आंदोलन चल रहा था

  52. और वह कैसे शहर से शहर तक फैल रहा था,
  53. मैड्रिड से न्यूयाॅर्क,न्यूयाॅर्क से लंदन,
  54. एक प्रतिशत के विरुद्ध
    निन्यानवे प्रतिशत।
  55. आपको कहानी पता है।
  56. लेकिन, जब मैं रीगा पहुंची,
  57. वहाँ पर ऑक्यूपाई की कोई गूँज नहीं थी।
  58. लतावियाई बस उसे निभा रहे थे।
  59. जैसे कि स्थानीय कहावत है,
    "दे स्वाॅलोड द टोड"।
  60. मेरी डाॅक्टोरल अनुसंधान के लिए
    मैं अध्ययन करना चाहती थी कि
  61. लातविया में सोवियत काल के बाद
    कैसे राज्य-नागरिक संबंध बदल रहे थे,

  62. और मैंने
    बेरोज़गारी कार्यालय को
  63. मेरे अनुसंधान स्थल के रूप में चुना था।
  64. और जैसे ही मैं वहां पहुंची
    २०११ की उस शरद ऋितु में,
  65. मुझे एहसास हुआ कि
    "मैं वास्तव में
  66. प्रत्यक्ष रूप से देख रही हूं कि कैसे
    संकट का प्रभाव फीका पड़ रहा है,
  67. और इस्से सबसे ज़्यादा प्रभावित लोग,
    जो अपनी नौकरी खो चुके हैं,
  68. कैसे इस पर प्रतिक्रिया कर रहे हैं।"
  69. इसलिए मैंने
    उन लोगों का इंटरव्यू लेना शुरू कर दिया
  70. जिनसे मैं बेरोज़गार कार्यालय में मिली।
  71. वे सभी लोग
    नौकरी चाहने वालों के रूप में पंजीकृत थे

  72. और राज्य से मदद की उम्मीद लगाए बैठे थे।
  73. और जैसा कि मैं जल्द ही समझ रही थी,
    यह मदद एक विशेष प्रकार की थी।
  74. उसमें कुछ नकद लाभ था,
  75. लेकिन ज़्यादातर राज्य सहायता
    विभिन्न सामाजिक योजनाओं के रूप में थीं,
  76. और जिनमें सबसे बड़ी योजनाओं में से एक थी
    "प्रतियोगितात्मकता-बढ़ाती गतिविधियाएं"।
  77. वह, संक्षेप में,
    सेमिनारों की एक श्रंखला थी
  78. जिसमें भाग लेने के लिए
    सभी बेरोज़गारों को प्रोत्साहित किया गया था।
  79. तो मैंने उन लोगों के साथ
    इन सेमिनार में भाग लेना शुरू कर दिया।
  80. और कई विरोधाभासों ने मुझे प्रभावित किया।
  81. तो कल्पना करें:
  82. संकट अभी भी जारी है,

  83. लातवियाई अर्थव्यवस्था सिकुड़ रही है,
  84. शायद ही कोई काम पर रख रहा है,
  85. और हम वहां हैं,
  86. इस छोटी सी, उज्जवल कक्षा में,
  87. १५ लोगों का एक समूह,
  88. हमारी व्यक्तिगत
    शक्तियों और कमज़ोरियों की
  89. सूची पर काम कर रहे हैं,
    हमारे आंतरिक राक्षस,
  90. जिनके बारे में
    हमें बताया गया है कि
  91. वे हमें रोकते हैं
    श्रम बाज़ार में अधिक सफल होने से।
  92. जब सबसे बड़ा स्थानीय बैंक
    खैरात होता है

  93. तो उसके खैरात होने की लागत
  94. जनसंख्या के कंधों पर
    स्थानांतरित हो जाती है,
  95. हम एक घेरे में बैठे हैं
  96. और सीख रहे हैं कि
    जब तनाव हो तो गहरी सांस कैसे लेते हैं।

  97. (गहरी सांस)

  98. जैसे-जैसे गिरवी घर ज़प्त हो रहे हैं
  99. और हज़ारों की तादाद में
    लोग उत्प्रवास कर रहे हैं
  100. हमें बड़े सपने देखने
    और उनका पालन करने को कहा जा रहा है।

  101. एक समाज शास्त्री के रूप में,
  102. मुझे पता है कि
    सामाजिक नीतियां राज्य और नागरिक के बीच
  103. संचार का एक महत्वपूर्ण रूप हैं।
  104. इस योजना का संदेश था,
  105. एक प्रशिक्षक के
    शब्दों में बयां करूं तो,
  106. "बस कर दो"।
  107. बेशक, वह नाइके का ज़िक्र कर रही थीं।
  108. तथा प्रतीकात्मक रूप से राज्य
    बेरोज़गार लोगों को संदेश भेज रहा था कि
  109. आपको अधिक सक्रीय होने की आवश्यकता है,
    आपको अधिक महनत करने की आवश्यकता है,
  110. आपको खुद पर काम करने की ज़रूरत है,
    आपको अपने आंतरिक राक्षसों को
  111. दूर करने की आवश्यकता है,
    आपको और अधिक आश्वस्त होने की आवश्यकता है-
  112. किसी तरह बेरोज़गारी
    उनकी अपनी व्यक्तिगत विफलता थी।
  113. उस संकट के दुख का इलाज
  114. उसी तरह किया गया
    जिस तरह व्यक्तिगत तनाव का किया जाता है,
  115. गहरी और सचेत श्वास के माध्यम से।
  116. इस तरह की सामाजिक योजनाएं,

  117. जो व्यक्तिगत ज़िम्मेदारियों पर
    जोर दालती हैं,
  118. विश्व में तेजी से फैल रहीं हैं।
  119. वह हिस्सा हैं,
    समाजशास्त्री लूईक वकाँट जिसे कहते हैं,
  120. "नियोलिबरल सेंटॉर स्टेट" की उन्नति का।
  121. अब, सेंटाॅर, जैसा कि
    आप लोगों को याद आ रहा होगा,
  122. प्राचीन यूनानी संस्कृति में
    एक पौराणिक प्राणी है,
  123. आधा इंसान आधा जानवर।
  124. उसका उपरी हिस्सा
    मानव का होता है और निचला घोड़े का।
  125. तथा सेंटाॅर राज्य
    एक एसा राज्य है
  126. जो अपना मानवीय चहरा
    उनकी ओर मोड़ता है
  127. जो सामाजिक सीढ़ी के शीर्ष पर हैं,
  128. जबकि जो नीचे हैं वह रौंदे जाते हैं।
  129. तथा शीर्ष आय कमाने वाले
    और बड़े व्यवसाय
  130. टैक्स कटौती और अन्य सहायक नीतियों
    का आनंद ले सकते हैं,
  131. जबकि जो बेरोज़गार हैं, गरीब हैं,
  132. उन्हें राज्य की मदद के लिए
    खुद को साबित करना पड़ता है,
  133. जो नैतिक रूप से अनुशासित हैं
  134. उन्हें गैर ज़िम्मेदारी या निष्क्रिय या आलसी
  135. या अक्सर अपराधिकरण के
    रूप में कलंकित किया जाता है।

  136. लातविया में,
    नब्बे के दशक के बाद से,
  137. एसा ही सेंटार राज्य दृड़ता से था।
  138. उदाहरण के लिए,
    फ्लैट आयकर जो हमारे पास इस साल तक थी,
  139. सबसे ज़्यादा
    कमाने वालों को फायदा पहुंचा रही थी,
  140. जबकि एक चौथाई आबादी
    गरीबी में रह रही थी।
  141. और संकट और कठोर नियमों ने
    इस प्रकार की सामाजिक आसमानताओं को
  142. बदतर बना दिया है।
  143. तो जब बैंकों की पूंजी और
    धनवान की रक्षा हो रही थी,
  144. वह लोग जिन्होंने सबसे ज़्यादा खोया था,

  145. उन्हें व्यक्तिगत ज़िम्मेदारियों
    का पाठ पढ़ाया जा रहा था।
  146. तो जब मैं सेमिनार में
    लोगों से बात कर रही थी,
  147. मैं उनसे नाराज़ होने की उम्मीद कर रही थी।
    मैं उनसे
  148. व्यक्तिगत ज़िम्मेदारी के नाते, इन पाठों का
    विरोध करने की उम्मीद कर रही थी।
  149. आखिरकार, संकट उनकी गलती नहीं थी,
    फिर भी वे इसका खामियाजा भुगत रहे थे।
  150. लेकिन जैसे-जैसे लोग मुझसे
    उनकी कहानियाँ शेयर कर रहे थे,
  151. मैं बार बार
  152. ज़िम्मेदारी के
    विचार की शक्ति से प्रभावित हो रही थी।

  153. मैं जिन लोगों से मिली
    उनमें से एक थीं ज़ाॅनिते।
  154. वह २३ साल से रीगा के व्यावसायिक स्कूल में
  155. सिलाई और
    अन्य शिल्प सिखाने का काम कर रहीं थीं।
  156. और अब संकट आया,
  157. संकूल बंद हो गए
    आत्मसंयम के उपायों के रूप में।
  158. शैक्षिक प्रणाली का पुनर्गठन
    जनता के पैसे बचाने का एक तरीका था।
  159. देश भर में १०,००० शिक्षकों ने नौकरी खोई,
  160. और ज़ाॅनिते उनमें से एक थीं।
  161. और मुझे पता है
    वो क्या कहना चाह रही थी
  162. जब उसने बताया कि उसकी नौकरी खोने ने
    उसे हताश स्तिथि में डाल दिया,
  163. वह तलाकशुदा है, उसके दो किशोर हैं
    जिनकी वह एकमात्र प्रदाता है।
  164. और फिर भी,
    जैसा कि हम बात कर रहे हैं,
  165. वह मुझसे कहती है कि
    संकट वास्तव में एक अवसर है।
  166. वह कहती है, "मैं इस साल पचास साल की हो गई,
  167. मुझे लगता है कि जीवन ने
    वास्तव में मुझे
  168. मौका दिया है,
    इर्द-गिर्द देखने का, रुकने का
  169. क्योंकि इन सभी वर्षों में
    मैने निरंतर काम किया है,
  170. मेरे पास रुकने का समय नहीं था।
  171. और अब मैं रुक गई हूं,
  172. मुझे मौका दिया गया है
    सब कुछ देखने का
  173. और तय करने का कि
    मुझे क्या चाहिए और क्या नहीं।
  174. यह सब समय, सिलाई,
    सिलाई, एक तरह की थकावट।"

  175. तो ज़ाॅनिते को २३ साल बाद
    बेरोज़गार बना दिया गया।
  176. लेकिन वह विरोध करने का नहीं सोच रहीं।
  177. वह निन्यानवे प्रतिशत के एक प्रतिशत के
    खिलाफ होने की बात नहीं कर रहीं है।
  178. वह खुद का विश्लेषण कर रहीं हैं।
  179. और वह व्यावहारिक रूप से सोच रहीं थीं
  180. उनके शयनकक्ष से
  181. स्मारिक गुड़िया बनाकर पर्यटकों को
    बेचने का व्यवसाय शुरू करने का।

  182. मैं बेरोज़गारी कार्यालय में
    आयवार्स से भी मिली।
  183. अयवार्स अपने चालिस के दशक के अंत में थे,
  184. उन्होंने सड़क निर्माण देखरेख की
    सरकारी एजेन्सी में अपनी नौकरी खो दी थी।
  185. हमारी एक मीटिंग में आयवार्स
    एक किताब लाते हैं जिसे वह पढ़ रहे थे।
  186. उसका नाम था "वैक्सिनेशन अगेंस्ट स्ट्रैस,
    या साइको-एनरजेटिक ऐकिडो"।
  187. अब आप लोगों में से
    कुछ को पता होगा कि
  188. ऐकिडो मार्शल आर्ट का एक रूप है,
    तो, साएको एनरजेटिक ऐकिडो।
  189. और आयवार्स मुझे बताते हैं कि
    बेरोज़गारी के समय
  190. कई महीनों तक पढ़ने सोचने और
    विचार करने के बाद,
  191. वह समझ गए हैं कि उनकी वर्तमान कठिनाइयां
  192. वस्तव में उन्हीं के कार्य का फल है।
  193. वह मुझसे कहते हैं,
    "मैंने इसे खुद बनाया है।
  194. मैं एक ऐसी मनोवैज्ञानिक अवस्था में था
    जो मेरे लिए अच्छी नहीं थी।
  195. अगर कोई व्यक्ति पैसा या
    नौकरी खोने से डरता है,
  196. वह अधिक तनावग्रस्त, अशांत
    और भयभीत होने लगता है।
  197. ऐसे लोगों को यही मिलता है।"

  198. जब मैंने उनसे समझाने को कहा,
  199. तो वह अपने विचारों की तुलना
    कविताओं की भांति
  200. सभी दिशाओं में भागने वाले
    जंगली घोड़ों से करते हैं और कहते हैं,
  201. "आपको आपके विचारों का चरवाहा होना चाहिए।
  202. चीजों को इस आर्थिक दुनिया में
    क्रम में लाने के लिए,
  203. "आपको आपके विचारों का चरवाहा होना चाहिए।
  204. क्योंकि आपके विचारों के
    माध्यम से ही सब कुछ क्रम में आता है। "
  205. वह कहते हैं, "हाल ही में मैं
    स्पष्ट रूप से समझ गया हूं कि
  206. मेरे आस-पास की दुनिया, मेरा कया होगा
    और मेरे जीवन में प्रवेश करने वाले लोग,
  207. यह सब प्रत्यक्ष रूप से
    मुझ पर निर्भर करता है।"
  208. तो लातविया जब
    इस चरम आर्थिक परीक्षा से गुज़र रही थी
  209. आयवार्स कहते हैं कि यह
    उनके सोचने का तरीका है जिसे बदलना होगा।

  210. जिस्से वह इस समय गुज़र रहे हैं
    उसका वह खुद को दिशी ठहरा रहे हैं।
  211. तथा ज़िम्मेदारी लेना
    एक अच्छी बात है, है ना?
  212. यह सोवियत के बाद के समाज में
  213. विशेष रूप से सार्थक है
    और नैतिक रूप से प्रभारित किया गया है,
  214. जहां राज्य पर निर्भरता
    सोवियत काल की
  215. दुर्भाग्यपूर्ण विरासत के
    रुप में देखी जाती थी।
  216. लेकिन जब मैंने ज़ाॅनिते और अयवार्स
    और दूसरों को सुना,
  217. मैंने यह सोचा कि
    यह सवाल, कि,
  218. "आपकी ज़िम्मेदारी कहां है",
  219. कितना क्रूर है, कितना दंडनीय है।
  220. क्योंकि यह एक तरह से उन लोगों को,
    जो संकट से सबसे बुरी तरह प्रभावित हुए थे,
  221. दोशी ठहरा रहा था
    और शांत कर रहा था।
  222. तो जब यूनानी सड़कों पर थे,
    लातविय "स्वाॅलोड द टोड"
  223. और कई दसियों हजार उत्सर्जित हुए,

  224. जो ज़िम्मिदारी लेने का एक और तरीका है।
  225. तो भाषा, व्यक्तिगत ज़िम्मेदारी की भाषा,
    सामूहिक इनकार का रूप बन गई।
  226. जब तक हमारे पास सामाजिक नीतियां हैं
    जो बेरोज़गारी के साथ
  227. व्यक्तिगत विफलता के रूप में पेश आतीं हैं
  228. लिकिन हमारे पास उन योजनाओं के लिए,
    जो लोगों को
  229. वास्तविक कौशल प्रदान करतीं हैं
    या कार्यस्थल बनातीं हैं,
  230. पर्याप्त धन नहीं है तो हम
  231. नीति निर्माताओं की
    ज़िम्मेदारी से बेखबर हैं।
  232. जब तक हम
    गरीबों को निष्क्रीय
  233. या आलसी के रूप में कलंकित करते हैं
    लेकिन उन्हें गरीबी से बाहर निकलने के लिए,
  234. उप्रवास के अलावा,
    कोई वास्तविक साधन नहीं देते,
  235. हम गरीबी के सही कारणों को नकार रहे हैं।
  236. और इस बीच, हम सभी पीड़ित हैं,
    क्योंकि सामाजिक वैज्ञानिकों ने
  237. विस्तृत सांख्यिकीय
    आंकणों के साथ दिखाया है कि
  238. उन समाजों में
    जहां उच्च स्तर की आर्थिक असमानता है,
  239. वहां ज़्यादा लोग, दोनों,
    मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य
  240. समस्याओं का कष्ट उठा रहे हैं।
  241. इसलिए सामाजिक असमानता
    जाहिर तौर पर बुरी है,
  242. न केवल कम से कम
    संसाधनों वाले लोगों के लिए,
  243. बल्कि हम सब के लिए
    क्योंकि

  244. उच्च असमानता वाले समाज में रहना
    मतलब कम सामाजिक विश्वास
  245. और उच्च चिंता के साथ रहना।
  246. और वहां हम हैं, हम सभी
    स्वयं-सहायता पुस्तकें पढ़ रहे हैं,
  247. हम अपनी आदतों को
    काटने की कोशिश कर रहे हैं,
  248. हम अपने दिमाग को
    फिरसे जमाने की कोशिश कर रहे हैं,
  249. हम ध्यान कर रहे हैं।
  250. और यह, ज़ाहिर है,
    एक तरह से मदद करता है।
  251. स्व-सहायता पुस्तकें हमें अधिक
    उत्साहित महसूस करने में मदद करतीं हैं।
  252. ध्यान हमें दूसरों से आध्यात्मिक रूप में
  253. अधिक जुड़ा हुआ
    महसूस करने में मदद करता है।
  254. मुझे लगता है हमें दूसरों से
    सामाजिक रूप में जुड़नें की जागरुकता चाहिए,
  255. क्योंकि सामाजिक असमानता
    हम सभी को ठेस पहुंचाती है।
  256. इसलिए हमें चाहिए दयालू सामाजिक नीतियां
  257. जिनका उद्देश्य नैतिक शिक्षा का कम

  258. और सामाजिक न्याय और

  259. समानता की पदोन्नति पर अधिक है।
  260. धन्यवाद।

  261. (तालियां)