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← इतिहास के पहले साम्राज्य का उदय और पतन - सोराया फील्ड फ़्लोरिओ

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Showing Revision 3 created 10/19/2020 by Arvind Patil.

  1. इतिहास का पहला राज्य
    एक सूखे रेगिस्तान से उभरा
  2. जहां बारिश के बिना फसलें नहीं उगती थी
    न इमारतें बनाने को पेड़ और पत्थर थे.
  3. इस सब के बावजूद यहाँ के नागरिकों ने
    विश्व के सबसे पहले शहर की स्थापना की
  4. इस शहर में भव्य वास्तु कला थी
    और बहुत बड़ी लोकसंख्या थी.
  5. ये शहर पूरी तरह से मिट्टी का बना था.
  6. सुमेर इराक के दक्षिणी भाग में स्थित था.

  7. उस भाग को मेसोपोटामिया कहते हैं.
  8. मेसोपोटामिया का अर्थ है
    दो नदियों के बीच में
  9. टिगरिस और यूफ्रेटीज
  10. 5000 इसा पूर्व में सुमेर वासी सिंचाई,
    बांध और जलाशय बना रहे थे,
  11. ताकि पानी का पुनर्निर्देशन करके
    सुखी ज़मीन तक पहुंचाया जा सके
  12. इस तरह के कृषि समुदाय
    धीरे धीरे सब जगह उभर रहे थे.
  13. पर सुमेर वासी पहले थे
    जिन्होंने अगला कदम उठाया
  14. नदी की मिट्टी से बनी ईटों से
  15. उन्होंने बहु मंजिला घर और मंदिर बनाये.
  16. पहिये का अविष्कार किया
  17. कुम्हार का चाक जिससे मिटटी के
    घरेलु सामान और हथियार बनाये.
  18. इन्ही ईटों से दुनिया
    का पहला शहर बनाया गया.

  19. 4500 इसा पूर्व में
  20. शहर की सामाजिक सिढ़ी में
    सबसे ऊपर थे पुजारी
  21. उन्हें कुलीन माना जाता था.
  22. फिर आते थे व्यापारी, कलाकार और किसान
    और आखिर में आते थे ग़ुलाम
  23. सुमेर साम्राज्य में कई छोटे नगर थे
  24. वे स्वयं छोटे साम्राज्य थे.
  25. वे आपस में भाषा और
    आध्यात्मिक विचारों से जुड़े थे.
  26. पर उनपर केंद्रीय नियंत्रण नहीं था.
  27. सबसे पहले शहर थे उरुक ,उर और एरिडु
  28. और धीरे धीरे कई नगर उभर आये
  29. हर नगर में एक राजा था
    जो पुजारी और शासक दोनों था.
  30. कभी कभी वे आपस में लड़कर नए क्षेत्र जीतते
  31. हर शहर में एक संरक्षक देवता था
    जो उस शहर का निर्माता माना जाता था
  32. शहर की सबसे महत्वपूर्ण ईमारत
    उस देवता का मंदिर थी
  33. ज़िग्गराट एक ऐसा मंदिर था
    जिसका निर्माण पिरामिड की तरह किया गया था
  34. 3200 इसा पूर्व में सुमेर वासी
    अपनी पहुंच बढ़ाने लगे

  35. कुम्हार के चाक का इस्तेमाल
    रथों और गाड़ियों में होने लगा
  36. ईख और खजूर के पत्तों से नौकाएं बनने लगी
  37. नावों की पाल उन्हें
    दूर दिशाओं में लेने जाने लगीं
  38. सीमित संसाधन से जूझने के लिए उन्होंने
    व्यापर तंत्र का नियोजन किया
  39. अनातोलिया ईजिप्ट और इथिओपिया के साथ
  40. वे सोना चांदी लापीस लाजुली और
    देवदार की लकड़ी आयात करने लगे
  41. व्यापर एक प्रेरणा थी

  42. दुनिया की पहली लेखन प्रणाली के लिए
  43. इसकी शुरुआत व्यापारियों के
    लेखे जोखे से हुई.
  44. दूसरे शहरों के व्यापारियों से
    व्यापर करते हुए
  45. कुछ सदियों बाद यह चित्रलेख प्रणाली
  46. जिसे कुनीफॉर्म कहा जाता था
    एक लिपि में परिवर्तित हो गयी
  47. उन्होंने सबसे पहले लिखित कानून तैयार किये
  48. और पहली शिक्षण प्रणाली बनायी
    जिसमे लिखाई की कला सिखाई जाती थी
  49. उन्होंने कुछ कम रोमांचक आविष्कार किये
    जैसे नौकरशाही और कर
  50. शालाओं में मुंशी सुबह से शाम तक पढ़ते थे.

  51. बचपन से वयस्क होने तक
  52. वे लेखांकन और गणित सीखते
    साहित्य की नकल के काम करते
  53. भजन, मिथक, कहावत, जानवर कल्पित
    और जादू मंत्र
  54. और पहला महाकाव्य
    मिटटी की पट्टियों पर लिखते
  55. इनमे से कुछ पत्तियों पे
    गिलगमेश की कहानी थी
  56. उरुक का राजा जिसपर कई कल्पित रचे गए हैं
  57. 3000 इसा पूर्व तक
    सुमेर अकेला साम्राज्य नहीं था

  58. न ही मेसोपोटामिया
  59. उत्तर और पूर्व से कई बंजारे
    इस भाग में आये
  60. इन में से कई सुमेर वासियों की इज़्ज़त करते
    और उनकी जीवनशैली अपनाते
  61. और उनकी लिपि से अपनी भाषाएं लिखते
  62. 2300 इसा पूर्व में अक्कादिअन सार्गोन ने
    सुमेर के सारे नगर जीत लिए
  63. पर सारगोन सुमेर संस्कृती की
    इज़्ज़त करता था
  64. और कई सदियों तक अक्कादी और
    सुमेर संस्कृतियाँ साथ में पनपीं
  65. बाकी हमलावर समूह लूटपाट और तबाही
    पर ही ध्यान देते
  66. हालांकि सुधार की संस्कृति का
    प्रसार हो रहा था
  67. कई आक्रमणों ने 1750 इसा पूर्व तक
    सुमेर के लोगों का विनाश कर दिया
  68. बादमे सुमेर
    रेगिस्तान की मिटटी में मिल गया

  69. और उन्नीसवीं शताब्दी तक
    फिरसे नहीं खोजा गया
  70. पर सुमेर संस्कृति हज़ारो सालो तक जीवित रही
  71. पहले अक्कादियों फिर अस्सीरियों
    और फिर बेबीलोनिया के ज़रिये
  72. बेबीलोनिया ने सुमेरी आविष्कारों को
  73. हिब्रू ग्रीक और रोमन संस्कृतियों
    तक पहुंचाया
  74. उनमे से कुछ आज तक जीवित हैं